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रिटायर कर्मचारियों की नियुक्ति में फंसे अपर निदेशक
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रिटायर कर्मचारियों की नियुक्ति में फंसे अपर निदेशक
मेरठ। सीसीएसयू में पूर्व कुलपति द्वारा रिटायर कर्मचारियों की नियुक्ति के निर्णय पर पूर्व वित्त नियंत्रक फंस गए हैं। राज्यपाल के निर्देश पर वित्त विभाग उप्र द्वारा की गई जांच में विवि के पूर्व वित्त नियंत्रक एवं वर्तमान में कोषागार एवं पेंशन के अपर निदेशक अतुल कुमार सिंह पर प्रथम दृष्टयता दोषी पाए गए हैं। उनको 15 दिन में अपना स्पष्टीकरण सौंपने को कहा गया है।
चौधरी चरण सिंह विवि में कार्यरत अरविंद कुमार 31 दिसंबर 2009 को वरिष्ठ सहायक सामान्य भंडार विभाग के पद से, शिव कुमार गुप्ता 31 जनवरी 2010 को कार्यालय अधीक्षक कुलपति कार्यालय के पद से और हरिवंश लाल 02 फरवरी 2010 को सहायक कार्यालय अधीक्षक सामान्य विभाग के पद से रिटायर्ड हुए थे। तत्कालीन कुलपति प्रो. एसके काक ने अरविंद कुमार को छह बार, शिव कुमार गुप्ता को तीन बार और हरिवंश लाल को चार बार तीन-तीन माह के लिए मानदेय पर रखा। इन नियुक्तियों के संबंध में कार्य परिषद से 24 मार्च 2011 को नौ हजार रुपये प्रति माह तथा 28 मार्च 2011 को वित्त समिति से अनुमोदन प्राप्त किया गया।
कार्य परिषद की कार्रवाई में नहीं शामिल किए निर्णय
अरविंद कुमार की नियुक्ति के बाद वर्ष 2010 में सात बार कार्यपरिषद की बैठक हुई, लेकिन रिटायर्ड कर्मचारियों को मानदेय पर रखने संबंधी एवं मानदेय निर्धारण संबंधी कोई मद किसी भी बैठक की कार्रवाई में शामिल किया गया। इन कर्मचारियों को सैलरी टू रिटायर एम्प्लाइज मद से भुगतान किया जाता रहा। 24 मार्च 2011 की कार्य परिषद बैठक के अनुसार तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के रिटायर्ड कर्मचारियों को तीन माह के लिए रखे जाने का अनुमोदन किया गया। लेकिन कहीं भी यह स्पष्ट उल्लेख नहीं किया कि किन-किन कर्मचारियों को किस-किस अवधि के लिए अनुमोदन प्राप्त किया गया। मानदेय पर रखे गए उपरोक्त कर्मचारी सेवानिवृत्ति के पूर्व कर रहे काम के अनुरूप ही काम करते रहे। देरी से मानदेय निर्धारण का निर्णय लेने के कारण कर्मचारियों को अतिरिक्त भुगतान करना पड़ा।
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अनुमोदन में बरती गई अनियमितता
जांच में उप्र शासन वित्त विभाग ने माना कि ऐसे में रिटायर्ड कर्मचारियों को मानदेय पर रखते हुए मानदेय निर्धारण को समय से कार्य परिषद एवं वित्त समिति से अनुमोदित न कराए जाने में अनियमितता बरती गई। इस अनियमितता के लिए विवि के वित्त अधिकारी के रूप में प्रथम दृष्टयता अतुल कुमार सिंह दोषी हैं। उनको 15 दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया गया है। जांच अधिकारी ने कहा कि अगर वह स्पष्टीकरण देने नहीं पहुंचते हैं तो यह माना जाएगा कि उनके पास अपने बचाव में कहने के लिए कुछ नहीं है। ऐसे में एक पक्षीय जांच पूरी करने की कार्रवाई की जाएगी।
सारे आरोप वित्त नियंत्रक पर
विवि में सेवानिवृत्त कर्मचारियों की नियुक्ति तत्कालीन कुलपति प्रो. एसके काक ने की, लेकिन इसमें अतुल कुमार सिंह से ही स्पष्टीकरण मांगा गया है। सवाल यह है कि बाकी अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होती है। ऐसे में उनको राहत कैसे मिली।
