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प्राइमरी स्कूल की 30 बीघा जमीन पर कब्जा, 59 साल बाद भी शिक्षा विभाग अंजान
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शरद गुप्ता
मवाना। सरकारी जमीन कब्जा मुक्त कराने के लिए भले ही एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स का गठन किया गया हो। हालांकि सरकारी जमीन आज भी भूमाफिया के कब्जे में है। सरधना तहसील एवं फलावदा थाना क्षेत्र अंतर्गत महलका गांव में प्राइमरी स्कूल की बेशकीमती जमीन शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी आज तक कब्जा मुक्त नहीं करा पाए हैं। आलम यह है कि आज शिक्षा विभाग को यह भी नहीं मालूम की महलका गांव में कभी उसकी तीस बीघा कृषि भूमि हुआ करती थी।
1960 तक अभिलेखों में दर्ज
महलका गांव में प्राइमरी स्कूल की स्थापना के बाद उसके खर्चे को लेकर तीस बीघा जमीन भी स्कूल के नाम की गई थी। यह कृषि भूमि सन 1960 तक खसरा संख्या 83, 84 व 109 के रूप में अभिलेखों में प्राइमरी स्कूल के नाम दर्ज थी। उस दौरान हेडमास्टर के नाम से सकौती स्थित दीवान शुगर एंड जनरल मिल्स प्राइवेट लिमिटेड (अब आईपीएल शुगर मिल के नाम से जानी जाती है) में गन्ना डाला जाता था। इस जमीन से होने वाली आमदनी से स्कूल के हेडमास्टर स्कूल में उपयोग होने वाले सामान अधिकारियों की अनुमति से खरीदते थे। इसके अतिरिक्त इसी रुपये से कृषि में उपयोग होने वाले खर्च वहन भी किए जाते थे। वर्ष 1960 में 22 जुलाई को हेडमास्टर ने रजवाहे द्वारा फसलों की सिंचाई के लिए का 12 रुपये 41 पैसे का भुगतान किया था। 28 अप्रैल 1959 में हेडमास्टर ने सकौती स्थित समिति में दस रुपये का भुगतान कर सदस्यता ली थी। यही नहीं कृषि भूमि पर उगे गेहूं को वर्ष 1960 में तत्कालीन हेडमास्टर ने 40 रुपये कुंतल के हिसाब से भूलेराम नामक व्यक्ति को 184 रुपये गेहूं बेचे थे। अमर उजाला को मिली इन रसीदों से यह मामला प्रकाश में आया है।
आखिर कहां गई 30 बीघा कृषि भूमि
महलका स्थित प्राइमरी स्कूल की वर्ष 1960 तक अभिलेखों में दर्ज कृषि भूमि आखिर कहां गई। 59 साल बीत जाने के बाद भी शिक्षा विभाग इससे अनजान है। प्राइमरी स्कूल महलका की 30 बीघा जमीन पर आखिर किसका कब्जा है। इसको लेकर अधिकारियों ने अब तक जांच करने की जहमत तक नहीं उठाई। जिस कारण स्कूल की बेशकीमती कृषि भूमि आज तक भूमाफिया के कब्जे में है।
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एड़ी से चोटी के लगाने पड़े थे जोर
प्राइमरी स्कूल की कृषि भूमि के साथ-साथ गांव के ही एक व्यक्ति ने स्कूल की इमारत पर भी कब्जा कर रखा था। जिस कारण शिक्षा विभाग को स्कूल की एक ही इमारत में दो-दो स्कूल चलाने पड़ते थे। करीब 15 साल तक इमारत पर कब्जा रहने के बाद विभाग ने किसी तरह बिल्डिंग को सन 2010 में कब्जा मुक्त कराया था। जहां आज स्कूल संचालित हो रहा है। हालांकि कृषि भूमि को कब्जा मुक्त कराने के मामले में विभाग बैकफुट पर आने के साथ-साथ अनजान बना हुआ है।
जांच कराई जाएगी
प्राइमरी स्कूल की महलका में कृषि भूमि है। इस बाबत उन्हें जानकारी नहीं है। मामला काफी पुराना है। यदि ऐसा है तो जल्द जांच कराई जायेगी।-सतेंद्र ढाका, बीएसए मेरठ
चुनाव बाद कराएंगे जांच
प्राइमरी स्कूल की यदि भूमि थी और इतने वर्ष बाद भी कब्जा मुक्त नहीं हो सकी तो बहुत ही गंभीर मामला है। चुनाव के बाद इसकी जांच कराई जाएगी। उस दौरान के कागज निकलवाकर जमीन को कब्जा मुक्त कराया जाएगा।- अमित कुमार, एसडीएम सरधना
मुख्य बातें
महलका स्थित प्राइमरी स्कूल की वर्ष 1960 तक अभिलेखों में दर्ज थी कृषि भूमि
