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गुरूकुल प्रभात आश्रम में संघोष्ठी का आयोजन
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वैदिक शोध संगोष्ठी का आयोजन
जानीखुर्द। गुरुकुल प्रभात आश्रम टीकरी भोला झाल में रविवार को स्वामी समर्पणानंद वैदिक शोध संस्थान द्वारा एक वैदिक शोध संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय ऐतरेय ब्राह्मण में विविध ज्ञान विज्ञान रहा।
गुरुकुल प्रभात आश्रम टीकरी में आयोजित वैदिक शोध संगोष्ठी के शुभारंभ में आश्रम के ब्रह्मचारियों ने सरस्वती वंदना और स्वागत गान से अथितियों का सम्मान किया। गोष्ठी की शुरूआत में अपना शोध पढ़ते हुए ओमप्रकश पांडेय ने विषय प्रर्वतन करते हुए कहा कि धर्म आस्था का विषय है। उसमें कोई तर्क नहीं किया जा सकता है। किंतु ब्राह्मण ग्रंथ यक्षीय प्रक्रियाओं हेतू प्रतिपादित करते हुए तर्क प्रस्तुत करता है। डॉ. निरंजन देव मंगलम ने स्वर्ग की कल्पना को वास्तविक बताते हुए छंदों के वैज्ञानिक स्वरूप को समझाया। डॉ. पंकज मिश्रा, प्रो. बलवीर आचार्य ने ऐतरेय ब्राह्मण में वर्णित राजनीतिक सिद्घातों को बताया तथा धर्म को संविधान तथा पुरोहित को राष्ट्र के संविधान विशेषज्ञ का प्रतीक माना। संस्थान के निदेशक प्रो. मानसिंह ने भागवत पुराणादि पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के समापन पर आश्रम के कुलापति स्वामी विवेकानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि धर्म का काम आपको दिशा प्रदान करना है। विज्ञान का काम प्रत्यक्षीकरण करना है। वेद ब्राह्मण ग्रंथ आपको दिशा प्रदान करते है। कार्यक्रम का संचालन वाचस्पति ने किया।
जानीखुर्द। गुरुकुल प्रभात आश्रम टीकरी भोला झाल में रविवार को स्वामी समर्पणानंद वैदिक शोध संस्थान द्वारा एक वैदिक शोध संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय ऐतरेय ब्राह्मण में विविध ज्ञान विज्ञान रहा।
गुरुकुल प्रभात आश्रम टीकरी में आयोजित वैदिक शोध संगोष्ठी के शुभारंभ में आश्रम के ब्रह्मचारियों ने सरस्वती वंदना और स्वागत गान से अथितियों का सम्मान किया। गोष्ठी की शुरूआत में अपना शोध पढ़ते हुए ओमप्रकश पांडेय ने विषय प्रर्वतन करते हुए कहा कि धर्म आस्था का विषय है। उसमें कोई तर्क नहीं किया जा सकता है। किंतु ब्राह्मण ग्रंथ यक्षीय प्रक्रियाओं हेतू प्रतिपादित करते हुए तर्क प्रस्तुत करता है। डॉ. निरंजन देव मंगलम ने स्वर्ग की कल्पना को वास्तविक बताते हुए छंदों के वैज्ञानिक स्वरूप को समझाया। डॉ. पंकज मिश्रा, प्रो. बलवीर आचार्य ने ऐतरेय ब्राह्मण में वर्णित राजनीतिक सिद्घातों को बताया तथा धर्म को संविधान तथा पुरोहित को राष्ट्र के संविधान विशेषज्ञ का प्रतीक माना। संस्थान के निदेशक प्रो. मानसिंह ने भागवत पुराणादि पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के समापन पर आश्रम के कुलापति स्वामी विवेकानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि धर्म का काम आपको दिशा प्रदान करना है। विज्ञान का काम प्रत्यक्षीकरण करना है। वेद ब्राह्मण ग्रंथ आपको दिशा प्रदान करते है। कार्यक्रम का संचालन वाचस्पति ने किया।
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