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खरीफ फसल की बुआई को किसान हैं तैयार, पर खाली पड़ा बीज भंडार
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खरीफ फसल की बुआई को किसान हैं तैयार, पर खाली पड़ा बीज भंडार
खरखौदा। मानसून की दस्तक होने को है। किसान खरीफ फसलों की बुआई की तैयारी में लगे हैं पर राजकीय बीज भंडार खाली पड़ा हुआ हैं। किसान निजी दुकानों से कई गुना दामों पर बीज खरीदने को मजबूर हैं।
खरखौदा विकास खंड में 30 गांव आते हैं। करीब 14 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि है। केवल खरखौदा कस्बे में राजकीय बीज भंडार बना है पर ज्यादातर समय वहां रबी हो या खरीफ फसल किसी का भी बीज समय पर उपलब्ध नहीं हो पाता है। पिछले दिनों रबी फसलों में केवल 270 क्विंटल गेहूं और 2.5 क्विंटल सरसों को बीज उपलब्ध हो सका। जो कि कुछ ही प्रतिशत किसानों को मिल सका। राजकीय बीज भंडार पर सरसों का मूल्य करीब 80 रुपये प्रति किग्रा. के अनुसार मिलता है। जिसमें बाद में 50 प्रतिशत छूट की रकम किसान के खाते में आती है। पर राजकीय भंडारों पर बीज न होने पर क्षेत्र के किसानों को मजबूरन निजी दुकानदारों से 500 रुपये प्रति किग्रा. सरसों का बीज खरीदना पड़ा। वहीं अब खरीफ फसलों में दस कुंतल, अरहर 10 किलो, ढांचा 30 किलो व उर्द मात्र 1.30 क्विंटल बीज भी भेजा गया। जबकि धान का बीज करीब एक माह पहले ही समाप्त हो गया। जिसमें क्षेत्र के करीब 70 प्रतिशत किसानों को धान का बीज नहीं मिल सका है। वहीं ज्वार और बाजरे का भी बीज उपलब्ध नहीं हैं।
बुआई का समय निकले पर पहुंचता है बीज
कई बार राजकीय बीज भंडार पर उक्त फसल की बुआई का समय निकलने के बाद बीज आता है। लेकिन इन बीज भंडारों पर जो बीज आता है। यदि वह किसानों द्वारा नहीं खरीदा जाता है तो वह बीज वापस नहीं होता। गोदाम इंचार्ज को स्वयं भुगतान करना पड़ता है।
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कभी ज्यादा तो कभी कम बीज पहुंच रहा
गोदाम इंचार्ज की माने तो कभी कभी कम बीज पहुंचने पर सभी किसानों नहीं मिल पाता जिसके चलते विवाद भी हो जाता है। इस वर्ष मात्र 10 किग्रा अरहर और 30 किग्रा. ढांचे का बीच आया और उर्द केवल 1.5 क्विंटल ही भेजे हैं। जबकि 2017 में उर्द 16 क्विंटल बीज भेजा गया। जिसमें केवल 06 क्विंटल बीज ही बिक सका। बाकि 10 क्विंटल गोदाम में ही पड़ा है।
निजी दुकानदारों को भारी लाभ
खरखौदा कस्बा में ही कई दर्जन बीज व रासायानिक खाद की निजी दुकानें है। किसानों को बीज भंडार पर उपयुक्त बीज उपलब्ध न होने कारण निजी दुकानों पर महंगे रेट पर बीज बेचा जाता है मजबूरी में किसानों को खरीदना पड़ता है।
हर सीजन में भेजी जा रही डिमांड
सरकारी योजनाओं के चलते बीज भंडारों पर बीज भेजा जाता है। यह सीधा लखनऊ से संचालित होता है। इसके बाद भी क्षेत्र की मांग हर वर्ष भेजी जाती है। - प्रमोद कुमार सिरोही, जिला कृषि अधिकारी।
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खरखौदा। मानसून की दस्तक होने को है। किसान खरीफ फसलों की बुआई की तैयारी में लगे हैं पर राजकीय बीज भंडार खाली पड़ा हुआ हैं। किसान निजी दुकानों से कई गुना दामों पर बीज खरीदने को मजबूर हैं।
खरखौदा विकास खंड में 30 गांव आते हैं। करीब 14 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि है। केवल खरखौदा कस्बे में राजकीय बीज भंडार बना है पर ज्यादातर समय वहां रबी हो या खरीफ फसल किसी का भी बीज समय पर उपलब्ध नहीं हो पाता है। पिछले दिनों रबी फसलों में केवल 270 क्विंटल गेहूं और 2.5 क्विंटल सरसों को बीज उपलब्ध हो सका। जो कि कुछ ही प्रतिशत किसानों को मिल सका। राजकीय बीज भंडार पर सरसों का मूल्य करीब 80 रुपये प्रति किग्रा. के अनुसार मिलता है। जिसमें बाद में 50 प्रतिशत छूट की रकम किसान के खाते में आती है। पर राजकीय भंडारों पर बीज न होने पर क्षेत्र के किसानों को मजबूरन निजी दुकानदारों से 500 रुपये प्रति किग्रा. सरसों का बीज खरीदना पड़ा। वहीं अब खरीफ फसलों में दस कुंतल, अरहर 10 किलो, ढांचा 30 किलो व उर्द मात्र 1.30 क्विंटल बीज भी भेजा गया। जबकि धान का बीज करीब एक माह पहले ही समाप्त हो गया। जिसमें क्षेत्र के करीब 70 प्रतिशत किसानों को धान का बीज नहीं मिल सका है। वहीं ज्वार और बाजरे का भी बीज उपलब्ध नहीं हैं।
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बुआई का समय निकले पर पहुंचता है बीज
कई बार राजकीय बीज भंडार पर उक्त फसल की बुआई का समय निकलने के बाद बीज आता है। लेकिन इन बीज भंडारों पर जो बीज आता है। यदि वह किसानों द्वारा नहीं खरीदा जाता है तो वह बीज वापस नहीं होता। गोदाम इंचार्ज को स्वयं भुगतान करना पड़ता है।
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कभी ज्यादा तो कभी कम बीज पहुंच रहा
गोदाम इंचार्ज की माने तो कभी कभी कम बीज पहुंचने पर सभी किसानों नहीं मिल पाता जिसके चलते विवाद भी हो जाता है। इस वर्ष मात्र 10 किग्रा अरहर और 30 किग्रा. ढांचे का बीच आया और उर्द केवल 1.5 क्विंटल ही भेजे हैं। जबकि 2017 में उर्द 16 क्विंटल बीज भेजा गया। जिसमें केवल 06 क्विंटल बीज ही बिक सका। बाकि 10 क्विंटल गोदाम में ही पड़ा है।
निजी दुकानदारों को भारी लाभ
खरखौदा कस्बा में ही कई दर्जन बीज व रासायानिक खाद की निजी दुकानें है। किसानों को बीज भंडार पर उपयुक्त बीज उपलब्ध न होने कारण निजी दुकानों पर महंगे रेट पर बीज बेचा जाता है मजबूरी में किसानों को खरीदना पड़ता है।
हर सीजन में भेजी जा रही डिमांड
सरकारी योजनाओं के चलते बीज भंडारों पर बीज भेजा जाता है। यह सीधा लखनऊ से संचालित होता है। इसके बाद भी क्षेत्र की मांग हर वर्ष भेजी जाती है। - प्रमोद कुमार सिरोही, जिला कृषि अधिकारी।