फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   कांवड़ उठाते ही लागू हो जाते हैं नियम

कांवड़ उठाते ही लागू हो जाते हैं नियम

Mon, 30 Jul 2018 02:20 AM IST
Updated Mon, 30 Jul 2018 02:20 AM IST
विज्ञापन
कांवड़ उठाते ही लागू हो जाते हैं नियम
बहसूमा। शिव भक्तों को कांवड़ कंधे पर रखते समय तमाम नियमों का पालन करना जरूरी होता है। मान्यता है कि इनमें जरा सी चूक हुई तो यात्रा खंडित मानी जाती है। कांवड़ यात्रा के दौरान कोई चूक होने पर संगत के गुरु द्वारा बोले गए दंड का पालन करना कांवड़िये का धर्म माना जाता है।
विज्ञापन

कस्बा स्थित शिव मंदिर के पुजारी सुभाष सेमवाल ने बताया कि हरिद्वार, गोमुख, नीलकंठ आदि से प्रत्येक वर्ष लाखों शिव भक्त जल लेकर गंतव्य की ओर बढ़ जाते हैं। इन शिव भक्तों को कांवड़िया बनने से पूर्व विभिन्न नियम कायदों का पालन करना अनिवार्य माना जाता है। कंधे पर कांवड़ धारण करने के बाद से ही शिव भक्त पर नियम लागू हो जाते हैं। उन्हें हर हाल में पालन करना जरूरी होता है। नियमों में मुख्य रूप से पानी को जल, कुत्ते को भैरो, महिला को भोली, आदमी को भोला, बैल को नादिया, खाने को भोजन कहना होता है। कांवड़ लाने के दौरान किसी से द्वेष रखना, गालीगलौज करना, पशु को डंडा मारना वर्जित है। इस दौरान किसी भी तरह का नशा प्रतिबंधित है।
विज्ञापन

वहीं, सोने एवं शौच के पश्चात स्नान करना जरूरी है। इसके बाद ही कांवड़ कंधे पर धारण करनी जरूरी होती है। यदि शिवभक्त से कांवड़ यात्रा के दौरान किसी नियम का उल्लंघन हो जाता है तो फिर उसके लिए संग के गुरु द्वारा बोले गए दंड को पूरा करना धर्म बन जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

घर में सब्जी तड़का लगाने पर झेलनी पड़ती है पीड़ा
कई वर्षों से नीलकंठ एवं हरिद्वार आदि धर्मस्थलों से कांवड़ ला रहे रवींद्र भगतजी एवं रैंजु योगी का कहना कि कांवड़ यात्रा की बाबत मान्यता प्रचलित है। कांवड़ यात्रा की अवधि के दौरान घर में सब्जी आदि में तड़का नहीं लगाना चाहिए। इससे धार्मिक स्थल से जल लेकर आने वाले को मार्ग में बांधाए आती हैं।
ये हैं कांवड़ संबंधी आस्था
खड़ी कांवड़ : विश्राम के दौरान शिवभक्त कांवड को अपने साथी या अन्य व्यक्ति के कंधे पर ही धारण कराएं। झूला कांवड़ : जरूरत पड़ने पर शिव भक्त कांवड़ को किसी पेड़ या बांस आदि पर टांग सकते हैं।
डाक कांवड़ : इसमें शिवभक्त जत्थे के रूप में रहते हैं। जिनमें एक शिवभक्त कांवड़ को कंधे पर रखकर चलता है। अन्य साथी बारी-बारी से कांवड़ कंधे पर रखकर निकटम मंदिर में पहुंचकर सामूहिक के रूप से जलाभिषेक करते हैं।


शिवरात्रि पर कांवड़ियों के लिए होंगे खास इंतजाम
परीक्षितगढ़। शिवरात्रि पर्व को लेकर नगर पंचायत अध्यक्ष अमित मोहन टीपू के निवास पर सभासदों की बैठक हुई। जिसमें पर्व को ऐतिहासिक बनाने के लिए सभासदों ने सुझाव दिया।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए चेयरमैन अमित मोहन टीपू ने कहा कि शिव भक्तों की सुविधा को देखते हुए नगर में सोमवार से मीट की दुकानें बंद रहेंगी। सभासद सतीश अग्रवाल ने कहा कि प्रति वर्ष की भांति नगर के सभी मंदिरों को सजाया जाएगा। नगर में चूने का छिड़काव किया जाएगा। सभासद अनिरुद्ध त्यागी ने कहा कि नगर पंचायत द्वारा सभी सभासदों के नाम से स्वागत के बैनर लगाए जाएं। सभासद देवीदास गौतम ने कहा कि शिवरात्रि पर्व के दौरान केवड़ा का छिड़काव, वाटर कूलरों की मरम्मत का प्रस्ताव रखा। इस दौरान सभासदों के सभी प्रस्ताव सर्वसम्मति से माने गए। वहीं, चेयरमैन अमित मोहन टीपू ने नगर पंचायत कर्मचारियों को नगर के सभी मंदिरों को सजाने, कली छिड़कने, केवड़ा छिड़काव, मीट की दुकानें बंद कराने, वाटर कूलरों की मरम्मत कराने के लिए निर्देश दिए। इस अवसर पर सतीश अग्रवाल, देवीदास गौतम, गौरव त्यागी, सतीश अग्रवाल, कपिल लौहरे, जयनारायण शर्मा, अनिरुद्ध त्यागी, नंदकिशोर आदि सभासद उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed