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Mau News: जो बेगुनाह थे उनको कड़ी सजाएं मिली...
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मऊ। नगर के जीवनराम छात्रावास के मैदान में तमसा साहित्य लोक मंच और खादी ग्रामोद्योग विकास समिति द्वारा बुधवार की देर शाम काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ। इसमें साहित्यकारों और कवियों ने अपनी कविताओं से लोगों का मन मोह लिया।
साहित्यकार डा. जयप्रकाश धूमकेतू ने कार्यक्रम की शुरुआत की। गीतकार राघवेंद्र सिंह ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। शशिकांत वर्मा ने राधे-राधे नाम जो है, वो वृंदावन की शान है सुनाकर श्रोताओं को भक्तिमय कर दिया। कुंवर तूफान सिंह ने ''तुम उम्मीद न पालो बदलते इस जमाने में'' और जयहिंद सिंह ने बुलडोजर पर कविता सुनाई। मलका तरन्नुम ने जो बेगुनाह थे उनको कड़ी सजाएं मिलीं, पंक्ति से आज की न्याय व्यवस्था पर चोट की।
पुरुषार्थ सिंह ने'' ऊधौ से कह के राधा ने हर हाल कह सुनाया'' और जितेंद्र मिश्र ''काका'' ने जिंदगी की जंग हारी जाने दो अच्छा हुआ, राघवेंद्र सिंह ने ''कई दिनों से गंध भात की देती नहीं रसोई'', जयप्रकाश धूमकेतु ने ''आदमी होना न होना आपकी मर्जी'' सुनाकर श्रोताओं का मन मोह लिया।
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गोष्ठी का संचालन बृजेश गिरि ने किया। इस अवसर पर अखिलेश सिंह, हौसला उपाध्याय, सुमन उपाध्याय, संतोष सिंह, अनिल श्रीवास्तव, पारसमणि सिंह आदि लोग उपस्थित रहे।
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साहित्यकार डा. जयप्रकाश धूमकेतू ने कार्यक्रम की शुरुआत की। गीतकार राघवेंद्र सिंह ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। शशिकांत वर्मा ने राधे-राधे नाम जो है, वो वृंदावन की शान है सुनाकर श्रोताओं को भक्तिमय कर दिया। कुंवर तूफान सिंह ने ''तुम उम्मीद न पालो बदलते इस जमाने में'' और जयहिंद सिंह ने बुलडोजर पर कविता सुनाई। मलका तरन्नुम ने जो बेगुनाह थे उनको कड़ी सजाएं मिलीं, पंक्ति से आज की न्याय व्यवस्था पर चोट की।
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पुरुषार्थ सिंह ने'' ऊधौ से कह के राधा ने हर हाल कह सुनाया'' और जितेंद्र मिश्र ''काका'' ने जिंदगी की जंग हारी जाने दो अच्छा हुआ, राघवेंद्र सिंह ने ''कई दिनों से गंध भात की देती नहीं रसोई'', जयप्रकाश धूमकेतु ने ''आदमी होना न होना आपकी मर्जी'' सुनाकर श्रोताओं का मन मोह लिया।
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गोष्ठी का संचालन बृजेश गिरि ने किया। इस अवसर पर अखिलेश सिंह, हौसला उपाध्याय, सुमन उपाध्याय, संतोष सिंह, अनिल श्रीवास्तव, पारसमणि सिंह आदि लोग उपस्थित रहे।