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व्रत शुरू, अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य आज
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Mon, 16 Nov 2015 11:41 PM IST
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छठ का व्रत रखने वाली महिलाओं ने सोमवार को खरना रखा। सोमवार को खीर और पूरी से व्रत का शुभारंभ किया। मंगलवार को महिलाएं घाटों पर जाकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी। और पुत्रों की मंगलकामना और प्राप्ती के लिए महिलाएं वरदान मांगेंगी।
नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में डाला छठ की तैयारी पूरी हो गई। नगर के गाजीपुर तिराहा, सहादतपुरा सहित विभिन्न बाजारों में जगह-जगह फलों व पूजा के सामान के स्टाल लग जाने से देर शाम तक गहमागहमी रही। स्टालों पर भक्तिगीतों के बजने से माहौल भक्तिमय हो गया है।
पोखरों, तालाबों पर सामूहिक रूप से लोग सफाई करने में लोग लगे रहे। घाटों पर वेदियां आदि बनाने का कार्य अंतिम दौर में चला। बताया जाता है कि सबसे पहले यह व्रत जगत जननी माता सीता ने भगवान भाष्कर से पुत्र रत्न की कामना से की था। एक अन्य मान्यता के अनुसार छठ पर्व की शुरूआत महाभारत काल में हुई थी।
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सबसे पहले सूर्य पुत्र कर्ण ने सूर्य देव की पूजा शुरू की। कर्ण भगवान सूर्य के पुत्र और परम भक्त थे। और प्रतिदिन सूर्य को अर्घ्य देते थे। सूर्य की कृपा से ही वह महान योद्धा बने। आज भी छठ में अर्घ्य दान की यही पद्धति प्रचलित है। कुछ कथाओं में पांडवों की पत्नी द्रोपदी द्वारा भी सूर्य की पूजा का उल्लेख है।
वे अपने परिवारीजन के उत्तम स्वास्थ्य की कामना और लंबी उम्र के लिए नियमित सूर्य पूजा करती थीं। इन्हीं मान्यताओं के तहत पुत्रों की मंगलकामना का पर्व डाला छठ मंगलवार को धूमधाम से मनाया जाएगा।
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नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में डाला छठ की तैयारी पूरी हो गई। नगर के गाजीपुर तिराहा, सहादतपुरा सहित विभिन्न बाजारों में जगह-जगह फलों व पूजा के सामान के स्टाल लग जाने से देर शाम तक गहमागहमी रही। स्टालों पर भक्तिगीतों के बजने से माहौल भक्तिमय हो गया है।
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पोखरों, तालाबों पर सामूहिक रूप से लोग सफाई करने में लोग लगे रहे। घाटों पर वेदियां आदि बनाने का कार्य अंतिम दौर में चला। बताया जाता है कि सबसे पहले यह व्रत जगत जननी माता सीता ने भगवान भाष्कर से पुत्र रत्न की कामना से की था। एक अन्य मान्यता के अनुसार छठ पर्व की शुरूआत महाभारत काल में हुई थी।
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सबसे पहले सूर्य पुत्र कर्ण ने सूर्य देव की पूजा शुरू की। कर्ण भगवान सूर्य के पुत्र और परम भक्त थे। और प्रतिदिन सूर्य को अर्घ्य देते थे। सूर्य की कृपा से ही वह महान योद्धा बने। आज भी छठ में अर्घ्य दान की यही पद्धति प्रचलित है। कुछ कथाओं में पांडवों की पत्नी द्रोपदी द्वारा भी सूर्य की पूजा का उल्लेख है।
वे अपने परिवारीजन के उत्तम स्वास्थ्य की कामना और लंबी उम्र के लिए नियमित सूर्य पूजा करती थीं। इन्हीं मान्यताओं के तहत पुत्रों की मंगलकामना का पर्व डाला छठ मंगलवार को धूमधाम से मनाया जाएगा।