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नगर निगम भी कसेगा डेरी संचालकों पर शिकंजा
Updated Sat, 16 Dec 2017 02:37 AM IST
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नगर निगम भी कसेगा डेरी संचालकों पर शिकंजा
मेरठ। डेरियों के नरक से महानगर को मुक्ति दिलाने के लिए नगर निगम भी मजबूत शिकंजा कसने जा रहा है। डेरियों को बंद न करने वाले संचालकों पर रोजाना 20 हजार का जुर्माना लगाने की व्यवस्था और सख्त की जाएगी। साथ ही जुर्माना राशि तहसील प्रशासन वसूल करेगा।
महानगर में 800 से अधिक डेरियां
नगर निगम सीमा में 800 से अधिक डेरियां हैं। जिनमें 20 से 50 या उससे ज्यादा पशु हैं। डेरियों से निकलने वाला पशुओं का गोबर या तो नालों में बहाया जाता है या फिर खाली प्लॉट और सड़कों में फेंका जाता है। जिसके कारण शहर की हालत बदतर हो गयी है। महानगर मेें गोबर की बदबू और बीमारियों का प्रकोप है। जिसके कारण आए दिन बीमारी फैली रहती है। पशुओं के गोबर से प्रदूषण भी बढ़ रहा है।
एनजीटी के हैं आदेश
एनजीटी के आदेशानुसार शहर से सभी डेरियां बाहर की जानी हैं। नगर निगम पिछले दो साल से डेरियों को शहर से बाहर करने पर काम कर रहा है। लेकिन निगम प्रशासन को अपने स्तर पर कोई सफलता नहीं मिली है। एक माह पहले कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार के हस्तक्षेप के बाद ही जागृति विहार क्षेत्र से डेरियों को हटाया गया। उस स्थान यानी ग्रीन बेल्ट पर पौधे लगाए गए। जहां प्रदूषण मुक्त करने का प्रयास हुआ वहीं डेरियों को शहर से बाहर करने की पहल की गयी।
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20 हजार रुपये लगेगा जुर्माना
नगर निगम प्रशासन का कहना है कि पूर्व में जुर्माने के नोटिस जारी हुए थे। लेकिन इस बार जारी होने वाले अलग होंगे। इनका रिकॉर्ड नगर निगम में दर्ज होगा। कोई कर्मचारी नोटिस का दुरुपयोग भी नहीं कर पाएगा। यही नहीं निगम कर्मचारी से साठगांठ करके डेरी संचालक जुर्माने से भी नहीं बच पाएंगे। जुर्माना नोटिस प्राप्ति से अगले दिन से ही लागू हो जाएगा। जिसकी रिकवरी तहसील के माध्यम से करायी जाएगी।
बाहर होंगी डेरियां
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कुंवरसेन के अनुसार नोटिस बुक सभी सफाई इंस्पेक्टरों को बांटी जा चुकी हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण में अच्छे अंक पाने के लिए डेरियों को शहर से बाहर किया जाना जरूरी है। डेरी संचालकों से प्रतिदिन 20 हजार रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा।
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मेरठ। डेरियों के नरक से महानगर को मुक्ति दिलाने के लिए नगर निगम भी मजबूत शिकंजा कसने जा रहा है। डेरियों को बंद न करने वाले संचालकों पर रोजाना 20 हजार का जुर्माना लगाने की व्यवस्था और सख्त की जाएगी। साथ ही जुर्माना राशि तहसील प्रशासन वसूल करेगा।
महानगर में 800 से अधिक डेरियां
नगर निगम सीमा में 800 से अधिक डेरियां हैं। जिनमें 20 से 50 या उससे ज्यादा पशु हैं। डेरियों से निकलने वाला पशुओं का गोबर या तो नालों में बहाया जाता है या फिर खाली प्लॉट और सड़कों में फेंका जाता है। जिसके कारण शहर की हालत बदतर हो गयी है। महानगर मेें गोबर की बदबू और बीमारियों का प्रकोप है। जिसके कारण आए दिन बीमारी फैली रहती है। पशुओं के गोबर से प्रदूषण भी बढ़ रहा है।
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एनजीटी के हैं आदेश
एनजीटी के आदेशानुसार शहर से सभी डेरियां बाहर की जानी हैं। नगर निगम पिछले दो साल से डेरियों को शहर से बाहर करने पर काम कर रहा है। लेकिन निगम प्रशासन को अपने स्तर पर कोई सफलता नहीं मिली है। एक माह पहले कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार के हस्तक्षेप के बाद ही जागृति विहार क्षेत्र से डेरियों को हटाया गया। उस स्थान यानी ग्रीन बेल्ट पर पौधे लगाए गए। जहां प्रदूषण मुक्त करने का प्रयास हुआ वहीं डेरियों को शहर से बाहर करने की पहल की गयी।
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20 हजार रुपये लगेगा जुर्माना
नगर निगम प्रशासन का कहना है कि पूर्व में जुर्माने के नोटिस जारी हुए थे। लेकिन इस बार जारी होने वाले अलग होंगे। इनका रिकॉर्ड नगर निगम में दर्ज होगा। कोई कर्मचारी नोटिस का दुरुपयोग भी नहीं कर पाएगा। यही नहीं निगम कर्मचारी से साठगांठ करके डेरी संचालक जुर्माने से भी नहीं बच पाएंगे। जुर्माना नोटिस प्राप्ति से अगले दिन से ही लागू हो जाएगा। जिसकी रिकवरी तहसील के माध्यम से करायी जाएगी।
बाहर होंगी डेरियां
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कुंवरसेन के अनुसार नोटिस बुक सभी सफाई इंस्पेक्टरों को बांटी जा चुकी हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण में अच्छे अंक पाने के लिए डेरियों को शहर से बाहर किया जाना जरूरी है। डेरी संचालकों से प्रतिदिन 20 हजार रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा।