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मुख्यमंत्री को भेजा शिकायती पत्र-फर्जी तरीके से बैंक खाते से 11 हजार रुपये निकाल लिये जाने की शिकायत
Updated Fri, 29 Sep 2017 08:51 PM IST
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सरधना।
गांव छुर निवासी सोहनवीर पुत्र अमीचंद ने बैंक खाते से 11 हजार रुपये निकाले जाने की शिकायत बीती 24 अप्रैल को मुख्यमंत्री कार्यालय से की थी। शिकायत की जांच तहसील मुख्यालय पहुंच गई है। आरोप है कि बैंक प्रबंधक की मिलीभगत से रुपये निकाले गए हैं।
छुर निवासी सोहनवीर पुत्र अमीचंद ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में बताया कि उसकी पुत्री को स्कूल जाते समय अज्ञात व्यक्ति ने गोली मार दी थी। बेटी के उपचार के लिए उसने छुर गांव की बैंक शाखा से चार लाख रुपये का ऋण लिया। बेटी स्वस्थ होने पर उसे वर्ष 2013 में बीएड कराई। इसके चलते वह बैंक ऋण एवं ब्याज जमा नहीं कर सका। इसके बाद 12 सितंबर 2012 से 19 मार्च 2016 तक चार वर्ष का ब्याज एक लाख 40 हजार रुपये जमा कराया। इसके बावजूद 21 मार्च 2016 को एक लाख दस हजार रुपये की रिकवरी तहसील भेज दी गई। इस दौरान बैंक मैनेजर ने किसी भी नोटिस द्वारा उसे सूचना नहीं दी। इस बाबत 11 अगस्त 2016 को पत्र एलडीएम मेरठ एवं पादर्शिक प्रबंधक मेरठ, अध्यक्ष प्रबंधक निदेशक गुड़गांव हरियाणा को भेजा। जिस पर बैंक अधिकारियों की तरफ से प्रबंधक पर कार्रवाई की गई। इस पर प्रबंधक ने गणमान्य लोगों के बीच मामला रखा और फैसला कर लिया। इस दौरान कहा कि वह तहसील से रिकवरी वापस मंगा लेगा। आरोप है कि इस दौरान बैंक प्रबंधक ने 11 हजार रुपये कृषक कार्ड से फर्जी तरीके से निकालकर अमीन को दे दिए। किसान को इसकी जानकारी बैंक में पहुंचने पर हुई। किसान सोहनवीर ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय में की। जिसमें कहा कि उसके फर्जी हस्ताक्षर के जरिए खाते से रुपये निकाल लिये। तहसील टीम ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
मुख्य बातें
शाखा प्रबंधक पर मिलीभगत कर खाते से रुपये निकाल देने का आरोप
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गांव छुर निवासी सोहनवीर पुत्र अमीचंद ने बैंक खाते से 11 हजार रुपये निकाले जाने की शिकायत बीती 24 अप्रैल को मुख्यमंत्री कार्यालय से की थी। शिकायत की जांच तहसील मुख्यालय पहुंच गई है। आरोप है कि बैंक प्रबंधक की मिलीभगत से रुपये निकाले गए हैं।
छुर निवासी सोहनवीर पुत्र अमीचंद ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में बताया कि उसकी पुत्री को स्कूल जाते समय अज्ञात व्यक्ति ने गोली मार दी थी। बेटी के उपचार के लिए उसने छुर गांव की बैंक शाखा से चार लाख रुपये का ऋण लिया। बेटी स्वस्थ होने पर उसे वर्ष 2013 में बीएड कराई। इसके चलते वह बैंक ऋण एवं ब्याज जमा नहीं कर सका। इसके बाद 12 सितंबर 2012 से 19 मार्च 2016 तक चार वर्ष का ब्याज एक लाख 40 हजार रुपये जमा कराया। इसके बावजूद 21 मार्च 2016 को एक लाख दस हजार रुपये की रिकवरी तहसील भेज दी गई। इस दौरान बैंक मैनेजर ने किसी भी नोटिस द्वारा उसे सूचना नहीं दी। इस बाबत 11 अगस्त 2016 को पत्र एलडीएम मेरठ एवं पादर्शिक प्रबंधक मेरठ, अध्यक्ष प्रबंधक निदेशक गुड़गांव हरियाणा को भेजा। जिस पर बैंक अधिकारियों की तरफ से प्रबंधक पर कार्रवाई की गई। इस पर प्रबंधक ने गणमान्य लोगों के बीच मामला रखा और फैसला कर लिया। इस दौरान कहा कि वह तहसील से रिकवरी वापस मंगा लेगा। आरोप है कि इस दौरान बैंक प्रबंधक ने 11 हजार रुपये कृषक कार्ड से फर्जी तरीके से निकालकर अमीन को दे दिए। किसान को इसकी जानकारी बैंक में पहुंचने पर हुई। किसान सोहनवीर ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय में की। जिसमें कहा कि उसके फर्जी हस्ताक्षर के जरिए खाते से रुपये निकाल लिये। तहसील टीम ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
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मुख्य बातें
शाखा प्रबंधक पर मिलीभगत कर खाते से रुपये निकाल देने का आरोप