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मऊ की साड़ी को ब्रांड बनाने की कवायद
mau
Updated Fri, 08 Jun 2018 12:38 AM IST
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संस्कृत पाठशाला मोहल्ले में लूम पर साड़ी की बुनाई करता कारीगर।
- फोटो : mau
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जिला प्रशासन की तरफ से मऊ की साड़ी को ब्रांड बनाने की कवायद तेज हो गई है। योजना के क्रियान्वयन के लिए विभागीय अधिकारियों ने बुनकरों, उद्यमियों सहित विभिन्न संगठनों से प्रस्ताव मांगा है। प्रदेश सरकार ने एक जिला एक उत्पाद योजना लागू की है। लेकिन तीन माह बाद भी योजना को अंतिम रुप नहीं दिया जा सका है। शुक्रवार को डीएम की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में योजना को अंतिम रूप दिया जाना है।
मऊ नगर, घोसी, कोपागंज, अदरी, मुहम्मदाबादगोहना सहित विभिन्न क्षेत्रों में काफी संख्या में बुनकर हैं। एक जमाना था जब मऊ की बनी साड़ियां देश में अपनी एक खास पहचान बनाए थीं। लेकिन विभागीय उपेक्षा के चलते बुनाई उद्योग अंतिम सांस गिन रहा है। प्रदेश सरकार की तरफ से तीन माह पूर्व जिले में खास उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए एक जिला एक उत्पाद योजना लागू की। लेकिन क्रियान्वयन की गति काफी धीमी होने के चलते अभी तक योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है।
प्रशासन ने मऊ की साड़ी को चुना है। मऊवाली साड़ी को ब्रांड बनाने के लिए पावरलूम टेक्सटाइल से जुड़े बुनकरों, उद्यमियों, व्यापारिक संगठनों सहित विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों से प्रस्ताव मांगा गया है।
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नोडल अधिकारी तथा जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक प्रवीण कुमार मौर्य की मानें तो मऊ की साड़ी को ब्रांड बनाने के लिए प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना, मुद्रा योजना, स्टैंडअप, स्टार्ट अप सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से बुनकरों तथा उद्यमियों को आधुनिक तकनीकी से लैस किया जाएगा।
हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग की तरफ से जिले में चल रहे पावरलूमों तथा बुनकरों के संबंध में आंकड़ा जुटाने के लिए सर्वे किया जा रहा है। सर्वे में बिजली विभाग का सहयोग लिया जाएगा। विभागीय आंकड़ों में 40 हजार पावरलूम तथा 1.67 लाख बुनकर बताए गए हैं। विभागीय उपेक्षा के चलते हैंडलूम की संख्या नाम मात्र रह गई है। आठ जून को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक होगी। इस बैठक में जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक, आयुक्त एवं निदेशक हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग सहित विभागीय अधिकारी शामिल होंगे।
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मऊ नगर, घोसी, कोपागंज, अदरी, मुहम्मदाबादगोहना सहित विभिन्न क्षेत्रों में काफी संख्या में बुनकर हैं। एक जमाना था जब मऊ की बनी साड़ियां देश में अपनी एक खास पहचान बनाए थीं। लेकिन विभागीय उपेक्षा के चलते बुनाई उद्योग अंतिम सांस गिन रहा है। प्रदेश सरकार की तरफ से तीन माह पूर्व जिले में खास उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए एक जिला एक उत्पाद योजना लागू की। लेकिन क्रियान्वयन की गति काफी धीमी होने के चलते अभी तक योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है।
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प्रशासन ने मऊ की साड़ी को चुना है। मऊवाली साड़ी को ब्रांड बनाने के लिए पावरलूम टेक्सटाइल से जुड़े बुनकरों, उद्यमियों, व्यापारिक संगठनों सहित विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों से प्रस्ताव मांगा गया है।
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नोडल अधिकारी तथा जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक प्रवीण कुमार मौर्य की मानें तो मऊ की साड़ी को ब्रांड बनाने के लिए प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना, मुद्रा योजना, स्टैंडअप, स्टार्ट अप सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से बुनकरों तथा उद्यमियों को आधुनिक तकनीकी से लैस किया जाएगा।
हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग की तरफ से जिले में चल रहे पावरलूमों तथा बुनकरों के संबंध में आंकड़ा जुटाने के लिए सर्वे किया जा रहा है। सर्वे में बिजली विभाग का सहयोग लिया जाएगा। विभागीय आंकड़ों में 40 हजार पावरलूम तथा 1.67 लाख बुनकर बताए गए हैं। विभागीय उपेक्षा के चलते हैंडलूम की संख्या नाम मात्र रह गई है। आठ जून को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक होगी। इस बैठक में जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक, आयुक्त एवं निदेशक हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग सहित विभागीय अधिकारी शामिल होंगे।