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ग्राम प्रधान और सचिव ने मिलकर किया 34 लाख का गड़बड़झाला
Updated Wed, 04 Jul 2018 01:40 AM IST
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मेरठ। रजपुरा ब्लॉक के ग्राम रसूलपुर औरंगाबाद के ग्राम प्रधान और सचिव 40 लाख से ज्यादा के गड़बड़झाले की जांच में फंस गए हैं।
अहम बात ये है कि इस पूरे मामले की पहले सीडीओ के माध्यम से जांच करायी गयी। लेकिन जांच में आरोप पुष्ट न होने पर भी कार्रवाई न करने पर मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने जांच रिपोर्ट का स्वयं परीक्षण किया। जिसमें पूरा मामला सामने आने पर 6.74 लाख रुपये से ऊपर की वित्तीय अनियमितता का आरोप भी पुष्ट हो गया। मंडलायुक्त ने प्रधान और सचिव के अधिकार सीज करने के आदेश देने के साथ सीडीओ और डीपीआरओ से भी स्पष्टीकरण मांगा है।
दरअसल मंडलायुक्त से ग्राम रसूलपुर औरंगाबाद के प्रधान और सचिव की शिकायत की गयी थी। जिसमें लाखों रुपये गबन करने के साथ ही शौचालय निर्माण में धांधली करते हुए लाखों रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाया गया था। इस मामले में मंडलायुक्त ने सीडीओ से जांच रिपोर्ट मांगी थी। सीडीओ ने सहायक निदेशक राष्ट्रीय बचत, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के सहायक अभियंता और जिला ग्रामीण अभियंत्रण के अवर अभियंता की टीम गठित कर जांच कराई थी।
यह पाया जांच में
टीम ने जांच में पाया कि किसी भी वित्तीय लेनदेन में शासकीय नियमों का पालन नहीं किया गया। रिपोर्ट में स्पष्ट बताया गया कि प्रधान और सचिव द्वारा 10,49,830 रुपये की धनराशि का गबन किया गया है। जबकि गांव में जो शौचालय बनवाए गए हैं, उनमें मात्र 66 शौचालयों में ही सोकपिट का निर्माण हुआ है। इसके अलावा जांच समिति द्वारा 23,88,133 रुपये की धनराशि निष्प्रयोज्य हो जाने का दोषी भी प्रधान और सचिव को माना था।
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परीक्षण में फंसा मामला
इस मामले में ग्राम प्रधान को नोटिस जारी किया गया। जिसके परीक्षण में सीडीओ द्वारा तत्कालीन डीएम के अनुमोदन से सहायक निबंधक सहकारी समिति को परीक्षण अधिकारी नियुक्त किया गया। लेकिन इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद मंडलायुक्त ने इस पूरी जांच रिपोर्ट का स्वयं अवलोकन किया। जिसमें उन्होंने पाया कि सीडीओ स्तर पर यह पुर्नपरीक्षण की कार्रवाई ग्राम प्रधान व सचिव को बचाने के लिए मात्र लीपापोती करने के उद्देश्य से की गयी और पत्रावली का निपटारा कर दिया गया।
मंडलायुक्त ने यह की कार्रवाई
- मंडलायुक्त ने कहा कि जिस जांच टीम में सहायक निदेशक राष्ट्रीय बचत शामिल हों, उसकी जांच आख्या का परीक्षण सहायक सहकारी निरीक्षक कैसे कर सकता है और किस कारण से उसकी आख्या पर पत्रावली निक्षेप की जा सकती है।
- जांच आख्या में तमाम चैक स्वयं द्वारा भुगतान करना दर्शाया गया है। इसके बारे में भी सहायक सहकारी निरीक्षक ने कोई परीक्षण नहीं किया।
- मंडलायुक्त ने अपर आयुक्त और संयुक्त विकास आयुक्त की एक समिति गठित की और उनके द्वारा विस्तृत जांच की गयी। जिसमें पाया गया कि तकनीकी मूल्यांकन में 6,74,221 रुपये की अनियमितता और पायी गयी हैं। जिसके लिए पूरी तरह प्रधान काशीनाथ शर्मा और सचिव हरबीर सिंह दोषी हैं।
- मंडलायुक्त ने इस रुपये की दोनों से रिकवरी करने, दोनों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने, तत्काल प्रभाव से सचिव और प्रधान के अधिकार सीज करने तथा मामले पर लीपापोती करने के लिए सीडीओ और जिला पंचायत राज अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश दिए हैं।
- साथ ही सहायक निबंधक सहकारी समिति द्वारा स्वयं जांच न करने और सहायक सहकारी निरीक्षक द्वारा शिकायत निपटाने की संस्तुति करने के लिए प्रतिकूल प्रविष्टि देने का आदेश दिया है।
खास बातें:
23.88 लाख रुपये की धांधली शौचालय निर्माण में
10.49 लाख की धनराशि का कर दिया गबन
6.74 लाख रुपये की अनियमितता अलग से मिली
