फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   आईटीसी के जरिए करोड़ों का खेल

आईटीसी के जरिए करोड़ों का खेल

Mon, 01 Apr 2019 02:50 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 01 Apr 2019 02:50 AM IST
विज्ञापन
आईटीसी के जरिए करोड़ों का खेल
100 से ज्यादा फर्म डीजीजीएसटीआई रडार पर
विज्ञापन

- फर्जी तरीके से फर्म बनाकर किया जा रहा फर्जीवाड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के तहत इनपुट क्रेडिट टैक्स (आईटीसी) के जरिए फर्जी तरीके से क्लेम कर सरकार को चूना लगाया जा रहा है। अब तक केंद्रीय एवं राज्य की जांच एजेंसियां करोड़ों की टैक्स चोरी के मामले पकड़ चुकी हैं। सूत्रों का कहना है कि मेरठ में 100 से ज्यादा ऐसी फर्म डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस (डीजीजीएसटीआई) के रडार पर हैं।
डीजीजीएसटीआई ने मेरठ ही नहीं, आसपास के जिलों में भी आईटीसी के तहत की गई टैक्स चोरी पकड़ी है। इसके अलावा वाणिज्य कर विभाग ने टैक्स चोरी पकड़ी है। दरअसल, जीएसटी लागू होने के बाद फर्जी तरीके से बनाई गई फर्मों के जरिये गोरखधंधा चल रहा है। ऐसी फर्मों को चिह्नित किया जा रहा है, जिन्होंने पांच करोड़ रुपये से ज्यादा का आईटीसी क्लेम लिया है। इसके अलावा वह फर्म भी रडार पर हैं जो जीएसटी लागू होने के बाद बनाई गई हैं। दरअसल, इसके पीछे सबसे खास वजह यह है कि पांच करोड़ से ज्यादा की टैक्स चोरी पकड़े जाने पर संबंधित व्यक्ति को गिरफ्तार किया जा सकता है।
विज्ञापन

विभागीय अधिकारियों का मानना है कि टैक्स चोरी को रोकने के लिए जालसाजों को जेल भेजा जाना जरूरी है। तभी इस पर टैक्स चोरी पर अंकुश लगाया जा सकेगा। डीजीजीएसटीआई के सूत्रों ने बताया कि जिन फर्मों को रडार पर लिया गया है, उनमें से कई बैंक खाते आईटीसी क्लेम लेने के बाद बंद हो गए हैं। मोबाइल नंबर भी या तो बंद कर दिए गए हैं या फिर बदल दिए गए हैं। डीजीजीएसटीआई, वाणिज्य कर विभाग और जीएसटी काउंसिल का मुख्य फोकस अब इस तरह के टैक्स चोरी के मामलों पर होगा, जिनमें बिलबुक के जरिए फर्जीवाड़ा, टर्नओवर छिपाकर, रिफंड के जरिये, फर्जी बिल बनाकर और तथ्यों को छिपाकर फर्जीवाड़ा किया गया होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

ऐसे कर रहे फर्जीवाड़ा
जालसाज बड़े पैमाने पर फर्जी टैक्स इनवॉइस तैयार करते हैं। इसके बाद इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम करते हैं। फर्जी कंपनियां को सिर्फ कागजों में बनाते हैं। कंपनियों का कहीं कोई ऑफिस नहीं होता है। इन कंपनियों को जीएसटी के तहत पंजीकृत भी करा दिया जाता है। कामकाज के फर्जी बिल बनाए जाते हैं। बिना किसी लेन-देन के इन कंपनियों के नामों पर व्यापार दिखा कर टैक्स इनवॉइस तैयार कर लेते हैं। सरकार इन्हें रिफंड भी देती है।

चिह्नित कर हो रही कार्रवाई
आईटीसी क्लेम के जरिये फर्जीवाड़ा करने वाले रडार पर हैं। टीमें ऐसी फर्मों को चिह्नित कर कार्रवाई कर रही हैं। -अभिषेक अग्रवाल, डिप्टी डायरेक्टर डीजीजीएसटीआई


विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed