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शुद्ध पेयजल की आस, लेकिन किट नहीं है पास
Updated Fri, 21 Sep 2018 02:05 AM IST
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मवाना। नगर पालिका एवं नगर पंचायतों की तर्ज पर स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 18 के माध्यम से ग्रामीणों की रैंकिंग अव्वल लाने की कवायद शुरू हो गई है। ग्राम पंचायतों की जमीनी हकीकत की बात करें तो ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल तक नसीब नहीं हो पा रहा है। ग्राम पंचायत के चुनाव होने के बाद से अब तक प्रधानों को पेयजल टेस्ट किट उपलब्ध नहीं कराई जा सकी हैं। जिस कारण गांव में कौन सा हैंडपंप दूषित पानी दे रहा है और कौन सा शुद्ध इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।
यह थी योजना
गांवों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो सके इसके लिए शासन के आदेश पर सभी ग्राम पंचायतों में जल निगम के माध्यम से पेयजल टेस्ट किट उपलब्ध कराई गई थी। इन किटों के माध्यम से प्रधान सालभर में दो बार सभी हैंडपंपों के पानी के सैंपल लेकर जल निगम को टेस्ट के लिए भेजा करते थे। जिस हैंडपंप का सैंपल फेल होता था। उस हैंडपंप पर तख्ती के माध्यम से लिखा जाता था कि इसका पानी पीने योग्य नहीं है। हालांकि तीन वर्ष बाद भी किट उपलब्ध नहीं होने से हैंडपंपों के पानी की जांच नहीं हो सकी है। हालांकि कागजों में जांच बराबर चल रही है।
पेयजल किट उपलब्ध नहीं
साल 2015 के चुनाव के बाद नवनिर्वाचित प्रधानों को पेयजल किट उपलब्ध नहीं कराई गई। यही नहीं ब्लॉकों में इसको लेकर गोष्ठी का आयोजन भी होता था और समय-समय पर प्रधानों को किट से कैसे पानी का सैंपल लेना है इसकी जानकारी उपलब्ध कराई जाती थी। तीन वर्ष बीतने के बाद भी किट ग्राम प्रधानों को उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। न ही ग्रामीण क्षेत्रों के हैंडपंपों के पानी की जांच की जा रही है। जिस कारण ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
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इन गांव में हैं दूषित पानी
औद्योगिक इकाइयों का पानी नालों में छोड़े जाने से सठला, ततीना, राफन, कूड़ी कमालपुर, बोहड़पुर, गणेशपुर आदि गांव में दूषित पानी के चलते ग्रामीण बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। शासन ने आज तक इन गांवों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करने की जहमत तक नहीं उठाई।
आंकड़ों में मवाना ब्लॉक
मवाना ब्लॉक की बात करें तो यहां 47 ग्राम पंचायत हैं। इनमें 2011 की जनगणना के हिसाब से 22 हजार 314 परिवार हैं, जिनकी कुल जनसंख्या 1 लाख 34 हजार 945 है। 47 ग्राम पंचायतों में कुल 2259 सरकारी हैंडपंप हैं। इनमें से 41 हैंडपंप हाल ही में लगवाए गए हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
यदि किसी हैंडपंप के पानी के दूषित होने की सूचना आती है। ब्लॉक स्तर से हैंडपंप के पानी की जांच कराई जाती है। पेयजल टेस्ट किट देने की जिम्मेदारी जलनिगम की है।-सुमित कुमार भाटी, बीडीओ मवाना
मुख्य बातें
तीन वर्षों से पानी की शुद्धता की जांच के लिए ग्राम प्रधान को नहीं मिली किट
जांच के अभाव में ग्रामीण दूषित पेयजल पीने को मजबूर
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यह थी योजना
गांवों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो सके इसके लिए शासन के आदेश पर सभी ग्राम पंचायतों में जल निगम के माध्यम से पेयजल टेस्ट किट उपलब्ध कराई गई थी। इन किटों के माध्यम से प्रधान सालभर में दो बार सभी हैंडपंपों के पानी के सैंपल लेकर जल निगम को टेस्ट के लिए भेजा करते थे। जिस हैंडपंप का सैंपल फेल होता था। उस हैंडपंप पर तख्ती के माध्यम से लिखा जाता था कि इसका पानी पीने योग्य नहीं है। हालांकि तीन वर्ष बाद भी किट उपलब्ध नहीं होने से हैंडपंपों के पानी की जांच नहीं हो सकी है। हालांकि कागजों में जांच बराबर चल रही है।
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पेयजल किट उपलब्ध नहीं
साल 2015 के चुनाव के बाद नवनिर्वाचित प्रधानों को पेयजल किट उपलब्ध नहीं कराई गई। यही नहीं ब्लॉकों में इसको लेकर गोष्ठी का आयोजन भी होता था और समय-समय पर प्रधानों को किट से कैसे पानी का सैंपल लेना है इसकी जानकारी उपलब्ध कराई जाती थी। तीन वर्ष बीतने के बाद भी किट ग्राम प्रधानों को उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। न ही ग्रामीण क्षेत्रों के हैंडपंपों के पानी की जांच की जा रही है। जिस कारण ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
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इन गांव में हैं दूषित पानी
औद्योगिक इकाइयों का पानी नालों में छोड़े जाने से सठला, ततीना, राफन, कूड़ी कमालपुर, बोहड़पुर, गणेशपुर आदि गांव में दूषित पानी के चलते ग्रामीण बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। शासन ने आज तक इन गांवों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करने की जहमत तक नहीं उठाई।
आंकड़ों में मवाना ब्लॉक
मवाना ब्लॉक की बात करें तो यहां 47 ग्राम पंचायत हैं। इनमें 2011 की जनगणना के हिसाब से 22 हजार 314 परिवार हैं, जिनकी कुल जनसंख्या 1 लाख 34 हजार 945 है। 47 ग्राम पंचायतों में कुल 2259 सरकारी हैंडपंप हैं। इनमें से 41 हैंडपंप हाल ही में लगवाए गए हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
यदि किसी हैंडपंप के पानी के दूषित होने की सूचना आती है। ब्लॉक स्तर से हैंडपंप के पानी की जांच कराई जाती है। पेयजल टेस्ट किट देने की जिम्मेदारी जलनिगम की है।-सुमित कुमार भाटी, बीडीओ मवाना
मुख्य बातें
तीन वर्षों से पानी की शुद्धता की जांच के लिए ग्राम प्रधान को नहीं मिली किट
जांच के अभाव में ग्रामीण दूषित पेयजल पीने को मजबूर