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दलित मुस्लिम गठबंधन ने भाजपा के छुड़ाये छक्के
Updated Sat, 02 Dec 2017 02:18 AM IST
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मुस्लिम-दलित गठबंधन ने भाजपा के छुड़ाए पसीने
मेरठ।
महानगर में दलित मुस्लिम गठबंधन ने भाजपा को सीधे टक्कर दी। यह टक्कर सिर्फ महापौर पद पर ही नहीं बल्कि पार्षद पदों पर भी साफ नजर आईं। महापौर पद पर जहां बसपा ने भाजपा को पटखनी दी, तो पार्षद पद पर भी 28 प्रत्याशी सीधे जिताने के साथ 20 वार्ड में दूसरे नंबर पर बसपा प्रत्याशियों की मौजूदगी ने अहसास करा दिया कि दलित-मुस्लिम गठबंधन आने वाले समय में भाजपा के लिए खतरे की घंटी बन सकता है।
महापौर पद पर मतदान के बाद ही तय हो गया था कि भाजपा और बसपा के बीच सीधा मुकाबला है। मतगणना में भी यह साफ नजर आया। हर चक्र की गणना में भाजपा और बसपा प्रत्याशियों के बीच ही मुख्य मुकाबला होता रहा। सपा, कांग्रेस या रालोद सहित अन्य कोई प्रत्याशी एक बार भी इन दोनों के आसपास नहीं फटका। इसका बड़ा कारण मुस्लिम मतों का लगभग 80 प्रतिशत बसपा के पक्ष में ध्रुवीकरण होने के साथ दलित वोटों का भी एकजुट होकर बसपा के पक्ष में जाना रहा।
इस गठबंधन की धूम ऐसी रही कि बसपा के निशान पर चुनाव लड़े पार्षद भी पहली बार बड़ी संख्या में जीतकर आये। बसपा ने भाजपा के 36 पार्षदों के बाद सबसे ज्यादा अपने 28 पार्षद जिताए। जबकि मुस्लिम वोटों की राजनीति करने वाली सपा मात्र 4 ही प्रत्याशी जिता सकी। निगम चुनाव का यह परिणाम भाजपा के लिए लोकसभा चुनाव में खतरे की घंटी है। क्योंकि मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर मुस्लिम और दलित यदि इसी तरह गठजोड़ कर गए तो भाजपा के लिए मुश्किल पैदा हो सकती है।
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खास बात
महापौर पद पर बसपा ने जीत के साथ पार्षद पद पर जिताए 28 प्रत्याशी
बसपा ने 20 वार्ड में दूसरे नंबर पर आकर दिखाई अपनी सधी रणनीति
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मेरठ।
महानगर में दलित मुस्लिम गठबंधन ने भाजपा को सीधे टक्कर दी। यह टक्कर सिर्फ महापौर पद पर ही नहीं बल्कि पार्षद पदों पर भी साफ नजर आईं। महापौर पद पर जहां बसपा ने भाजपा को पटखनी दी, तो पार्षद पद पर भी 28 प्रत्याशी सीधे जिताने के साथ 20 वार्ड में दूसरे नंबर पर बसपा प्रत्याशियों की मौजूदगी ने अहसास करा दिया कि दलित-मुस्लिम गठबंधन आने वाले समय में भाजपा के लिए खतरे की घंटी बन सकता है।
महापौर पद पर मतदान के बाद ही तय हो गया था कि भाजपा और बसपा के बीच सीधा मुकाबला है। मतगणना में भी यह साफ नजर आया। हर चक्र की गणना में भाजपा और बसपा प्रत्याशियों के बीच ही मुख्य मुकाबला होता रहा। सपा, कांग्रेस या रालोद सहित अन्य कोई प्रत्याशी एक बार भी इन दोनों के आसपास नहीं फटका। इसका बड़ा कारण मुस्लिम मतों का लगभग 80 प्रतिशत बसपा के पक्ष में ध्रुवीकरण होने के साथ दलित वोटों का भी एकजुट होकर बसपा के पक्ष में जाना रहा।
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इस गठबंधन की धूम ऐसी रही कि बसपा के निशान पर चुनाव लड़े पार्षद भी पहली बार बड़ी संख्या में जीतकर आये। बसपा ने भाजपा के 36 पार्षदों के बाद सबसे ज्यादा अपने 28 पार्षद जिताए। जबकि मुस्लिम वोटों की राजनीति करने वाली सपा मात्र 4 ही प्रत्याशी जिता सकी। निगम चुनाव का यह परिणाम भाजपा के लिए लोकसभा चुनाव में खतरे की घंटी है। क्योंकि मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर मुस्लिम और दलित यदि इसी तरह गठजोड़ कर गए तो भाजपा के लिए मुश्किल पैदा हो सकती है।
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खास बात
महापौर पद पर बसपा ने जीत के साथ पार्षद पद पर जिताए 28 प्रत्याशी
बसपा ने 20 वार्ड में दूसरे नंबर पर आकर दिखाई अपनी सधी रणनीति