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एक संगठन का चक्का जाम वापस, दूसरे का बरकरार
Updated Wed, 04 Jul 2018 01:52 AM IST
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मेरठ। रोडवेज में चक्का जाम का खतरा अभी टला नहीं है। एक संगठन ने प्रबंधन से वार्ता के बाद भले ही चक्का जाम का फैसला वापस ले लिया हो लेकिन दूसरा संगठन 10 जुलाई के चक्का जाम के फैसले पर कायम है और इसके लिए कर्मचारियों को लामबंद किया जा रहा है। हालांकि रोडवेज प्रबंधन इस संगठन से भी वार्ता कर चक्का जाम को स्थगित कराने का प्रयास कर रहा है। नेताओं का कहना है कि अप्रैल में हुई वार्ता में दिए गए आश्वासनों पर अमल नहीं होने से कर्मचारियों में आक्रोश है।
सातवां वेतनमान लागू करने, कर्मचारियों की भर्ती करने, संविदा चालकों व परिचालकों को नियमित करने, मृतक आश्रितों को नौकरी पर रखने आदि मांगों को लेकर रोडवेज के दो बड़े संगठन रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद् उत्तर प्रदेश और यूपी रोडवेज एंप्लाइज यूनियन लामबंद है। परिषद् ने मांगे नहीं माने जाने पर आगामी पांच जुलाई को रोडवेज बसों का चक्का जाम करने का आह्वान कर रखा था, वहीं एंप्लाइज यूनियन ने 10 जुलाई को चक्का जाम की घोषणा कर रखी है। परिषद् नेताओं की सोमवार देर शाम तक प्रबंधन के साथ वार्ता हुई। वार्ता में अधिकारियों ने कहा कि प्रदेश के मुख्य सचिव नए बने हैं। उन्होंने मांगों पर विचार करने के लिए कुछ दिन का समय मांगा है।। इस पर परिषद् नेताओं ने सहमति देते हुए चक्का जाम का फैसला स्थगित कर दिया। परिषद् के क्षेत्रिय मंत्री लाखन सिंह ने भी इसकी पुष्टि करते हुए संगठन के कर्मचारी सदस्यों को इसकी जानकारी दे दी है।
प्रबंधन बना रहा दबाव
वहीं दूसरी तरफ यूपी रोडवेज एंप्लाइज यूनियन के नेताओं ने गोरखपुर में मंडलीय सम्मेलन कर पूरी तैयारी के साथ चक्का जाम करने का आह्वान किया। संगठन के मेरठ डिपो मंत्री राजेश त्यागी ने बताया कि उनके संगठन के प्रांतीय नेताओं ने बताया कि प्रबंधन वार्ता के लिए दबाव बना रहा है। क्योंकि एक संगठन को प्रबंधन ने वार्ता के बाद मना लिया है। लेकिन वे मानने वाले नहीं है। अप्रैल माह में भी वार्ता के बाद प्रबंधन ने मांगों को पूरा करने का आश्वासन देकर चक्का जाम स्थगित कराया था। लेकिन तीन महीने बाद भी मांगों को पूरा नहीं किया गया। 10 जुलाई को चक्का जाम का निर्णय बरकरार है।
सातवां वेतनमान लागू करने, कर्मचारियों की भर्ती करने, संविदा चालकों व परिचालकों को नियमित करने, मृतक आश्रितों को नौकरी पर रखने आदि मांगों को लेकर रोडवेज के दो बड़े संगठन रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद् उत्तर प्रदेश और यूपी रोडवेज एंप्लाइज यूनियन लामबंद है। परिषद् ने मांगे नहीं माने जाने पर आगामी पांच जुलाई को रोडवेज बसों का चक्का जाम करने का आह्वान कर रखा था, वहीं एंप्लाइज यूनियन ने 10 जुलाई को चक्का जाम की घोषणा कर रखी है। परिषद् नेताओं की सोमवार देर शाम तक प्रबंधन के साथ वार्ता हुई। वार्ता में अधिकारियों ने कहा कि प्रदेश के मुख्य सचिव नए बने हैं। उन्होंने मांगों पर विचार करने के लिए कुछ दिन का समय मांगा है।। इस पर परिषद् नेताओं ने सहमति देते हुए चक्का जाम का फैसला स्थगित कर दिया। परिषद् के क्षेत्रिय मंत्री लाखन सिंह ने भी इसकी पुष्टि करते हुए संगठन के कर्मचारी सदस्यों को इसकी जानकारी दे दी है।
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प्रबंधन बना रहा दबाव
वहीं दूसरी तरफ यूपी रोडवेज एंप्लाइज यूनियन के नेताओं ने गोरखपुर में मंडलीय सम्मेलन कर पूरी तैयारी के साथ चक्का जाम करने का आह्वान किया। संगठन के मेरठ डिपो मंत्री राजेश त्यागी ने बताया कि उनके संगठन के प्रांतीय नेताओं ने बताया कि प्रबंधन वार्ता के लिए दबाव बना रहा है। क्योंकि एक संगठन को प्रबंधन ने वार्ता के बाद मना लिया है। लेकिन वे मानने वाले नहीं है। अप्रैल माह में भी वार्ता के बाद प्रबंधन ने मांगों को पूरा करने का आश्वासन देकर चक्का जाम स्थगित कराया था। लेकिन तीन महीने बाद भी मांगों को पूरा नहीं किया गया। 10 जुलाई को चक्का जाम का निर्णय बरकरार है।
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