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मेरठ। सीसीएसयू में पूर्व कुलपति द्वारा रिटायर कर्मचारियों की नियुक्ति के निर्णय पर पूर्व वित्त नियंत्रक फंस गए हैं। राज्यपाल के निर्देश पर वित्त विभाग उप्र द्वारा की गई जांच में विवि के पूर्व वित्त नियंत्रक एवं वर्तमान में कोषागार एवं पेंशन के अपर निदेशक अतुल कुमार सिंह पर प्रथम दृष्टयता दोषी पाए गए हैं। उनको 15 दिन में अपना स्पष्टीकरण सौंपने को कहा गया है।
चौधरी चरण सिंह विवि में कार्यरत अरविंद कुमार 31 दिसंबर 2009 को वरिष्ठ सहायक सामान्य भंडार विभाग के पद से, शिव कुमार गुप्ता 31 जनवरी 2010 को कार्यालय अधीक्षक कुलपति कार्यालय के पद से और हरिवंश लाल 02 फरवरी 2010 को सहायक कार्यालय अधीक्षक सामान्य विभाग के पद से रिटायर्ड हुए थे। तत्कालीन कुलपति प्रो. एसके काक ने अरविंद कुमार को छह बार, शिव कुमार गुप्ता को तीन बार और हरिवंश लाल को चार बार तीन-तीन माह के लिए मानदेय पर रखा। इन नियुक्तियों के संबंध में कार्य परिषद से 24 मार्च 2011 को नौ हजार रुपये प्रति माह तथा 28 मार्च 2011 को वित्त समिति से अनुमोदन प्राप्त किया गया।
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कार्य परिषद की कार्रवाई में नहीं शामिल किए निर्णय
अरविंद कुमार की नियुक्ति के बाद वर्ष 2010 में सात बार कार्यपरिषद की बैठक हुई, लेकिन रिटायर्ड कर्मचारियों को मानदेय पर रखने संबंधी एवं मानदेय निर्धारण संबंधी कोई मद किसी भी बैठक की कार्रवाई में शामिल किया गया। इन कर्मचारियों को सैलरी टू रिटायर एम्प्लाइज मद से भुगतान किया जाता रहा। 24 मार्च 2011 की कार्य परिषद बैठक के अनुसार तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के रिटायर्ड कर्मचारियों को तीन माह के लिए रखे जाने का अनुमोदन किया गया। लेकिन कहीं भी यह स्पष्ट उल्लेख नहीं किया कि किन-किन कर्मचारियों को किस-किस अवधि के लिए अनुमोदन प्राप्त किया गया। मानदेय पर रखे गए उपरोक्त कर्मचारी सेवानिवृत्ति के पूर्व कर रहे काम के अनुरूप ही काम करते रहे। देरी से मानदेय निर्धारण का निर्णय लेने के कारण कर्मचारियों को अतिरिक्त भुगतान करना पड़ा।
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अनुमोदन में बरती गई अनियमितता
जांच में उप्र शासन वित्त विभाग ने माना कि ऐसे में रिटायर्ड कर्मचारियों को मानदेय पर रखते हुए मानदेय निर्धारण को समय से कार्य परिषद एवं वित्त समिति से अनुमोदित न कराए जाने में अनियमितता बरती गई। इस अनियमितता के लिए विवि के वित्त अधिकारी के रूप में प्रथम दृष्टयता अतुल कुमार सिंह दोषी हैं। उनको 15 दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया गया है। जांच अधिकारी ने कहा कि अगर वह स्पष्टीकरण देने नहीं पहुंचते हैं तो यह माना जाएगा कि उनके पास अपने बचाव में कहने के लिए कुछ नहीं है। ऐसे में एक पक्षीय जांच पूरी करने की कार्रवाई की जाएगी।
सारे आरोप वित्त नियंत्रक पर
विवि में सेवानिवृत्त कर्मचारियों की नियुक्ति तत्कालीन कुलपति प्रो. एसके काक ने की, लेकिन इसमें अतुल कुमार सिंह से ही स्पष्टीकरण मांगा गया है। सवाल यह है कि बाकी अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होती है। ऐसे में उनको राहत कैसे मिली।