- रजपुरा ब्लाक के ग्राम रसूलपुर औरंगाबाद का मामला
- मंडलायुक्त ने पकड़ी गड़बड़ी, अधिकार किए सीज
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अहम बात ये है कि इस पूरे मामले की पहले सीडीओ के माध्यम से जांच करायी गयी। लेकिन जांच में आरोप पुष्ट न होने पर भी कार्रवाई न करने पर मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने जांच रिपोर्ट का स्वयं परीक्षण किया। जिसमें पूरा मामला सामने आने पर 6.74 लाख रुपये से ऊपर की वित्तीय अनियमितता का आरोप भी पुष्ट हो गया। मंडलायुक्त ने प्रधान और सचिव के अधिकार सीज करने के आदेश देने के साथ सीडीओ और डीपीआरओ से भी स्पष्टीकरण मांगा है।
दरअसल मंडलायुक्त से ग्राम रसूलपुर औरंगाबाद के प्रधान और सचिव की शिकायत की गयी थी। जिसमें लाखों रुपये गबन करने के साथ ही शौचालय निर्माण में धांधली करते हुए लाखों रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाया गया था। इस मामले में मंडलायुक्त ने सीडीओ से जांच रिपोर्ट मांगी थी। सीडीओ ने सहायक निदेशक राष्ट्रीय बचत, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के सहायक अभियंता और जिला ग्रामीण अभियंत्रण के अवर अभियंता की टीम गठित कर जांच कराई थी।
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यह पाया जांच में
टीम ने जांच में पाया कि किसी भी वित्तीय लेनदेन में शासकीय नियमों का पालन नहीं किया गया। रिपोर्ट में स्पष्ट बताया गया कि प्रधान और सचिव द्वारा 10,49,830 रुपये की धनराशि का गबन किया गया है। जबकि गांव में जो शौचालय बनवाए गए हैं, उनमें मात्र 66 शौचालयों में ही सोकपिट का निर्माण हुआ है। इसके अलावा जांच समिति द्वारा 23,88,133 रुपये की धनराशि निष्प्रयोज्य हो जाने का दोषी भी प्रधान और सचिव को माना था।
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परीक्षण में फंसा मामला
इस मामले में ग्राम प्रधान को नोटिस जारी किया गया। जिसके परीक्षण में सीडीओ द्वारा तत्कालीन डीएम के अनुमोदन से सहायक निबंधक सहकारी समिति को परीक्षण अधिकारी नियुक्त किया गया। लेकिन इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद मंडलायुक्त ने इस पूरी जांच रिपोर्ट का स्वयं अवलोकन किया। जिसमें उन्होंने पाया कि सीडीओ स्तर पर यह पुर्नपरीक्षण की कार्रवाई ग्राम प्रधान व सचिव को बचाने के लिए मात्र लीपापोती करने के उद्देश्य से की गयी और पत्रावली का निपटारा कर दिया गया।
मंडलायुक्त ने यह की कार्रवाई
- मंडलायुक्त ने कहा कि जिस जांच टीम में सहायक निदेशक राष्ट्रीय बचत शामिल हों, उसकी जांच आख्या का परीक्षण सहायक सहकारी निरीक्षक कैसे कर सकता है और किस कारण से उसकी आख्या पर पत्रावली निक्षेप की जा सकती है।
- जांच आख्या में तमाम चैक स्वयं द्वारा भुगतान करना दर्शाया गया है। इसके बारे में भी सहायक सहकारी निरीक्षक ने कोई परीक्षण नहीं किया।
- मंडलायुक्त ने अपर आयुक्त और संयुक्त विकास आयुक्त की एक समिति गठित की और उनके द्वारा विस्तृत जांच की गयी। जिसमें पाया गया कि तकनीकी मूल्यांकन में 6,74,221 रुपये की अनियमितता और पायी गयी हैं। जिसके लिए पूरी तरह प्रधान काशीनाथ शर्मा और सचिव हरबीर सिंह दोषी हैं।
- मंडलायुक्त ने इस रुपये की दोनों से रिकवरी करने, दोनों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने, तत्काल प्रभाव से सचिव और प्रधान के अधिकार सीज करने तथा मामले पर लीपापोती करने के लिए सीडीओ और जिला पंचायत राज अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश दिए हैं।
- साथ ही सहायक निबंधक सहकारी समिति द्वारा स्वयं जांच न करने और सहायक सहकारी निरीक्षक द्वारा शिकायत निपटाने की संस्तुति करने के लिए प्रतिकूल प्रविष्टि देने का आदेश दिया है।
खास बातें:
23.88 लाख रुपये की धांधली शौचालय निर्माण में
10.49 लाख की धनराशि का कर दिया गबन
6.74 लाख रुपये की अनियमितता अलग से मिली
- रजपुरा ब्लाक के ग्राम रसूलपुर औरंगाबाद का मामला
- मंडलायुक्त ने पकड़ी गड़बड़ी, अधिकार किए सीज