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जिपं सदस्यों ने डीएम को सौंपा अविश्वास प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो/मऊ
Updated Thu, 20 Apr 2017 11:25 PM IST
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गुरुवार को कलेक्ट्रेट में जिला पंचायत अध्यक्ष के प्रति अविश्वास प्रस्ताव जिलाधिकारी को सौंपते जिला पंचायत सदस्य
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जिला पंचायत अध्यक्ष अंशा यादव के खिलाफ गुरुवार को अविश्वास प्रस्ताव जिला पंचायत सदस्यों ने जिलाधिकारी को सौंपा। जनपद के 34 जिला पंचायत सदस्यों में से अविश्वास प्रस्ताव पर 23 जिला पंचायत सदस्यों के हस्ताक्षर हैं। गुरुवार को इन सभी 23 सदस्यों ने जिलाधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर जिला पंचायत अध्यक्ष के प्रति अविश्वास जताया। प्रस्ताव में लिखा गया है कि जिला पंचायत अध्यक्ष अंशा यादव की कार्यप्रणाली संविधान व पंचायती राज प्रणाली के नियमों के प्रतिकूल है।
इनकी कार्यप्रणाली से पंचायती राज व्यवस्था विफल के कगार पर पहुंच गई है। कहा गया है कि अंशा यादव ‘‘उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम 1961’’ के प्राविधानों के अनुसार बोर्ड की बैठकें नहीं बुलाती हैं। समितियों की बैठक अधिनियम के उल्लिखित प्राविधानों के अनुसार नहीं होती। यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते करके स्वयं के लिए बेनामी गाड़ी जिला पंचायत कार्यालय से संबद्ध कर राजस्व को क्षति पहुंचा रही हैं। प्रस्ताव में कहा गया है कि राज्य वित्त आयोग योजना अंतर्गत 2016-17 में प्राप्त बजट को जिले के एक ही विकास खंड पर खर्च किया जा रहा है। जिसके चलते जिले के अन्य आठ विकास खंडों में जनहित के विकास कार्य अवरुद्ध हैं। जिला निधि की लगभग साढ़े चार लाख रुपये की क्षति कर राजस्व की हानि पहुंचाने की शिकायत की गई है।
अविश्वास प्रस्ताव पर आशीष, राजकुमार, प्रभावती देवी, उर्मिला, मोना, लालती देवी, रमेशचन्द, पहलवान चौहान, अवधेश कुमार बागी, देवेंद्र, जयेंद्र, अमरनाथ चौहान, संजय यादव, नेहाल अहमद, मेवाती, सुभाष यदुवंशी, देवनाथ यादव, शीला, फूला देवी, संगीता, चिंता यादव, अमृता सिंह सहित 23 जिला पंचायत सदस्यों ने हस्ताक्षर किया। जिला पंचायत सदस्यों का रुख देखते हुये जिलाधिकारी ने पंचायत राज अधिनियम की नवीनतम गाइड लाइन मंगाया। डीएम निखिलचंद्र शुक्ला ने बताया कि गुरुवार को सदस्यों ने पत्रक सौंपा है। 15 दिन बाद और 30 दिन के अंदर किसी तिथि को तय करके इस बिंदु पर बहस कराई जाएगी। डीएम ने बताया कि दो दिन के अंदर संबंधित सदस्यों के संग अधिकारियों को पत्र जारी कर दिया जाएगा।
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इनकी कार्यप्रणाली से पंचायती राज व्यवस्था विफल के कगार पर पहुंच गई है। कहा गया है कि अंशा यादव ‘‘उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम 1961’’ के प्राविधानों के अनुसार बोर्ड की बैठकें नहीं बुलाती हैं। समितियों की बैठक अधिनियम के उल्लिखित प्राविधानों के अनुसार नहीं होती। यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते करके स्वयं के लिए बेनामी गाड़ी जिला पंचायत कार्यालय से संबद्ध कर राजस्व को क्षति पहुंचा रही हैं। प्रस्ताव में कहा गया है कि राज्य वित्त आयोग योजना अंतर्गत 2016-17 में प्राप्त बजट को जिले के एक ही विकास खंड पर खर्च किया जा रहा है। जिसके चलते जिले के अन्य आठ विकास खंडों में जनहित के विकास कार्य अवरुद्ध हैं। जिला निधि की लगभग साढ़े चार लाख रुपये की क्षति कर राजस्व की हानि पहुंचाने की शिकायत की गई है।
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अविश्वास प्रस्ताव पर आशीष, राजकुमार, प्रभावती देवी, उर्मिला, मोना, लालती देवी, रमेशचन्द, पहलवान चौहान, अवधेश कुमार बागी, देवेंद्र, जयेंद्र, अमरनाथ चौहान, संजय यादव, नेहाल अहमद, मेवाती, सुभाष यदुवंशी, देवनाथ यादव, शीला, फूला देवी, संगीता, चिंता यादव, अमृता सिंह सहित 23 जिला पंचायत सदस्यों ने हस्ताक्षर किया। जिला पंचायत सदस्यों का रुख देखते हुये जिलाधिकारी ने पंचायत राज अधिनियम की नवीनतम गाइड लाइन मंगाया। डीएम निखिलचंद्र शुक्ला ने बताया कि गुरुवार को सदस्यों ने पत्रक सौंपा है। 15 दिन बाद और 30 दिन के अंदर किसी तिथि को तय करके इस बिंदु पर बहस कराई जाएगी। डीएम ने बताया कि दो दिन के अंदर संबंधित सदस्यों के संग अधिकारियों को पत्र जारी कर दिया जाएगा।
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