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हाईटेक होने के बजाय पिछड़ गए कॉलेज

Fri, 08 Feb 2019 01:59 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 08 Feb 2019 01:59 AM IST
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हाईटेक होने के बजाय पिछड़ गए कॉलेज
प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में भी खूब बन रहे हॉस्टल
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कॉलेजों में बने बनाए खत्म हो गए

मेरठ। सीसीएसयू कैंपस में बहुत जल्द नए हॉस्टल का निर्माण होने वाला है। वजह यहां के सभी आठ हॉस्टलों में सीटें फुल रहती हैं। कई नए कोर्स शुरू होने के बाद हॉस्टल की डिमांड बढ़ गई है। एक तरफ जहां विवि कैंपस में हॉस्टलों की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है, वहीं मेरठ के बड़े कॉलेज हाईटेक होने की बजाय पिछड़ रहे हैं। 20 से 25 साल पहले तक मेरठ कॉलेज, एनएएस कॉलेज और माछरा के डिग्री कॉलेज में हॉस्टल की वजह से पढ़ाई का अलग ही माहौल रहता था। लेकिन अब हॉस्टल के साथ ही यहां पढ़ाई का माहौल भी खत्म सा हो चुका है।
सन् 1892 में बने मेरठ कालेज का डंका देश भर में बजता है। भारत के सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत हों या फिर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल। मुरली मनोहर जोशी से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह तक यहां के एल्युमिनी रह चुके हैं। दूरदराज के छात्रों की परेशानी को देखते हुए यहां एचएकेए, ओडीए, आरडीए, बीएनएम, सीताराम ब्वॉयज और सरस्वती महिला छात्रावास बनाया गया था। इन सभी हॉस्टल में 1000 के अधिक सीटें थीं। साल 2005 तक हॉस्टलों में सीटें पाने के लिए मारामारी रही। इसके बाद सीटें खाली होने लगीं। साल 2008 के बाद ओडीए, आरडीए और एचएके हॉस्टल बंद हो गए। सीताराम हॉस्टल भी बंद हो चुका है। जो दो हॉस्टल बीएनएम और सरस्वती गर्ल्स चल रहे हैं, उनमें भी सीटें फुल नहीं हैं।
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एनएएस कॉलेज के तीनों हॉस्टल बंद
1952 में शुरू हुए एनएएस कॉलेज में भी तीन हॉस्टल थे। इनमें ओल्ड हॉस्टल, न्यू हॉस्टल और सूरजमल दीक्षित हॉस्टल था। ओल्ड हॉस्टल और न्यू हॉस्टल साल 2000 से पहले तक भरे रहते थे। इसके बाद इनको खाली कराकर दूसरे कार्यों में प्रयोग किया जाने लगा। सूरजमल दीक्षित हॉस्टल में भी 2004 तक सारी सीटें भरी हुई थीं। प्राचार्य ने हॉस्टल में काम कराने की बात कहकर उसे खाली कराया और इसके बाद हॉस्टल को तुड़वा दिया। माछरा डिग्री कॉलेज में भी सन 1995 से पहले तक हॉस्टल फुल रहता था। उसके बाद कॉलेज प्रशासन ने उसे बंद करा दिया।
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गुंडागर्दी भी रही खाली होने की वजह
इन हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने वाले पुराने छात्रों की मानें तो हॉस्टल के खाली होने का सबसे बड़ा कारण गुंडागर्दी रही। कई ने तो यहां परमानेंट ठिकाना बना लिया। मेस तक के पैसे नहीं देते थे। आउट साइडर अधिक आने लगे। इसके चलते पढ़ने वाले छात्र शहर में रूम लेकर रहने लगे। धीरे-धीरे कॉलेजों में हॉस्टल बंद हो गये।

जो ऐतिहासिक था, उसे तो संजोकर रखें
रालोद के वरिष्ठ नेता डॉ. राजकुमार सांगवान बताते हैं कि 1986 तक मेरठ कालेज में ईरान, साउथ अफ्रीका और थाईलैंड तक के छात्र हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करते थे। माछरा के डिग्री कॉलेज में एग्रीकल्चर होने की वजह से देशभर के छात्र यहां हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करते थे। एनएएस कॉलेज में भी बड़ी संख्या में बाहर के छात्र रहते थे। लेकिन धीरे-धीरे सब बंद हो गए। इसके लिए कॉलेज प्रशासन भी जिम्मेदार है। अगर कोई असामाजिक तत्व हॉस्टल में आता है तो वह भी कालेज प्रशासन का फेल्योर है। ये हॉस्टल बच्चों की सुविधा को देखते हुए बनाए गए थे। हॉस्टलों की वजह से कॉलेज में पढ़ाई का अलग ही माहौल रहता था। इन्हें संजोना चाहिए था।


नजीर है सीसीएसयू
एक तरफ जहां कॉलेजों में हॉस्टल बंद हो गए। वहीं 3300 छात्रों वाले सीसीएसयू कैंपस में सभी आठ हॉस्टलों में सीटें फुल हैं। इसी वजह से यहां एक नया हॉस्टल बनाया जा रहा है। कैंपस की तरह कॉलेजों में भी प्रशासन और मैनेजमेंट हॉस्टलों को ठीक से मेंटेन रखता तो यहां पर भी पढ़ाई का वही पुराना माहौल होता।
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