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स्वास्थय विभाग की टीम ने सर्वहित अस्पताल के अल्ट्रासाउंड़ रुम और दौराला स्थित सेंटर को किया सील
Updated Wed, 20 Sep 2017 02:35 AM IST
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मोदीपुरम/दौराला। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मंगलवार को सर्वहित अस्पताल के अल्ट्रासाउंड रूम को सील कर दिया। इसके अलावा डॉक्टर के दौराला स्थित अल्ट्रासाउंड सेंटर को भी सील कर दिया गया है। सोमवार को सोनीपत और मेरठ की स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से छापेमारी कर भ्रूण जांच करते हुए डॉक्टर अनिल शर्मा और मनीष को गिरफ्तार किया था।
मंगलवार को सिटी मजिस्ट्रेट एनपी सिंह और डिप्टी सीएमओ देवीदास के नेतृत्व में टीम सर्वहित अस्पताल पहुंची। इस दौरान उनके साथ थाना प्रभारी पल्लवपुरम सुभाष अत्री और चौकी प्रभारी उपेंद्र मलिक भी रहे। टीम ने सबसे पहले अल्ट्रासाउंड रूम को सील किया। रूम की चाभी न मिलने पर टीम ने रूम का लॉक तोड़कर पहले उसकी जांच की। जांच के दौरान पता चला कि यहां रजिस्ट्रेशन एक फिक्स अल्ट्रासाउंड मशीन और एक पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन का था, लेकिन मौके पर दोनों ही पोर्टेबल मशीन पायी गई। यहां से टीम ने सभी दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर रूम को सील कर दिया। इस दौरान डॉ. जेवी चिकारा, डॉ. विनोद और डॉ. ऋषि भाटिया मौजूद रहे। टीम ने रूम सीलकर उसकी चाभी डॉ. विनोद की सुपुर्दगी में दे दी। यहां से टीम डॉ. अनिल शर्मा के दौराला स्थित अल्ट्रासाउंड सेंटर पर गई, जहां ताला बंद मिलने पर टीम ने उसे भी सील कर दिया। डिप्टी सीएमओ डॉ. देवीदास ने बताया कि इस मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। आरोपियों के खिलाफ थाना पल्लवपुरम में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। अभी जांच चल रही है।
अस्पताल पर भी हो सकती है कार्रवाई
मंगलवार को सर्वहित अस्पताल पहुंचे डिप्टी सीएमओ डॉ. देवीदास और सिटी मजिस्ट्रेट एनपी सिंह ने अस्पताल के चिकित्सक डॉ. जेवी चिकारा से अल्ट्रासाउंड सेंटर में चल रहे भ्रूण परीक्षण के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि ये सेंटर अस्पताल का नहीं है, बल्कि उन्होंने अनिल शर्मा को किराए पर सेंटर चलाने के लिए जगह दे रखी है। उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी कि सेंटर पर अवैध भ्रूण परीक्षण होता है। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने अस्पताल के चिकित्सकों को जमकर हड़काया और कहा कि यदि सेंटर उनके अस्पताल में चल रहा है तो उसकी जिम्मेदारी भी अस्पताल की है। सिटी मजिस्ट्रेट ने अस्पताल के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट को भी अपने कब्जे में ले लिया। उनका कहना है कि अस्पताल के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
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अल्ट्रासाउंड सेंटर में मरीजों के लिए मूलभूत सुविधाएं भी नहीं
स्वास्थ्य विभाग की टीम जब अस्पताल के बेसमेंट में बने अल्ट्रासाउंड सेंटर पर पहुंची तो उस कमरे में ताला लगा था। इस दौरान कमरे के बाहर ना तो कोई पंखा लगा था और ना ही पीने के पानी की कोई व्यवस्था थी। सिटी मजिस्ट्रेट ने अस्पताल संचालकों से पूछा की इतनी गर्मी है ऐसे में बिना पंखे व पानी के मरीज कैसे यहां अल्ट्रासाउंड कराते हैं, जिस पर अस्पताल संचालक चुप्पी साध गए। बाद में अल्ट्रासाउंड सेंटर का ताला तोड़ा गया तो उस कमरे में केवल एक पंखा लगा हुआ था। इसके अलावा अटैच टॉयलेट भी काफी गंदा था, जिसे देखकर सिटी मजिस्ट्रेट ने फटकार लगाई।
सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भ्रूण की जांच करते हुए डॉक्टर को रंगे हाथ दबोचा था
डॉ. अनिल शर्मा और मनीष को टीम ने पुलिस को सौंप दिया था
आरोपी चिकित्सक के दौराला स्थित सेंटर को भी किया सील
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मंगलवार को सिटी मजिस्ट्रेट एनपी सिंह और डिप्टी सीएमओ देवीदास के नेतृत्व में टीम सर्वहित अस्पताल पहुंची। इस दौरान उनके साथ थाना प्रभारी पल्लवपुरम सुभाष अत्री और चौकी प्रभारी उपेंद्र मलिक भी रहे। टीम ने सबसे पहले अल्ट्रासाउंड रूम को सील किया। रूम की चाभी न मिलने पर टीम ने रूम का लॉक तोड़कर पहले उसकी जांच की। जांच के दौरान पता चला कि यहां रजिस्ट्रेशन एक फिक्स अल्ट्रासाउंड मशीन और एक पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन का था, लेकिन मौके पर दोनों ही पोर्टेबल मशीन पायी गई। यहां से टीम ने सभी दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर रूम को सील कर दिया। इस दौरान डॉ. जेवी चिकारा, डॉ. विनोद और डॉ. ऋषि भाटिया मौजूद रहे। टीम ने रूम सीलकर उसकी चाभी डॉ. विनोद की सुपुर्दगी में दे दी। यहां से टीम डॉ. अनिल शर्मा के दौराला स्थित अल्ट्रासाउंड सेंटर पर गई, जहां ताला बंद मिलने पर टीम ने उसे भी सील कर दिया। डिप्टी सीएमओ डॉ. देवीदास ने बताया कि इस मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। आरोपियों के खिलाफ थाना पल्लवपुरम में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। अभी जांच चल रही है।
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अस्पताल पर भी हो सकती है कार्रवाई
मंगलवार को सर्वहित अस्पताल पहुंचे डिप्टी सीएमओ डॉ. देवीदास और सिटी मजिस्ट्रेट एनपी सिंह ने अस्पताल के चिकित्सक डॉ. जेवी चिकारा से अल्ट्रासाउंड सेंटर में चल रहे भ्रूण परीक्षण के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि ये सेंटर अस्पताल का नहीं है, बल्कि उन्होंने अनिल शर्मा को किराए पर सेंटर चलाने के लिए जगह दे रखी है। उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी कि सेंटर पर अवैध भ्रूण परीक्षण होता है। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने अस्पताल के चिकित्सकों को जमकर हड़काया और कहा कि यदि सेंटर उनके अस्पताल में चल रहा है तो उसकी जिम्मेदारी भी अस्पताल की है। सिटी मजिस्ट्रेट ने अस्पताल के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट को भी अपने कब्जे में ले लिया। उनका कहना है कि अस्पताल के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
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अल्ट्रासाउंड सेंटर में मरीजों के लिए मूलभूत सुविधाएं भी नहीं
स्वास्थ्य विभाग की टीम जब अस्पताल के बेसमेंट में बने अल्ट्रासाउंड सेंटर पर पहुंची तो उस कमरे में ताला लगा था। इस दौरान कमरे के बाहर ना तो कोई पंखा लगा था और ना ही पीने के पानी की कोई व्यवस्था थी। सिटी मजिस्ट्रेट ने अस्पताल संचालकों से पूछा की इतनी गर्मी है ऐसे में बिना पंखे व पानी के मरीज कैसे यहां अल्ट्रासाउंड कराते हैं, जिस पर अस्पताल संचालक चुप्पी साध गए। बाद में अल्ट्रासाउंड सेंटर का ताला तोड़ा गया तो उस कमरे में केवल एक पंखा लगा हुआ था। इसके अलावा अटैच टॉयलेट भी काफी गंदा था, जिसे देखकर सिटी मजिस्ट्रेट ने फटकार लगाई।
सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भ्रूण की जांच करते हुए डॉक्टर को रंगे हाथ दबोचा था
डॉ. अनिल शर्मा और मनीष को टीम ने पुलिस को सौंप दिया था
आरोपी चिकित्सक के दौराला स्थित सेंटर को भी किया सील