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35 कंपनियां
Updated Sun, 03 Sep 2017 03:07 AM IST
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आईटी पार्क : 35 कंपनियां देंगी युवाओं को रोजगार की राह
मेरठ। युवाओं को रोजगार देने के लिए 35 कंपनियों से संपर्क साधा जा रहा है। मेरठ में बनने जा रहे आईटी पार्क में युवाओं के लिए कैरियर की नई दिशा तय होगी। पांच सितंबर को इसका भूमि पूजन होने की तैयारी पूरी हो चुकी है। उधर, किसानों का कहना है कि पहले उन्हें जमीन का मुआवजा तो दें। हालांकि किसानों के मुआवजे की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है और जल्द ही यह शुरू होने वाला है।
यह है पूरा प्रस्ताव
वेदव्यासपुरी में आईटी पार्क के लिए 28785 वर्ग मीटर यानी साढे़ सात एकड़ जमीन आरक्षित की गई है। इसमें से 10102 वर्ग मीटर यानी ढाई एकड़ जमीन एमडीए ने निशुल्क रूप से एसटीपीआई को तीस साल की लीज पर दी है। इस जमीन पर एसटीपीआई सेंटर बनना है ताकि मेरठ को आईटी हब बनाया जा सके। उप्र सरकार ने जमीन दे दी है तो इसका भवन बनाने के लिए भारत सरकार को लगभग बीस करोड़ रुपये सीधे एसटीपीआई को देने हैं।
35 स्थानीय कंपनियों को जोड़ेंगे
एसटीपीआई डायरेक्टर ने बताया कि यहां सर्वे किया गया है। 35 कंपनियां ऐसी हैं जो केवल घरेलू क्षेत्र में काम करती हैं। जोखिम और उचित परामर्श के कारण वे आयात के क्षेत्र में कदम नहीं बढ़ा रही हैं। इनके पास आइडिया है। लेकिन गाइडलाइन नहीं है। इन कंपनियों को जोड़ा जाएगा ताकि वे अपने सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट को बाहर निकाल सकें।
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एक लाख लोगों को रोजगार
यहां का निरीक्षण कर चुके एसटीपीआई के डीजी डॉ. ओंकार राय का कहना है कि काम शुरू होने के बाद 18 माह में इसे पूरा किया जाएगा। इस सेंटर से पांच साल की अवधि में प्रत्यक्ष रूप से 15-20 हजार लोगों को जबकि अप्रत्यक्ष रूप से करीब अस्सी हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। लखनऊ, कानपुर, नोएडा तथा इलाहाबाद में एसटीपीआई सेंटर हैं। जो गोरखपुर, आगरा तथा मेरठ में प्रस्तावित हैं।
एसटीपीआई सेंटर का उद्देश्य
इससे मेरठ आईटी हब बनने की दिशा में कदम बढ़ाएगा। कॉलेजों से निकलने वाले युवाओं को सीधे यहीं पर सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट पर काम करने का मंच मिलेगा। इससे सीधे छात्र तो जुड़ेेंगे ही, इस दिशा में पहले से ही काम कर रही कंपनियों को परामर्शी, कार्यान्वयन तथा प्रशिक्षण मसलन प्रोवेशनल ट्रेनिंग, टेक्नोलॉजी, असेसमेंट मुहैया कराया जाएगा, जिससे रोजगार की असीम संभावनाएं पैदा होंगी।
ये रोजगार मिलेंगे
सूचना प्रौद्योगिकी सॉफ्टवेयर के माध्यम से हाई स्पीड डाटा कम्युनिकेशन, विश्वव्यापी वेब सर्विस प्रोवाइडर, लीगल प्रोसेस आउट सोर्सिंग, डिजिटल कनेक्ट, एनीमेशन, रिमोट मेंटीनेंस, बैंक ऑफिस ऑपरेशन, लेखा एवं वित्तीय सेवाएं, इलेक्ट्रानिक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य परामर्श, डाटा प्रोसेसिंग तथा कॉल सेंटर के व्यवसायों का सृजन होगा। कंपनियों को रेडियो लिंक मिलेगा तो स्माल डाटा सेंटर बनाकर उसे गुड़गांव जैसे बड़े डाटा सेंटर से जोड़ा जाएगा ताकि सभी सूचनाओं का संकलन हो सके।
ये मिलेंगी सुविधाएं
- इंडिया स्टार्टअप की थीम पर यहां काम होगा। ऐसी कंपनियाें या युवाओं को जोड़ा जाएगा तो शुरुआत करना चाहते हैं।
- ऐसी कंपनी को सात करोड़ रुपये तक के ऋण पर ब्याज की छूट मिलेगी
- बिजली ड्यूटी एवं स्टांप शुल्क पर छूट दी जाएगी
- उप्र के जो बच्चे इससे जुड़ेंगे उन्हें प्रतिमाह रिम्बरसमेंट दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने पर दस लाख रुपये तक का रोजगार भी बनेगा।
- खासतौर पर ऐसे युवाओं को इन्क्युबेटर दिया जाएगा जो तकनीक क्षेत्र में नए शोध करना चाहते हैं
