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पानी की कमी का मुख्य कारण जल प्रबंधन का सही न होना ---- डा. प्रणव राणा वेस्ट यूपी में धीरे धीरे कम हो रहा पानी

Sun, 09 Sep 2018 02:44 AM IST
Updated Sun, 09 Sep 2018 02:44 AM IST
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पानी की कमी का मुख्य कारण जल प्रबंधन का सही न होना ---- डा. प्रणव राणा वेस्ट यूपी में धीरे धीरे कम हो रहा पानी
दौराला। कस्बे में शनिवार को आयोजित संगोष्ठी में किसानों को पानी के दोहन पर व्याख्यान दिया गया। उन्हें चेताया कि यदि समय रहते पानी नहीं बचाया गया तो आने वाले समय में और परेशानी बढ़ जाएगी। भारत वर्ष में कृषि क्षेत्र लगभग 80 प्रतिशत पानी का उपयोग करता है। करीब दो दशक पहले पानी जहां सहज-सुलभ था। वही अब धीरे-धीरे पहुंच से दूर होता जा रहा है। आजादी के बाद से अब तक देश की आबादी लगभग तीन गुना बढ़ गई है। इसका असर जल संसाधनों पर पड़ना जरूरी है। अब पानी की कमी की मुुख्य वजह सही जल प्रबंधन का न होना है।
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दौराला में हुई संगोष्ठी में किसानों को वैज्ञानिक डॉ. प्रणव राणा ने बताया कि भूजल स्तर वर्ष दर वर्ष गिरता जा रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश अब धीरे-धीरे पानी की कमी की तरफ बढ़ रहा है। खेतों में पानी की आवश्यकता से ज्यादा प्रयोग पशुओं और घरेलू आवश्यकता में बर्बादी हो रही है। पानी की बेहिसाब बर्बादी इस उपजाऊ क्षेत्र को धीरे-धीरे सूखे की ओर धकेल रही है। गांवों में हैडपंप और नलकूप के बोरिंग की बढ़ती गहराई इसकी गवाह हैं कि जलस्रोत तेजी से घट रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना प्रमुख फसल है और किसानों का शुरू से ही इसकी अधिक उपज पर ध्यान है। इसका परिणाम सिंचाई तथा बेतहाशा उर्वरक के इस्तेमाल के रूप में दिखाई देती है। फसल की आवश्यकता से अधिक पानी बहकर पौधों की पहुंच से दूर चला जाता है। पिछले कुछ सालों से जैसे-जैसे गन्ने का उत्पादन बढ़ा है। उसी अनुपात में खेतों में कीटनाशकों के इस्तेमाल में भी वृद्धि हुई है। जहां पहले एक-दो कीटनाशक से ही काम चल जाता था। अब कीटों की प्रजाति के अनुसार अलग-अलग कई प्रकार के कीटनाशी उपलब्ध हैं। उनका प्रयोग भी जरूरत से कई गुणा अधिक कर रहे हैं। ये कीटनाशी या तो पानी के साथ बहकर जल स्रोतों को दूषित करते हैं या जमीन में स्थिर रहकर उसकी उर्वरता को घटाते हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार गन्ने की फसल को सात-आठ सिंचाई पर्याप्त हैं। सिंचाई में गन्ने के जड़ क्षेत्र में ही नमी बनानी चाहिए। जबकि किसान गन्ने के खेतों में धान सरीखी सिंचाई करते हैं। इसके अतिरिक्त सर्दी या बरसात के मौसम में जब पानी की जरूरत नहीं होती तब भी चालू नलकूप सिर्फ पानी की बर्बादी की तरफ इशारा करते हैं।
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वहीं, डॉ. प्रणव राणा ने कहा कि पानी बचाने के लिए ड्रिप इरिगेशन तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए। खेतों में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का जरूरत भर एवं संस्तुति के हिसाब से प्रयोग करना चाहिए। वर्षा काल ही सही समय है। जब गांव के तालाबों तथा खेतों के आसपास के पोखरों में जल को संचित करें ताकि जलस्तर ऊपर उठ सके।
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मुख्य बातें
गिरते भूजल स्तर पर आयोजित संगोष्ठी में कृषि वैज्ञानिकों ने चिंता जताई
किसानों को जरूरत भर सिंचाई, उर्वरकों और कीटनाशकों के इस्तेमाल की सलाह दी
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