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सड़क
Updated Sat, 26 Aug 2017 02:43 AM IST
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गांव ततीना के लोगों को बाईपास तक आने के लिए काटना पड़ता है चक्कर
ग्रामीणों के सहयोग से हो रहा सड़क निर्माण, रेलवे ट्रैक को पार करने की मजबूरी
मेरठ। करीब तीन हजार की आबादी वाला गांव ततीना मेरठ हापुड़ रेलमार्ग पर पड़ता है। गांव से मेरठ शहर या हापुड़ रोड पर जाने के लिए बिजली बंबा बाईपास से होकर जाना पड़ता है, लेकिन बाईपास तक पहुंचने के लिए कोई सीधा संपर्क मार्ग नहीं है। लोगों को गगोल गांव से घूमकर जाना पड़ता है। ये दूरी करीब चार किमी बैठती है। मजबूरन लोग गांव का रेलवे ट्रैक पार करके निकलते हैं। उनकी ये मजबूरी जानलेवा साबित हो रही है। गांव में रेलवे ट्रैक पर हर साल बडे़ हादसे होते हैं। ग्रामीणों के अनुसार यहां दर्जनों मौतें हो चुकी हैं।
खूब चक्कर काटे, नहीं हुई सुनवाई
गांव के गुलफाम, मो. शाकिर आदि ने बताया कि उन्होंने रेलवे अफसरों से फाटक बनवाने की मांग की। प्रशासन के पास भी गुहार लगाई। विकास विभाग के अधिकारियों से भी बाईपास तक सड़क बनवाने के लिए चक्कर काटे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
गांव वालों ने लिया अनूठा फैसला
पिछले साल हुए पंचायत चुनाव के दौरान गांव ने फैसला किया कि जो व्यक्ति गांव को बाईपास से जोड़ने की सड़क बनवाएगा, उसे ही वे निर्विरोध प्रधान चुनेंगे। गांव के समीसुद्दीन उर्फ पप्पू ने गांव वालों का प्रस्ताव स्वीकारा। उसने चुनाव से पहले ही निर्माण के लिए कुछ रकम गांव द्वारा बनाई गई चार लोगों की कमेटी के पास जमा कराई। इसके बाद पूरे गांव ने उसकी पत्नी अफसाना को निर्विरोध प्रधान चुन लिया। अफसाना ने बताया कि चुनाव जीतते ही उन्होंने किए गए वादे के अनुसार अपने रुपयों से सड़क बनवाने का काम शुरू किया। सड़क के खेतों की जमीन खरीदी। उसमें भराव कराया। इसके बाद हल्के वाहन यहां से निकलने शुरू हो गए। अब उसका निर्माण चल रहा है। कुछ ही दिनों में ये भी पूरा हो जाएगा।
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ग्रामीणों के सहयोग से हो रहा सड़क निर्माण, रेलवे ट्रैक को पार करने की मजबूरी
मेरठ। करीब तीन हजार की आबादी वाला गांव ततीना मेरठ हापुड़ रेलमार्ग पर पड़ता है। गांव से मेरठ शहर या हापुड़ रोड पर जाने के लिए बिजली बंबा बाईपास से होकर जाना पड़ता है, लेकिन बाईपास तक पहुंचने के लिए कोई सीधा संपर्क मार्ग नहीं है। लोगों को गगोल गांव से घूमकर जाना पड़ता है। ये दूरी करीब चार किमी बैठती है। मजबूरन लोग गांव का रेलवे ट्रैक पार करके निकलते हैं। उनकी ये मजबूरी जानलेवा साबित हो रही है। गांव में रेलवे ट्रैक पर हर साल बडे़ हादसे होते हैं। ग्रामीणों के अनुसार यहां दर्जनों मौतें हो चुकी हैं।
खूब चक्कर काटे, नहीं हुई सुनवाई
गांव के गुलफाम, मो. शाकिर आदि ने बताया कि उन्होंने रेलवे अफसरों से फाटक बनवाने की मांग की। प्रशासन के पास भी गुहार लगाई। विकास विभाग के अधिकारियों से भी बाईपास तक सड़क बनवाने के लिए चक्कर काटे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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गांव वालों ने लिया अनूठा फैसला
पिछले साल हुए पंचायत चुनाव के दौरान गांव ने फैसला किया कि जो व्यक्ति गांव को बाईपास से जोड़ने की सड़क बनवाएगा, उसे ही वे निर्विरोध प्रधान चुनेंगे। गांव के समीसुद्दीन उर्फ पप्पू ने गांव वालों का प्रस्ताव स्वीकारा। उसने चुनाव से पहले ही निर्माण के लिए कुछ रकम गांव द्वारा बनाई गई चार लोगों की कमेटी के पास जमा कराई। इसके बाद पूरे गांव ने उसकी पत्नी अफसाना को निर्विरोध प्रधान चुन लिया। अफसाना ने बताया कि चुनाव जीतते ही उन्होंने किए गए वादे के अनुसार अपने रुपयों से सड़क बनवाने का काम शुरू किया। सड़क के खेतों की जमीन खरीदी। उसमें भराव कराया। इसके बाद हल्के वाहन यहां से निकलने शुरू हो गए। अब उसका निर्माण चल रहा है। कुछ ही दिनों में ये भी पूरा हो जाएगा।
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