शिक्षा विभाग के अधिकारी बैकफुट पर आने के साथ अनजान बने हुए
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मवाना। सरकारी जमीन कब्जा मुक्त कराने के लिए भले ही एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स का गठन किया गया हो। हालांकि सरकारी जमीन आज भी भूमाफिया के कब्जे में है। सरधना तहसील एवं फलावदा थाना क्षेत्र अंतर्गत महलका गांव में प्राइमरी स्कूल की बेशकीमती जमीन शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी आज तक कब्जा मुक्त नहीं करा पाए हैं। आलम यह है कि आज शिक्षा विभाग को यह भी नहीं मालूम की महलका गांव में कभी उसकी तीस बीघा कृषि भूमि हुआ करती थी।
1960 तक अभिलेखों में दर्ज
महलका गांव में प्राइमरी स्कूल की स्थापना के बाद उसके खर्चे को लेकर तीस बीघा जमीन भी स्कूल के नाम की गई थी। यह कृषि भूमि सन 1960 तक खसरा संख्या 83, 84 व 109 के रूप में अभिलेखों में प्राइमरी स्कूल के नाम दर्ज थी। उस दौरान हेडमास्टर के नाम से सकौती स्थित दीवान शुगर एंड जनरल मिल्स प्राइवेट लिमिटेड (अब आईपीएल शुगर मिल के नाम से जानी जाती है) में गन्ना डाला जाता था। इस जमीन से होने वाली आमदनी से स्कूल के हेडमास्टर स्कूल में उपयोग होने वाले सामान अधिकारियों की अनुमति से खरीदते थे। इसके अतिरिक्त इसी रुपये से कृषि में उपयोग होने वाले खर्च वहन भी किए जाते थे। वर्ष 1960 में 22 जुलाई को हेडमास्टर ने रजवाहे द्वारा फसलों की सिंचाई के लिए का 12 रुपये 41 पैसे का भुगतान किया था। 28 अप्रैल 1959 में हेडमास्टर ने सकौती स्थित समिति में दस रुपये का भुगतान कर सदस्यता ली थी। यही नहीं कृषि भूमि पर उगे गेहूं को वर्ष 1960 में तत्कालीन हेडमास्टर ने 40 रुपये कुंतल के हिसाब से भूलेराम नामक व्यक्ति को 184 रुपये गेहूं बेचे थे। अमर उजाला को मिली इन रसीदों से यह मामला प्रकाश में आया है।
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आखिर कहां गई 30 बीघा कृषि भूमि
महलका स्थित प्राइमरी स्कूल की वर्ष 1960 तक अभिलेखों में दर्ज कृषि भूमि आखिर कहां गई। 59 साल बीत जाने के बाद भी शिक्षा विभाग इससे अनजान है। प्राइमरी स्कूल महलका की 30 बीघा जमीन पर आखिर किसका कब्जा है। इसको लेकर अधिकारियों ने अब तक जांच करने की जहमत तक नहीं उठाई। जिस कारण स्कूल की बेशकीमती कृषि भूमि आज तक भूमाफिया के कब्जे में है।
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एड़ी से चोटी के लगाने पड़े थे जोर
प्राइमरी स्कूल की कृषि भूमि के साथ-साथ गांव के ही एक व्यक्ति ने स्कूल की इमारत पर भी कब्जा कर रखा था। जिस कारण शिक्षा विभाग को स्कूल की एक ही इमारत में दो-दो स्कूल चलाने पड़ते थे। करीब 15 साल तक इमारत पर कब्जा रहने के बाद विभाग ने किसी तरह बिल्डिंग को सन 2010 में कब्जा मुक्त कराया था। जहां आज स्कूल संचालित हो रहा है। हालांकि कृषि भूमि को कब्जा मुक्त कराने के मामले में विभाग बैकफुट पर आने के साथ-साथ अनजान बना हुआ है।
जांच कराई जाएगी
प्राइमरी स्कूल की महलका में कृषि भूमि है। इस बाबत उन्हें जानकारी नहीं है। मामला काफी पुराना है। यदि ऐसा है तो जल्द जांच कराई जायेगी।-सतेंद्र ढाका, बीएसए मेरठ
चुनाव बाद कराएंगे जांच
प्राइमरी स्कूल की यदि भूमि थी और इतने वर्ष बाद भी कब्जा मुक्त नहीं हो सकी तो बहुत ही गंभीर मामला है। चुनाव के बाद इसकी जांच कराई जाएगी। उस दौरान के कागज निकलवाकर जमीन को कब्जा मुक्त कराया जाएगा।- अमित कुमार, एसडीएम सरधना
मुख्य बातें
महलका स्थित प्राइमरी स्कूल की वर्ष 1960 तक अभिलेखों में दर्ज थी कृषि भूमि
शिक्षा विभाग के अधिकारी बैकफुट पर आने के साथ अनजान बने हुए