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दो लाख बच्चों को पिलाई जाएगी विटामिन ए की खुराक
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मऊ। जिले में 28 अगस्त 2021 तक चलने वाले बाल स्वास्थ्य पोषण माह के दौरान 2.84 लाख बच्चों को विटामिन ए पिलाने का लक्ष्य निर्धारित है। इसी के तहत जनपद के सभी 225 बूथों पर प्रति सप्ताह के दो दिनों में बुधवार और शनिवार को 9 माह से 5 वर्ष के बच्चों को विटामिन-ए की खुराक पिलाई जा रही है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ श्याम नरायन दुबे ने बताया कि विटामिन-ए एक ऐसा जरूरी विटामिन है, जो शरीर खुद नहीं बना सकता है, इसलिए आहार में विटामिन-ए युक्त चीजों को शामिल करना जरूरी है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण भी हैं जो इम्यून सिस्टम को स्वस्थ बनाए रखते हैं। दिल, फेफड़ों, किडनी और अन्य अंगों के कार्य में विटामिन-ए मददगार है।
डॉ. श्याम नरायन दुबे ने बताया कि संतुलित आहार की कमी या लीवर से जुड़े विकारों के कारण विटामिन-ए की कमी हो सकती है। शरीर में विटामिन कम होने पर हल्की थकान, रूखी त्वचा, रैशेज, रूखे बाल, बाल झड़ने, बार-बार इंफेक्शन होना, एनीमिया का अधिक खतरा, धीमा विकास होना, गले और छाती में इंफेक्शन, घाव न भरने जैसे संकेत मिलते हैं।
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जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ बीके यादव ने बताया कि जिले के दूर दराज गावों, मलीन बस्तियों के अभावग्रस्त बच्चों में विटामिन-ए की कमी को पूरा करने के लिये, प्रदेश सरकार के निर्देश पर बाल स्वास्थ्य पोषण माह 28 अगस्त तक चलेगा। इसमें नौ माह से पांच वर्ष तक के सभी बच्चों को प्रत्येक सप्ताह में निर्धारित दो दिनों बुधवार तथा शनिवार को जिले के 225 बूथों पर इस एक अभियान के दौरान लगभग 2,84,165 बच्चों को विटामिन-ए की खुराक पिलाये जाने का लक्ष्य है। डिस्ट्रिक कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर डीसीपीएम संतोष कुमार सिंह ने बताया कि लक्ष्य के लगभग 70 प्रतिशत तक बच्चों को विटामिन-ए की खुराक पिलाई जा चुकी है।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ श्याम नरायन दुबे ने बताया कि विटामिन-ए एक ऐसा जरूरी विटामिन है, जो शरीर खुद नहीं बना सकता है, इसलिए आहार में विटामिन-ए युक्त चीजों को शामिल करना जरूरी है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण भी हैं जो इम्यून सिस्टम को स्वस्थ बनाए रखते हैं। दिल, फेफड़ों, किडनी और अन्य अंगों के कार्य में विटामिन-ए मददगार है।
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डॉ. श्याम नरायन दुबे ने बताया कि संतुलित आहार की कमी या लीवर से जुड़े विकारों के कारण विटामिन-ए की कमी हो सकती है। शरीर में विटामिन कम होने पर हल्की थकान, रूखी त्वचा, रैशेज, रूखे बाल, बाल झड़ने, बार-बार इंफेक्शन होना, एनीमिया का अधिक खतरा, धीमा विकास होना, गले और छाती में इंफेक्शन, घाव न भरने जैसे संकेत मिलते हैं।
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जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ बीके यादव ने बताया कि जिले के दूर दराज गावों, मलीन बस्तियों के अभावग्रस्त बच्चों में विटामिन-ए की कमी को पूरा करने के लिये, प्रदेश सरकार के निर्देश पर बाल स्वास्थ्य पोषण माह 28 अगस्त तक चलेगा। इसमें नौ माह से पांच वर्ष तक के सभी बच्चों को प्रत्येक सप्ताह में निर्धारित दो दिनों बुधवार तथा शनिवार को जिले के 225 बूथों पर इस एक अभियान के दौरान लगभग 2,84,165 बच्चों को विटामिन-ए की खुराक पिलाये जाने का लक्ष्य है। डिस्ट्रिक कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर डीसीपीएम संतोष कुमार सिंह ने बताया कि लक्ष्य के लगभग 70 प्रतिशत तक बच्चों को विटामिन-ए की खुराक पिलाई जा चुकी है।