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बदली लाइफ स्टाइल से मधुमेह की चपेट में आ रहे हैं युवा

Sat, 13 Nov 2021 11:12 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 13 Nov 2021 11:12 PM IST
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Young people are coming in the grip of diabetes due to changed lifestyle
मऊ। मधुमेह जिसे 40 वर्ष की बाद की बीमारी मानी जाती है, लेकिन अब यह 30 वर्ष के युवाओं में देखने को मिल रहा है। जहां पहले पहले युवाओं में इस बीमारी का ग्राफ दो फीसदी तक देखने को मिलता था, अब यह ग्राफ दस फीसदी से ज्यादा पहुंच गया है। वहीं दस फीसदी युवा प्री डाइबिटिक स्टेज में है।जिसे अगर इन युवाओं द्वारा समय रहते उपचार यह इसके रोकथाम का प्रयास नहीं किया गया यह मधुमेह का रूप ले सकता है। चिकित्सक इसके पीछे बदली लाइफ स्टाइल मुख्य वजह मानते है।
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गैर संचारी बीमारियों के मरीजों के उपचार के लिए जिला अस्पताल तथा पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में संचालित एनसीडी क्लीनिक के नोडल अधिकारी डॉ. बीके यादव बताते है कि एनसीडी क्लीनिक में पहुंचने वाले मरीजों में 30 फीसदी मरीज मधुमेह के होते है। वहीं इतनी ही संख्या में करीब मरीज ओपीडी में दूसरे चिकित्सकों के पास उपचार कराने पहुंचते है। बोले कि आधुनिकता के इस दौर में यह बीमारी अब युवाओं को अपने चपेट में ले रही है। आमतौर पर पहले यह बीमारी 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में देखने को मिलती थी। लेकिन अब इससे 30 वर्ष के युवा भी अछूते नहीं है। जिला अस्पताल में संचालित एनसीडी क्लीनिक में 2019 में 38 हजार से ज्यादा मरीजों में चार हजार मरीज मधुमेह के मिले थे। इसमें 40 वर्ष से कम उम्र के मरीजों की संख्या 350 थी। वहीं 2020 में 290 जबकि 2021 में अब तक 340 युवा मधुमेह रोग की गिरफ्त में आ चुके है। इतना ही नहीं हर वर्ष पांच सौं से ज्यादा युवा प्री डाइबिटिक स्टेज होना पाया गया है।
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शुगर की बीमारी के प्राथमिक लक्षण
मऊ। नगर के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. संजय सिंह ने बताया कि आरामतलब जिंदगी जीने का आदी आज का युवा वर्ग हो गया है। इसी के चलते कब वह ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हार्ट डिसीज की चपेट में आ जाता है पता ही नहीं चलता इसलिए बीमारी से ग्रसित रोगियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। यदि युवाओं ने अपनी जीवन शैली में बदलाव नहीं लाया तो स्थिति और भयावह होने की संभावना है। वहीं फिजिशियन डॉ. राहुल राय ने बताया आरामदायक जीवनशैली, मानसिक तनाव, अधिक वसायुक्त या कैलोरीयुक्त भोजन, मध्य भाग का मोटापा आदि इस बीमारी का मुख्य कारण हो सकता है। कहा कि इस बीमारी का लक्षण अधिक भूख लगना या प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, वजन गिरना, घाव या फोड़े का जल्द ठीक न होना आदि है।
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