- अच्छे आइडिया पर छात्र को फंड मिलेगा
- एमएसएमई को जोड़ा जाएगा
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मेरठ। युवाओं को रोजगार देने के लिए 35 कंपनियों से संपर्क साधा जा रहा है। मेरठ में बनने जा रहे आईटी पार्क में युवाओं के लिए कैरियर की नई दिशा तय होगी। पांच सितंबर को इसका भूमि पूजन होने की तैयारी पूरी हो चुकी है। उधर, किसानों का कहना है कि पहले उन्हें जमीन का मुआवजा तो दें। हालांकि किसानों के मुआवजे की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है और जल्द ही यह शुरू होने वाला है।
यह है पूरा प्रस्ताव
वेदव्यासपुरी में आईटी पार्क के लिए 28785 वर्ग मीटर यानी साढे़ सात एकड़ जमीन आरक्षित की गई है। इसमें से 10102 वर्ग मीटर यानी ढाई एकड़ जमीन एमडीए ने निशुल्क रूप से एसटीपीआई को तीस साल की लीज पर दी है। इस जमीन पर एसटीपीआई सेंटर बनना है ताकि मेरठ को आईटी हब बनाया जा सके। उप्र सरकार ने जमीन दे दी है तो इसका भवन बनाने के लिए भारत सरकार को लगभग बीस करोड़ रुपये सीधे एसटीपीआई को देने हैं।
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35 स्थानीय कंपनियों को जोड़ेंगे
एसटीपीआई डायरेक्टर ने बताया कि यहां सर्वे किया गया है। 35 कंपनियां ऐसी हैं जो केवल घरेलू क्षेत्र में काम करती हैं। जोखिम और उचित परामर्श के कारण वे आयात के क्षेत्र में कदम नहीं बढ़ा रही हैं। इनके पास आइडिया है। लेकिन गाइडलाइन नहीं है। इन कंपनियों को जोड़ा जाएगा ताकि वे अपने सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट को बाहर निकाल सकें।
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एक लाख लोगों को रोजगार
यहां का निरीक्षण कर चुके एसटीपीआई के डीजी डॉ. ओंकार राय का कहना है कि काम शुरू होने के बाद 18 माह में इसे पूरा किया जाएगा। इस सेंटर से पांच साल की अवधि में प्रत्यक्ष रूप से 15-20 हजार लोगों को जबकि अप्रत्यक्ष रूप से करीब अस्सी हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। लखनऊ, कानपुर, नोएडा तथा इलाहाबाद में एसटीपीआई सेंटर हैं। जो गोरखपुर, आगरा तथा मेरठ में प्रस्तावित हैं।
एसटीपीआई सेंटर का उद्देश्य
इससे मेरठ आईटी हब बनने की दिशा में कदम बढ़ाएगा। कॉलेजों से निकलने वाले युवाओं को सीधे यहीं पर सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट पर काम करने का मंच मिलेगा। इससे सीधे छात्र तो जुड़ेेंगे ही, इस दिशा में पहले से ही काम कर रही कंपनियों को परामर्शी, कार्यान्वयन तथा प्रशिक्षण मसलन प्रोवेशनल ट्रेनिंग, टेक्नोलॉजी, असेसमेंट मुहैया कराया जाएगा, जिससे रोजगार की असीम संभावनाएं पैदा होंगी।
ये रोजगार मिलेंगे
सूचना प्रौद्योगिकी सॉफ्टवेयर के माध्यम से हाई स्पीड डाटा कम्युनिकेशन, विश्वव्यापी वेब सर्विस प्रोवाइडर, लीगल प्रोसेस आउट सोर्सिंग, डिजिटल कनेक्ट, एनीमेशन, रिमोट मेंटीनेंस, बैंक ऑफिस ऑपरेशन, लेखा एवं वित्तीय सेवाएं, इलेक्ट्रानिक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य परामर्श, डाटा प्रोसेसिंग तथा कॉल सेंटर के व्यवसायों का सृजन होगा। कंपनियों को रेडियो लिंक मिलेगा तो स्माल डाटा सेंटर बनाकर उसे गुड़गांव जैसे बड़े डाटा सेंटर से जोड़ा जाएगा ताकि सभी सूचनाओं का संकलन हो सके।
ये मिलेंगी सुविधाएं
- इंडिया स्टार्टअप की थीम पर यहां काम होगा। ऐसी कंपनियाें या युवाओं को जोड़ा जाएगा तो शुरुआत करना चाहते हैं।
- ऐसी कंपनी को सात करोड़ रुपये तक के ऋण पर ब्याज की छूट मिलेगी
- बिजली ड्यूटी एवं स्टांप शुल्क पर छूट दी जाएगी
- उप्र के जो बच्चे इससे जुड़ेंगे उन्हें प्रतिमाह रिम्बरसमेंट दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने पर दस लाख रुपये तक का रोजगार भी बनेगा।
- खासतौर पर ऐसे युवाओं को इन्क्युबेटर दिया जाएगा जो तकनीक क्षेत्र में नए शोध करना चाहते हैं
- अच्छे आइडिया पर छात्र को फंड मिलेगा
- एमएसएमई को जोड़ा जाएगा