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स्वास् थ्य मंत्री से मिले सेंट्रल मार्केट के व्यापारी
Updated Sat, 09 Sep 2017 02:11 AM IST
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मंत्री से मिले व्यापारी
- सेंट्रल मार्केट मामले में व्यापारियों ने रखा पक्ष, समाधान के सुझाव भी दिए
फोटो
मेरठ। सेंट्रल मार्केट धवस्तीकरण के नोटिस के बाद व्यापारियों ने सर्किट हाउस में मेरठ के प्रभारी मंत्री सिदार्थ नाथ सिंह से मुलाकात की। सेंट्रल मार्केट व्यापार संघ अध्यक्ष किशोर वाधवा, राजकुमार, विनोद अरोड़ा, चौधरी महिपाल सिंह, रजत गोयल, नवीन रस्तौगी ,आशीष गोयल, राजकुमार, भाजपा नेता सतीश गर्ग आदि ने मंत्री को ज्ञापन देकर कई तथ्य और समाधान के सुझाव भी दिए ।
व्यापारियों ने मंत्री को बताया कि सालों पहले उन्हें उक्त आवासीय आवंटन हुआ था। आवास विकास द्वारा यहां बसी आबादी को मूलभूत सुविधाएं ना मिलने की वजह से ही यहां आवासीय भवनों में व्यवसायिक कार्य शुरू हुआ और धीरे धीरे मार्केट बन गया। जिससे कई परिवारों की रोजी रोटी चलती है। व्यापारियों ने कई तथ्य भी मंत्री के समक्ष रखे। उन्होंने बताया कि उक्त क्षेत्र में व्यवसायिक दर पर बैनामे होते हैं। नगर निगम व्यवसायिक दर से गृह, जलकर वसूलता है। विद्युत विभाग उन्हें व्यवसायिक कनेक्शन देता है व्यवसायिक दरों से विद्युत बिल वसूला जाता है। व्यापार कर भी यहां रजिस्ट्रेशन करता है। सरकार को टैक्स देते हैं। व्यापारियों ने अपने ज्ञापन के माध्यम से सुझाव दिया कि आवास विकास के अंतर्गत आने वाली सभी व्यवसायिक गतिविधियों को शमन शुल्क वसूल कर नियमित कर दिया जाए। व्यवसायिक कार्य जितने क्षेत्र में हो रहा है उसी क्षेत्रफल के हिसाब से शमन शुल्क लिया जा सकता है।
आबादी तो बसा दी सुविधाएं दी नहीं
व्यापारियों ने आवास विकास परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि परिषद आवासीय भूखंड तो आवंटित क र देता है, लेकिन इनमें रहने वाली आबादी के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जाती। उन्होंने मंत्री से अनुरोध किया कि वे अफसरों से पूछें कि उन्होंने इतने बड़े आबादी वाले क्षेत्र में कितने अस्पताल, बैंक, बिजलीघर ,स्कूल, कालेज, पुलिस चौकी खोलने के लिए भूखंडों का आवंटन किया है।
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- सेंट्रल मार्केट मामले में व्यापारियों ने रखा पक्ष, समाधान के सुझाव भी दिए
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मेरठ। सेंट्रल मार्केट धवस्तीकरण के नोटिस के बाद व्यापारियों ने सर्किट हाउस में मेरठ के प्रभारी मंत्री सिदार्थ नाथ सिंह से मुलाकात की। सेंट्रल मार्केट व्यापार संघ अध्यक्ष किशोर वाधवा, राजकुमार, विनोद अरोड़ा, चौधरी महिपाल सिंह, रजत गोयल, नवीन रस्तौगी ,आशीष गोयल, राजकुमार, भाजपा नेता सतीश गर्ग आदि ने मंत्री को ज्ञापन देकर कई तथ्य और समाधान के सुझाव भी दिए ।
व्यापारियों ने मंत्री को बताया कि सालों पहले उन्हें उक्त आवासीय आवंटन हुआ था। आवास विकास द्वारा यहां बसी आबादी को मूलभूत सुविधाएं ना मिलने की वजह से ही यहां आवासीय भवनों में व्यवसायिक कार्य शुरू हुआ और धीरे धीरे मार्केट बन गया। जिससे कई परिवारों की रोजी रोटी चलती है। व्यापारियों ने कई तथ्य भी मंत्री के समक्ष रखे। उन्होंने बताया कि उक्त क्षेत्र में व्यवसायिक दर पर बैनामे होते हैं। नगर निगम व्यवसायिक दर से गृह, जलकर वसूलता है। विद्युत विभाग उन्हें व्यवसायिक कनेक्शन देता है व्यवसायिक दरों से विद्युत बिल वसूला जाता है। व्यापार कर भी यहां रजिस्ट्रेशन करता है। सरकार को टैक्स देते हैं। व्यापारियों ने अपने ज्ञापन के माध्यम से सुझाव दिया कि आवास विकास के अंतर्गत आने वाली सभी व्यवसायिक गतिविधियों को शमन शुल्क वसूल कर नियमित कर दिया जाए। व्यवसायिक कार्य जितने क्षेत्र में हो रहा है उसी क्षेत्रफल के हिसाब से शमन शुल्क लिया जा सकता है।
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आबादी तो बसा दी सुविधाएं दी नहीं
व्यापारियों ने आवास विकास परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि परिषद आवासीय भूखंड तो आवंटित क र देता है, लेकिन इनमें रहने वाली आबादी के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जाती। उन्होंने मंत्री से अनुरोध किया कि वे अफसरों से पूछें कि उन्होंने इतने बड़े आबादी वाले क्षेत्र में कितने अस्पताल, बैंक, बिजलीघर ,स्कूल, कालेज, पुलिस चौकी खोलने के लिए भूखंडों का आवंटन किया है।
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