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दुर्गा पूजा।
Updated Sat, 30 Sep 2017 06:55 PM IST
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हस्तिनापुर। कस्बे में चल रही दुर्गा पूजा महोत्सव के पांचवें दिन श्रद्धालुओं ने दशमी पर पूजा अर्चना कर धर्म लाभ अर्जित किया। विधानाचार्य पंडित जुगल चक्रवर्ती ने बताया कि जो श्रद्धालु दुर्गा पूजा महोत्सव में भाग लेकर सच्चे मन से मां से मन्नत मांगते हैं उनकी मुराद अवश्य पूरी होती है। यहां शंकर हलदार, समीर कविराज, निशांत मंडल, अजीत निकांत बाला आदि मौजूद रहे। उधर, बंगाली बाजार में सार्वजनिक दुर्गा पूजा मंदिर में सांस्कृतिक विकास कमेटी के अध्यक्ष चंपक साधु, उपाध्यक्ष राजू राय, सचिव गौरंग विश्वास ने बताया कि महोत्सव में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु आते हैं। वहीं रामकृष्ण बंगला एकेडमी में चल रहे पूजन में आज माता के 64 रूपों की पूजा की गई। कमेटी कार्यकर्ताओं एवं श्रद्धालुओं ने माता के सभी रूपों का पूजन किया। सत्यनारायण निताई मंडल जगदीश अरुण, तपन, महितोष मंडल आदि का सहयोग रहा।
जैन समाज का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मिला
हस्तिनापुर। जैन धर्म की तीर्थ नगरी हस्तिनापुर जंबूद्वीप के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली पहुंचकर राष्ट्रपति भवन में महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामीजी के नेतृत्व में राष्ट्रपति को तीर्थ दर्शन के लिए आमंत्रित किया। साथ ही जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का आशीर्वाद प्रेषित किया। स्वामी ने राष्ट्रपति को मांगीतुंगी में निर्मित हुई अखंड पाषाण में बनी विश्व की पहली कृति भगवान ऋषभदेव की 108 फीट उत्तुंग जीवंत प्रतिमा के बारे में भी महामहिम को बताया। यह गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड 2016 में दर्ज हो चुकी है। यह पूरे विश्व में पहली दिगंबर जैन प्रतिमा है जो अखंड पाषाण में मांगीतुंगी पर्वत के ऊपर निर्मित की गई है। राष्ट्रपति ने जैन समाज को शुभकामनाएं दीं।
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जैन समाज का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मिला
हस्तिनापुर। जैन धर्म की तीर्थ नगरी हस्तिनापुर जंबूद्वीप के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली पहुंचकर राष्ट्रपति भवन में महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामीजी के नेतृत्व में राष्ट्रपति को तीर्थ दर्शन के लिए आमंत्रित किया। साथ ही जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का आशीर्वाद प्रेषित किया। स्वामी ने राष्ट्रपति को मांगीतुंगी में निर्मित हुई अखंड पाषाण में बनी विश्व की पहली कृति भगवान ऋषभदेव की 108 फीट उत्तुंग जीवंत प्रतिमा के बारे में भी महामहिम को बताया। यह गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड 2016 में दर्ज हो चुकी है। यह पूरे विश्व में पहली दिगंबर जैन प्रतिमा है जो अखंड पाषाण में मांगीतुंगी पर्वत के ऊपर निर्मित की गई है। राष्ट्रपति ने जैन समाज को शुभकामनाएं दीं।
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