{"_id":"59a72d844f1c1b5b738b47b6","slug":"121504128388-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कैंट बोर्ड बिना एनओसी हुई रजिस्ट्री की कर रहा जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कैंट बोर्ड बिना एनओसी हुई रजिस्ट्री की कर रहा जांच
Updated Thu, 31 Aug 2017 02:56 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेरठ। कैंट बोर्ड छावनी क्षेत्र में बिना एनओसी के पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर खरीदी और बेची गई संपत्तियों की जांच शुरू हो गई है। कुछ मामले इस तरह के सामने आए हैं। रजिस्ट्री विभाग के साथ मिलकर मामलों की जांच की जा रही है। ऐसे केसों में कार्रवाई की तैयारी है। भू उपयोग बदलकर संपत्ति बेची गई हैं।
हाईकोर्ट ने वर्ष 2009 में छावनी क्षेत्र में संपत्ति बिना कैंट बोर्ड के एनओसी के बेचने पर रोक लगा दी थी। बावजूद इसके संपत्ति खरीदने और बेचने का काम चलता रहा है। कुछ केस बड़े सामने आए हैं, जिनमें संपत्ति का भू उपयोग बदलकर पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर उनको बेच दिया गया। आवासीय से व्यावसायिक उपयोग कर दिया गया। कैंट बोर्ड की इसमें एनओसी आवश्यक थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
ओल्ड ग्रांट के बंगलों की जांच की गई तो उनमें भी कुछ केस ऐसे मिले हैं। अब बोर्ड बाजार में बेची गई ऐसी संपत्तियों की जांच कर रहा है। कैंट बोर्ड के सीईओ राजीव श्रीवास्तव का कहना है कि आबूलेन, सदर बाजार और बांबे बाजार में कई जगहों पर अवैध तरीके से संपत्ति बेचने की सूचनाएं हैं। इनकी जांच की जा रही है। संपत्ति बेचने के लिए कैंट बोर्ड की एनओसी जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति संपत्ति बेचना चाहता है तो वह नियम मुताबिक एनओसी लेकर बेच सकता है। कोई रोक नहीं है। बिना एनओसी और पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर खरीद फरोख्त गलत है। ऐसे मामलों में कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
खास बात
- आबूलेन, सदर और बांबे बाजार में बिना एनओसी के खरीदी और बेची गईं संपत्ति
- कैंट बोर्ड के सीईओ का कहना, संपत्ति बेचने के लिए बोर्ड की एनओसी जरूरी
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने वर्ष 2009 में छावनी क्षेत्र में संपत्ति बिना कैंट बोर्ड के एनओसी के बेचने पर रोक लगा दी थी। बावजूद इसके संपत्ति खरीदने और बेचने का काम चलता रहा है। कुछ केस बड़े सामने आए हैं, जिनमें संपत्ति का भू उपयोग बदलकर पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर उनको बेच दिया गया। आवासीय से व्यावसायिक उपयोग कर दिया गया। कैंट बोर्ड की इसमें एनओसी आवश्यक थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
विज्ञापन
ओल्ड ग्रांट के बंगलों की जांच की गई तो उनमें भी कुछ केस ऐसे मिले हैं। अब बोर्ड बाजार में बेची गई ऐसी संपत्तियों की जांच कर रहा है। कैंट बोर्ड के सीईओ राजीव श्रीवास्तव का कहना है कि आबूलेन, सदर बाजार और बांबे बाजार में कई जगहों पर अवैध तरीके से संपत्ति बेचने की सूचनाएं हैं। इनकी जांच की जा रही है। संपत्ति बेचने के लिए कैंट बोर्ड की एनओसी जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति संपत्ति बेचना चाहता है तो वह नियम मुताबिक एनओसी लेकर बेच सकता है। कोई रोक नहीं है। बिना एनओसी और पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर खरीद फरोख्त गलत है। ऐसे मामलों में कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
खास बात
- आबूलेन, सदर और बांबे बाजार में बिना एनओसी के खरीदी और बेची गईं संपत्ति
- कैंट बोर्ड के सीईओ का कहना, संपत्ति बेचने के लिए बोर्ड की एनओसी जरूरी