{"_id":"5aaa9ad54f1c1b8c778b5bef","slug":"152113044118-kithor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आम के बागो मे फफूंदी व हापर कीट का प्रकोप बढा ।","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आम के बागो मे फफूंदी व हापर कीट का प्रकोप बढा ।
Updated Thu, 15 Mar 2018 09:39 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
माछरा।
क्षेत्र के कई गांवों में सैकड़ों बीघा आम के बाग बौर से लदे हुए हैं। बौर पर फफूंदी एवं हॉपर रोग ने हमला बोल दिया है। जिसके चलते बाग मालिकों ने इन रोग से बचाने के लिए कीटनाशक का छिड़काव करना शुरू कर दिया है। हालांकि उद्यान विभाग इस बीमारी के प्रति आंखे मूूंदे बैठा है।
ब्लॉक माछरा को करीब 20 वर्ष पूर्व फल पट्टी क्षेत्र में शामिल किया गया था। माछरा, नंगली अब्दुल्ला, कासमपुर, शोल्दा, भटीपुरा, अमरपुर, खंद्रावली, मेघराजपुर, रछौती, हसनपुर कलां, नंगली किठौर, बहरोड़ा, गोविंदपुरी, महलवाला, किठौर, शाहजहांपुर, जड़ौदा, भड़ौली, फतेहपुर, नित्यानंदपुर आदि करीब 20 गांवों को फल पट्टी में चयनित किया गया था। इन गांवों में आम के बाग काफी संख्या में हैं परंतु अब करीब 12 वर्षों से कोई भी उद्यान विभाग द्वारा बागान मालिकों को कोई भी सुविधा नहीं दी जा रही है। क्षेत्र में कोई भी फल मंडी, बागान यंत्र अथवा कीटनाशक केंद्र नहीं हैं। जिससे उन्हें छूट पर कीटनाशक मुहैया कराया जा सके। क्षेत्र में प्रशिक्षण केंद्र की सख्त आवश्यकता है। जिसमें समय-समय पर प्रशिक्षण देकर बागों में होने वाले रोगों से आम की फसल की रक्षा का प्रशिक्षण दे सके।
बाग मालिक और ठेकेदार आरिफ, इस्लाम, बबलू, लाल सिंह, राजेन्द्र सिंह आदि ने बताया कि जब कोई भी सुविधा नहीं है। ऐसे में फल पट्टी का लाभ क्या है। ब्लॉक क्षेत्र में उद्यान विभाग से एक अधिकारी तैनात है। आरोप है कि वह कभी भी बाग मालिकों के संपर्क में नहीं रहता है। अब आम पर काफी बौर आ रहा है। बाग मालिक बौर को देखकर प्रसन्न हैं। उनका मानना है कि इस बार आम में काफी लाभ हो जायेगा परंतु बौर में फफूंदी एवं हॉपर रोग फैलता जा रहा है। बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह के ही फफूंदी एवं हॉपर रोग के बचाव के लिए कीटनाशकों का स्प्रे किया जा रहा है। बाग और उसमें आने वाले फल पर कुप्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है।
विज्ञापन
उद्यान विभाग के अधिकारी जगवीर सिंह ने बताया कि कई वर्षों से फल पट्टी क्षेत्र के लिए शासन से कोई पैसा नहीं आ रहा है। इसलिए बाग मालिकों को कुछ दिया नहीं जा रहा है तथा बोर पर जब हापर कीट लग जाता है तो वह बोर का रस चूसता है तथा बीट करता है। उस बीट से फफूंदी लग जाती है। हॉपर से बचने के लिए रोबोर कीटनाशक का स्प्रे करें तथा फंगस से बचाव के लिए सल्फर का स्प्रे करना चाहिए।
मुख्य बातें
विशेषज्ञों की सलाह बिना बागों में किया जा रहा है कीटनाशकों का छिड़काव
सरकारी उपेक्षा से आहत हैं बागान मालिक
विज्ञापन
क्षेत्र के कई गांवों में सैकड़ों बीघा आम के बाग बौर से लदे हुए हैं। बौर पर फफूंदी एवं हॉपर रोग ने हमला बोल दिया है। जिसके चलते बाग मालिकों ने इन रोग से बचाने के लिए कीटनाशक का छिड़काव करना शुरू कर दिया है। हालांकि उद्यान विभाग इस बीमारी के प्रति आंखे मूूंदे बैठा है।
ब्लॉक माछरा को करीब 20 वर्ष पूर्व फल पट्टी क्षेत्र में शामिल किया गया था। माछरा, नंगली अब्दुल्ला, कासमपुर, शोल्दा, भटीपुरा, अमरपुर, खंद्रावली, मेघराजपुर, रछौती, हसनपुर कलां, नंगली किठौर, बहरोड़ा, गोविंदपुरी, महलवाला, किठौर, शाहजहांपुर, जड़ौदा, भड़ौली, फतेहपुर, नित्यानंदपुर आदि करीब 20 गांवों को फल पट्टी में चयनित किया गया था। इन गांवों में आम के बाग काफी संख्या में हैं परंतु अब करीब 12 वर्षों से कोई भी उद्यान विभाग द्वारा बागान मालिकों को कोई भी सुविधा नहीं दी जा रही है। क्षेत्र में कोई भी फल मंडी, बागान यंत्र अथवा कीटनाशक केंद्र नहीं हैं। जिससे उन्हें छूट पर कीटनाशक मुहैया कराया जा सके। क्षेत्र में प्रशिक्षण केंद्र की सख्त आवश्यकता है। जिसमें समय-समय पर प्रशिक्षण देकर बागों में होने वाले रोगों से आम की फसल की रक्षा का प्रशिक्षण दे सके।
विज्ञापन
बाग मालिक और ठेकेदार आरिफ, इस्लाम, बबलू, लाल सिंह, राजेन्द्र सिंह आदि ने बताया कि जब कोई भी सुविधा नहीं है। ऐसे में फल पट्टी का लाभ क्या है। ब्लॉक क्षेत्र में उद्यान विभाग से एक अधिकारी तैनात है। आरोप है कि वह कभी भी बाग मालिकों के संपर्क में नहीं रहता है। अब आम पर काफी बौर आ रहा है। बाग मालिक बौर को देखकर प्रसन्न हैं। उनका मानना है कि इस बार आम में काफी लाभ हो जायेगा परंतु बौर में फफूंदी एवं हॉपर रोग फैलता जा रहा है। बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह के ही फफूंदी एवं हॉपर रोग के बचाव के लिए कीटनाशकों का स्प्रे किया जा रहा है। बाग और उसमें आने वाले फल पर कुप्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है।
विज्ञापन
उद्यान विभाग के अधिकारी जगवीर सिंह ने बताया कि कई वर्षों से फल पट्टी क्षेत्र के लिए शासन से कोई पैसा नहीं आ रहा है। इसलिए बाग मालिकों को कुछ दिया नहीं जा रहा है तथा बोर पर जब हापर कीट लग जाता है तो वह बोर का रस चूसता है तथा बीट करता है। उस बीट से फफूंदी लग जाती है। हॉपर से बचने के लिए रोबोर कीटनाशक का स्प्रे करें तथा फंगस से बचाव के लिए सल्फर का स्प्रे करना चाहिए।
मुख्य बातें
विशेषज्ञों की सलाह बिना बागों में किया जा रहा है कीटनाशकों का छिड़काव
सरकारी उपेक्षा से आहत हैं बागान मालिक