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हुनर के आगे उम्र भी पड़ी छोटी

Tue, 21 Aug 2018 02:48 AM IST
Updated Tue, 21 Aug 2018 02:48 AM IST
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हुनर के आगे उम्र भी पड़ी छोटी

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हुनर के आगे उम्र भी पड़ी छोटी
मेरठ। बढ़ती उम्र यानि बीमारियां, ढलता शरीर और खत्म होती जिंदगी। बुजुर्ग होने की ये निशानियां इशारा करती हैं कि इंसान की उम्र अब ढलने लगी है। शरीर कमजोर होने लगा है लेकिन शहर में कई ऐसे बुजुर्ग हैं जिन्होंने बढ़ती उम्र को भी मात दी है। उम्र के इस पड़ाव में भी कुछ बुजुर्ग युवाओं के समान कार्य करते हैं। बागवानी करते हैं, व्यायाम करके स्वयं को फिट रखते हैं और समाजसेवा व अपने शौक को पूरा वक्त देते हैं। युवा भी इन लोगों से इनकी फिटनेस का राज पूछकर उसे अपनाना चाहते हैं। विश्व सीनियर सिटीजन डे पर शहर के कुछ ऐसे ही एक्टिव बुजुर्गों की कहानी जिन्होंने हुनर और हौसले से उम्र को भी मात दी है।

युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है खन्ना
92 वर्षीय कृष्ण कुमार खन्ना स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी हैं। 92 साल की उम्र में भी कृष्ण कुमार खन्ना युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं। सिर्फ विचार नहीं बल्कि इनकी दिनचर्या और काम करने का जज्बा युवाओं को लुभाता है। कृष्ण कुमार पहल एक प्रयास से जुड़े हैं। हर रविवार संस्था के कार्य में जाकर सफाई अभियान में सक्रिय होते हैं। प्रतिदिन कोर्ट जाकर जज व वकीलों को समय पर कोर्ट आने के लिए प्रेरित करते हैं।
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नियमित व्यायाम रखता है स्वस्थ
राजकुमार बैंबी की उम्र 80 वर्ष हैं। मवाना शुगर मिल से सेवानिवृत्त राजकुमार बैंबी अभी भी पूरी तरह स्वस्थ हैं। सुबह 5 बजे उठकर व्यायाम करते व दौड़ लगाते हैं। नियमित दिनचर्या से ही राजकुमार बैंबी ने मधुमेह को भी नियंत्रित किया है। हर रविवार पहल में जाकर सेवा व सफाई कार्य करते हैं।
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हमारी सोच हमें बूढ़ा बनाती है
प्रवीन कुमार सिंघल बैंक ऑफ बड़ौदा से सेवानिवृत्त प्रबंधक हैं। 62 वर्षीय पीके सिंघल को बागवानी का शौक है। पहल एक प्रयास संस्था से जुड़कर लगातार सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं। हर सुबह 5 बजे उठकर व्यायाम करते हैं। वह कहते हैं अगर व्यक्ति अपनी सक्रियता को बरकरार रखे तो वो कभी बूढ़ा नहीं होता। उम्र हमें बूढ़ा नहीं बनाती बल्कि हमारी सोच हमें बूढ़ा बनाती है।


रिटायर्ड होने के बाद अब कर रहे समाज सेवा
मोदीपुरम। सीनियर सिटीजन वेलफेयर, जाट रेजीडेंट वेलफेयर से जुडे़ हुए है और इसके माध्यम से ही समाज सेवी के रुप में काम कर रहे है। अगर सब जगह पर स्वच्छता रहेगी तो बीमारी दूर होगी और अच्छा वातावरण रहेगा। इसलिए समाजिक कार्यों में भी लोगों को हिस्सा लेना चाहिए। बीपीएस अत्री रिटायर्ड, यूपी वेयर हाऊसिंग कारपोरेशन

बीमार की करते है मदद
नौकरी में समाज के लिए कोई समय नहीं मिलता है, चंद्रशेखर आजाद कृृषि यूनिवर्सिटी कानपुर से वैज्ञानिक के पद से 2008 में रिटायर्ड होने के बाद अब समाज सेवी का काम कर रहे है अगर कोई बीमार हो जाता है, तो उसकी मदद कर अस्पताल तक पहुंचा देते है और सीनियर सिटीजन के लिए भी समय-समय पर कार्य करते रहते है। ब्रह्मसिंह, रिटायर्ड प्रोफेसर विवि कानपुर

प्रतिदिन करते हैं योगा
मैं हरियाणा कृषि यूनिवर्सिटी में प्रधान वैज्ञानिक के पद से 2003 में रिटायर्ड होने के बाद लोगों की मदद करने का काम कर रहा हूं। प्रत्येक दिन योगा करने के साथ बच्चों की क्लास भी लेता हूं। साथ ही स्वच्छता अभियान के लिए लेागों को भी जागरुक करते है, जिससे सफाई अभियान भी जारी रहे। डॉ एसडी धीमान, रिटायर्ड प्रधान वैज्ञानिक

समाज को जागरूक करते है
मैं एमईएस में स्टोर ऑफिसर के पद से 1996 में रिटायर्ड हो गया था। इसके बाद समाज में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे है और सीनियर सिटीजन व अन्य समाज सेवी संस्थाओं से जुड़कर समाज को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे है। केके अग्रवाल, रिटायर्ड एमईएस स्टोर ऑफिसर



नौकरी से रिटायर्ड, पर बेजोड़ है हौसला
मेरठ। मवाना रोड यशोदाकुंज कॉलोनी निवासी राजवीर सिंह आर्मी से कर्नल पद से रिटायर हैं पर काम करने का जज्बा अभी भी बरकरार है। वह अन्ना अनशन में शामिल होने से लेकर, आर्गेनिक खेती व अन्य सामाजिक मुद्दों पर भी लोगों को जागरूक करते आ रहे हैं। कर्नल राजवीर सिंह बताते हैं कि 2010 में सेना से रिटायर्ड हो गए। उन्होंने 2012 में जूते-चप्पल नहीं पहनने का प्रण लिया और उसके बाद नंगे पैर ही समाज सेवा में लग गए। राजवीर सिंह के मुताबिक घर के बराबर में खाली प्लाट में उन्होंने आर्गेनिक खेती की हुई है। पपीता, भिंडी, बैंगन, करेला आदि सब्जियां उनकी क्यारी में हैं। शरीर का कुछ भाग पैरालाइज पड़ने पर भी वह सड़कों के गड्ढे भरने का काम कर रहे हैं। दिन में क्यारी में काम से लेकर, सड़कों पर गड्ढे, लोगों को सामाजिक मुद्दों पर जागरूक करने का काम है। पूरी दिन काम की आदत से उनका शरीर भी स्वस्थ रहता है और मन को तसल्ली मिलती है।

खास बातें:
- शहर में ऐसे कई बुजुर्ग हैं जिनके आगे उम्र ने भी टेके घुटने
- नियमित कामकाज और व्यायाम कर फिट है बुजुर्ग
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