{"_id":"5d06a31c8ebc3e4d65689963","slug":"15607160488-meerut-news91","type":"story","status":"publish","title_hn":"बनारस में कैटल कालोनी तो मेरठ में क्यों नहीं: वाजपेयी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बनारस में कैटल कालोनी तो मेरठ में क्यों नहीं: वाजपेयी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहर में चल रहे डेयरी हटाओ अभियान पर उठाए वाजपेयी ने सवाल
मेरठ। शहर से डेयरियों को बाहर करने का अभियान चल रहा है। इस अभियान में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने डेयरी संचालकों के पक्ष में आते हुए नगर निगम और एमडीए पर सवाल उठाए हैं।
डॉ. वाजपेयी ने कहा कि हाईकोर्ट ने डेयरी मामले में वाराणसी और मेरठ दोनों के लिए आदेश जारी किए थे। जिसमें शहर के बाहर कैटल कालोनी स्थापित कर डेयरियों को बाहर करने का आदेश था। इस आदेश के अनुपालन में वाराणसी ने उदाहरण प्रस्तुत किया है। बनारस विकास प्राधिकरण में एक पशु पर 19 वर्ग मीटर तथा 10 पशुओं पर 100 वर्ग मीटर जमीन के मानक के अनुसार 1500 पशुओं के लिए 2 कैटल कालोनी विकसित कर दी हैं। साथ ही आवश्यकता पर चार और कैटल कालोनी विकसित करने की स्थिति में हैं। यहां पर 21 लोगों ने प्लॉट के लिए आवेदन भी कर दिए हैं।
इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बात ये है कि बनारस प्राधिकरण ने जनहित को ध्यान में रखते हुए 4500 रुपये प्रति वर्ग मीटर मय विकास शुल्क जिसमें नाली, खंड़जा, सड़क, पीने का पानी, बिजली व पार्क की सुविधाएं देते हुए दर तय की है। इसमें प्राधिकरण ने एक मुश्त भुगतान चाहा है। लेकिन यदि कोई किश्तों पर भुगतान करना चाहता है तो सामान्य ब्याज के आधार पर उसको किश्त में भी देने को प्राधिकरण तैयार है। इसलिए मेरठ के अधिकारी इसे उदाहरण मानते हुए इस दिशा में काम करें। ताकि डेयरी भी शहर से बाहर चली जाएं और डेयरी संचालक भी परेशान न हों और उनके पशु भी औने पौने दाम में बिकने और कमेलों में कटने से बच जाएं। इन डेयरियों से शहर को शुद्ध दूध की आपूर्ति भी पूर्व की भांति मिलती रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
मेरठ। शहर से डेयरियों को बाहर करने का अभियान चल रहा है। इस अभियान में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने डेयरी संचालकों के पक्ष में आते हुए नगर निगम और एमडीए पर सवाल उठाए हैं।
डॉ. वाजपेयी ने कहा कि हाईकोर्ट ने डेयरी मामले में वाराणसी और मेरठ दोनों के लिए आदेश जारी किए थे। जिसमें शहर के बाहर कैटल कालोनी स्थापित कर डेयरियों को बाहर करने का आदेश था। इस आदेश के अनुपालन में वाराणसी ने उदाहरण प्रस्तुत किया है। बनारस विकास प्राधिकरण में एक पशु पर 19 वर्ग मीटर तथा 10 पशुओं पर 100 वर्ग मीटर जमीन के मानक के अनुसार 1500 पशुओं के लिए 2 कैटल कालोनी विकसित कर दी हैं। साथ ही आवश्यकता पर चार और कैटल कालोनी विकसित करने की स्थिति में हैं। यहां पर 21 लोगों ने प्लॉट के लिए आवेदन भी कर दिए हैं।
विज्ञापन
इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बात ये है कि बनारस प्राधिकरण ने जनहित को ध्यान में रखते हुए 4500 रुपये प्रति वर्ग मीटर मय विकास शुल्क जिसमें नाली, खंड़जा, सड़क, पीने का पानी, बिजली व पार्क की सुविधाएं देते हुए दर तय की है। इसमें प्राधिकरण ने एक मुश्त भुगतान चाहा है। लेकिन यदि कोई किश्तों पर भुगतान करना चाहता है तो सामान्य ब्याज के आधार पर उसको किश्त में भी देने को प्राधिकरण तैयार है। इसलिए मेरठ के अधिकारी इसे उदाहरण मानते हुए इस दिशा में काम करें। ताकि डेयरी भी शहर से बाहर चली जाएं और डेयरी संचालक भी परेशान न हों और उनके पशु भी औने पौने दाम में बिकने और कमेलों में कटने से बच जाएं। इन डेयरियों से शहर को शुद्ध दूध की आपूर्ति भी पूर्व की भांति मिलती रहे।
विज्ञापन