106 वेबसाइट पर हो रही वन्य जीवों के अंगों की ई ट्रेडिंग, इंटरनेट की दुनिया में बड़ी डिमांड
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मुख्य वन संरक्षक मेरठ जोन मुकेश कुमार ने ऐसी 106 वेबसाइट की सूची उपलब्ध कराई, जिनको वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो की ओर से दुर्लभ जानवर और उनके अंगों को बेचा गया। कई प्रमुख कंपनियां इस तरह की ई ट्रेडिंग में शामिल हैं। इससे पता चलता है कि वन्य जीवों से जुड़ी ई ट्रेडिंग कितनी बड़े स्तर पर हो रही है। देश और विदेश में सप्लाई हो रही है। दुनिया के किसी भी कोने से ई ट्रेडिंग की जा सकती है। अभी इन वेबसाइट को सिर्फ नोटिस जारी किया है। इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी है। ई ट्रेडिंग पर नजर रखी जा रही है। वन्य जीवों के अंग नाम बदलकर और कोड वर्ड से बेचे जा रहे हैं। जंगली जीव से लेकर समुद्री जीव तक की खूब डिमांड है। डीसीसीबी ऑनलाइन ट्रेड करने वाली कंपनियों की जांच कर रही है।
55 भाषा में वेबसाइट पर जानकारी
आचार्य कालकी कृष्णन ने जो वेबसाइट बनाई है, वह 55 भाषाओं में डील करती है। 50 विदेशी भाषा में डील किया जाता है। इनमें आयरिश, जर्मन, जापानी, कोरियाई, चीनी, अरबी, थाई, इतालवी, नेपाली, पुर्तगाली आदि शामिल हैं। वेबसाइट पर जिस भाषा में चाहो डील करो। विदेशी ग्राहकों की सुविधा के हिसाब से विदेशी भाषाओं में जानकारी उपलब्ध कराई गई है।
देशी माल विदेशी कनेक्शन
वाइल्डलाइफ के मामलों में देशी माल विदेशी कनेक्शन सामने आ रहे हैं। पिछले दिनों डायरक्ट्रेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस की टीम ने मेरठ के सिविल लाइन में छापा मारकर रिटायर कर्नल देवेश कुमार विश्नोई के बेटे शूटर प्रशांत विश्नोई के खेल का खुलासा किया था। वन्य जीवों का मांस और अवैध हथियार बरामद किए थे। प्रशांत स्लोवेनिया से हथियार लाता था। प्रशांत उक्त ज्योतिष के भी टच में था। वन्य जीवों के अंगों की तस्करी में विदेशी कनेक्शन सामने आ रहे हैं। बाहर सप्लाई किए जा रहे हैं। ऑनलाइन ट्रेडिंग होने का मतलब यह काम धड़ल्ले से चल रहा है। कितने गिरोह या लोग इस काम में लगे हैं, यह जांच का विषय है।