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सरकार की किसान विरोधी नीति से बढ़ रही बेरोजगारी
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श्रम कानूनों में बदलाव वाले अध्यादेश वापस लेने की मांग दोहराई
किसान संगठनों के कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा
अमर उजाला ब्यूरो
मऊ। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के केंद्रीय नेतृत्व के आह्वान पर किसान संगठनों के कार्यकर्ताओं ने श्रम कानूनों में बदलाव वाले अध्यादेश वापस लेने, डीजल पेट्रोल के दाम आधा करने, नया बिजली कानून 2020 प्रस्ताव वापस लेने आदि मांगों को लेकर सोमवार को कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। इस दौरान राष्ट्रपति को संबोधित मांग पत्र जिलाधिकारी को सौंपा।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लॉकडाउन अवधि के दौरान मोदी सरकार ऐसे बहुत से निर्णय लिए हैं जो देसी विदेशी कंपनियों समेत कारपोरेट को बहुत लाभ पहुंचाएगा। देश की 69 फ़ीसदी जनसंख्या गांव में रहती है। 50 फ़ीसदी हिस्सा खेती पर निर्भर है। देश में करीब 15 करोड़ खेती करते हैं। इसमें 86 फीसदी छोटे व सीमांत किसान हैं। जबकि पांच एकड़ से कम खेती और परिवारों में से बड़ा हिस्सा 50 फिसदी भूमिहीन किसानों का बड़ा हिस्सा आवश्यकतानुसार आधारित खेती करता है, इनकी बड़ी आबादी दलितों आदिवासी परिवार की हैं,गांव में काम न मिलने के कारण करीब आठ करोड़ लोग शहरों में पलायन कर काम करते हैं। सरकार की किसान विरोधी नीति के कारण बेरोजगारी की बढ़ती समस्या को हल करने का एकमात्र तरीका है कि खेती किसानी लाभकारी बने ताकि किसानों के बच्चे खेती में रुचि लें।
अंत में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को संबोधित मांग पत्र खेती की बर्बादी के तीनों अध्यादेश वापस लेने, श्रम कानूनों में बदलाव वाले अध्यादेश वापस लेने, डीजल पेट्रोल के दाम आधा करने, नया बिजली कानून 2020 प्रस्ताव वापस लेने आदि का मांगपत्र जिलाधिकारी को सौंपा। प्रदर्शन करने वालों में राम अवतार सिंह, शेर मोहम्मद, राम कुमार भारती,राननवल, देवेंद्र मिश्रा, शिवमूरत गुप्ता, गुफरान, हिसामुद्दीन, वीरेंद्र कुमार, मदन लाल श्रीवास्तव आदि शामिल रहे।
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किसान संगठनों के कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा
अमर उजाला ब्यूरो
मऊ। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के केंद्रीय नेतृत्व के आह्वान पर किसान संगठनों के कार्यकर्ताओं ने श्रम कानूनों में बदलाव वाले अध्यादेश वापस लेने, डीजल पेट्रोल के दाम आधा करने, नया बिजली कानून 2020 प्रस्ताव वापस लेने आदि मांगों को लेकर सोमवार को कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। इस दौरान राष्ट्रपति को संबोधित मांग पत्र जिलाधिकारी को सौंपा।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लॉकडाउन अवधि के दौरान मोदी सरकार ऐसे बहुत से निर्णय लिए हैं जो देसी विदेशी कंपनियों समेत कारपोरेट को बहुत लाभ पहुंचाएगा। देश की 69 फ़ीसदी जनसंख्या गांव में रहती है। 50 फ़ीसदी हिस्सा खेती पर निर्भर है। देश में करीब 15 करोड़ खेती करते हैं। इसमें 86 फीसदी छोटे व सीमांत किसान हैं। जबकि पांच एकड़ से कम खेती और परिवारों में से बड़ा हिस्सा 50 फिसदी भूमिहीन किसानों का बड़ा हिस्सा आवश्यकतानुसार आधारित खेती करता है, इनकी बड़ी आबादी दलितों आदिवासी परिवार की हैं,गांव में काम न मिलने के कारण करीब आठ करोड़ लोग शहरों में पलायन कर काम करते हैं। सरकार की किसान विरोधी नीति के कारण बेरोजगारी की बढ़ती समस्या को हल करने का एकमात्र तरीका है कि खेती किसानी लाभकारी बने ताकि किसानों के बच्चे खेती में रुचि लें।
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अंत में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को संबोधित मांग पत्र खेती की बर्बादी के तीनों अध्यादेश वापस लेने, श्रम कानूनों में बदलाव वाले अध्यादेश वापस लेने, डीजल पेट्रोल के दाम आधा करने, नया बिजली कानून 2020 प्रस्ताव वापस लेने आदि का मांगपत्र जिलाधिकारी को सौंपा। प्रदर्शन करने वालों में राम अवतार सिंह, शेर मोहम्मद, राम कुमार भारती,राननवल, देवेंद्र मिश्रा, शिवमूरत गुप्ता, गुफरान, हिसामुद्दीन, वीरेंद्र कुमार, मदन लाल श्रीवास्तव आदि शामिल रहे।
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