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95 फीसदी महिलाओं के मसले करते हैं हल
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फोटो
‘95 फीसदी महिलाओं के मसले करते हैं हल’
- मुफ्ती बोले, अदालतों का सहयोग कर रही दारुल कजा
- दारुल कजा संविधान और शरीअत के मुताबिक चल रही
- हापुड़ रोड पर फेमस प्लाजा में हुई मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। दारुल कजा संविधान और शरीअत के मुताबिक चल रही है। इसमें लोगों को बहुत फायदा हो रहा है। दारुल कजा में 95 प्रतिशत महिलाएं संपर्क करती हैं, जिनके मामलों का कम वक्त में निबटारा कर दिया जाता है। यह कहना है फुलत केकाजी डॉ. मुफ्ती आशिक सिद्दीकी का।
रविवार को हापुड़ रोड पर फेमस प्लाजा में एक बैठक रखी गई। इसमें शरियत दारुल कजा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने दारुल कजा की रिपोर्ट पेश की। मुफ्ती आशिक सिद्दीकी ने कहा कि दारुल कजा मुसलमानों के खानदानी मसाइल का हल करने वाला बेहतरीन इदारा है। अदालतों का बहुत सहयोगी है। अभी भी अदालतों में तकरीबन साढ़े तीन करोड़ मुकदमे विचाराधीन हैं। शरियत बेदारी मुहिम के तहत इसमें वकील, डॉक्टर और इमाम आदि शामिल हुए।
इसकी अध्यक्षता मौलाना कारी शफीकुर्रहमान कासमी ने की। संचालन मुफ्ती हस्सान कासमी ने किया। मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट के वकील एमआर शमशाद रहे। वह दारुल कजा कमेटी ऑल इंडिया केमुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के ऑर्गेनाइजर भी हैं। ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल उप्र अध्यक्ष मौलाना गुलजार कासमी, रऊफुल हसन अंसारी एडवोकेट, जब्बार खान एडवोकेट, कुंवर छोटे खां, चौधरी सरताज, अयाज, मुल्ला फुरकान पार्षद और अकील अजराड़ा आदि ने शिरकत की। कारी शफीकुर्रहमान ने दुआ कराकर कार्यक्रम खत्म कराया।
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कोशिश रहती है तलाक न हो
काजी ए शरीअत दारुल कजा मुफ्ती हस्सान कासमी ने बताया कि जो शादीशुदा महिलाएं अपने मसले लेकर दारुल कजा के पास आती हैं, कोशिश रहती है कि उनकी सुलह हो जाए। उनका तलाक न हो। वह जागरूकता फैलाते हैं। फिर भी अगर किसी में बात नहीं बनती तो महिला को ‘खुला’ करा दिया जाता है। जिस तरह पुरुषों के लिए तलाक है, उसी तरह अगर महिला पति से अलग होना चाहती है तो शरीअतन वह खुला ले सकती है। ऐसी महिलाओं की काउंसलिंग कराई जाती है। इनमें अधिकांश में सुलह हो जाती है और मामला तलाक तक नहीं पहुंचता है। चंद महिलाएं ही होती हैं जो खुला लेती हैं।
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‘95 फीसदी महिलाओं के मसले करते हैं हल’
- मुफ्ती बोले, अदालतों का सहयोग कर रही दारुल कजा
- दारुल कजा संविधान और शरीअत के मुताबिक चल रही
- हापुड़ रोड पर फेमस प्लाजा में हुई मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। दारुल कजा संविधान और शरीअत के मुताबिक चल रही है। इसमें लोगों को बहुत फायदा हो रहा है। दारुल कजा में 95 प्रतिशत महिलाएं संपर्क करती हैं, जिनके मामलों का कम वक्त में निबटारा कर दिया जाता है। यह कहना है फुलत केकाजी डॉ. मुफ्ती आशिक सिद्दीकी का।
रविवार को हापुड़ रोड पर फेमस प्लाजा में एक बैठक रखी गई। इसमें शरियत दारुल कजा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने दारुल कजा की रिपोर्ट पेश की। मुफ्ती आशिक सिद्दीकी ने कहा कि दारुल कजा मुसलमानों के खानदानी मसाइल का हल करने वाला बेहतरीन इदारा है। अदालतों का बहुत सहयोगी है। अभी भी अदालतों में तकरीबन साढ़े तीन करोड़ मुकदमे विचाराधीन हैं। शरियत बेदारी मुहिम के तहत इसमें वकील, डॉक्टर और इमाम आदि शामिल हुए।
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इसकी अध्यक्षता मौलाना कारी शफीकुर्रहमान कासमी ने की। संचालन मुफ्ती हस्सान कासमी ने किया। मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट के वकील एमआर शमशाद रहे। वह दारुल कजा कमेटी ऑल इंडिया केमुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के ऑर्गेनाइजर भी हैं। ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल उप्र अध्यक्ष मौलाना गुलजार कासमी, रऊफुल हसन अंसारी एडवोकेट, जब्बार खान एडवोकेट, कुंवर छोटे खां, चौधरी सरताज, अयाज, मुल्ला फुरकान पार्षद और अकील अजराड़ा आदि ने शिरकत की। कारी शफीकुर्रहमान ने दुआ कराकर कार्यक्रम खत्म कराया।
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कोशिश रहती है तलाक न हो
काजी ए शरीअत दारुल कजा मुफ्ती हस्सान कासमी ने बताया कि जो शादीशुदा महिलाएं अपने मसले लेकर दारुल कजा के पास आती हैं, कोशिश रहती है कि उनकी सुलह हो जाए। उनका तलाक न हो। वह जागरूकता फैलाते हैं। फिर भी अगर किसी में बात नहीं बनती तो महिला को ‘खुला’ करा दिया जाता है। जिस तरह पुरुषों के लिए तलाक है, उसी तरह अगर महिला पति से अलग होना चाहती है तो शरीअतन वह खुला ले सकती है। ऐसी महिलाओं की काउंसलिंग कराई जाती है। इनमें अधिकांश में सुलह हो जाती है और मामला तलाक तक नहीं पहुंचता है। चंद महिलाएं ही होती हैं जो खुला लेती हैं।