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इस बार भी नहीं बनेगा लगातार दो बार जीतने का रिकार्ड
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मुहम्मदाबाद गोहना विधानसभा क्षेत्र में विगत 45 सालों से हुए कुल 11 विधानसभा चुनावों में लगातार दो बार विधायक नहीं बनने का रिकॉर्ड इस बार भी कायम रहेगा। भारतीय जनता पार्टी के निवर्तमान विधायक का 2022 में टिकट काट देने के बाद यह अनचाहा रिकॉर्ड एक बार फिर से कायम रह सकता है।
मुहम्मदाबाद गोहना विधानसभा क्षेत्र से 1977 के विस चुनाव में शिव प्रसाद यहां से विधायक बने लेकिन 1980 में उनकी जगह कामरेड तपेश्वर राम विधायक चुने गए। पांच साल बाद 1985 के विधानसभा चुनाव में तपेश्वर राम की जगह रामबदन एडवोकेट विधायक बने तो 1989 में एक बार फिर से उनके स्थान पर बसपा के फौजदार प्रसाद विधायक बन गए। 1991 में फौजदार प्रसाद भी चुनाव हार गए और भारतीय जनता पार्टी भाजपा के श्रीराम सोनकर पहली बार क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने में सफल हुए। लेकिन वह भी 1993 के चुनाव में अपनी जीत दोहरा नहीं सके और इस बार फिर उनके स्थान पर फौजदार प्रसाद विधायक बन गए। 1996 के चुनाव जीत की बाजी श्रीराम सोनकर के हाथ लगी और फौजदार प्रसाद लगातार दो बार विधायक चुने जाने से वंचित रह गए। 2002 में श्री राम सोनकर की जगह बैजनाथ पासवान विधायक बन गए तो 2007 में बसपा के राजेंद्र कुमार ने जीत दर्ज की। 2012 में राजेंद्र कुमार चुनाव मैदान में रहे जरूर लेकिन जीत हासिल नहीं हुई और इस बार बाजी बैजनाथ पासवान के हाथ लगी। 2017 में बैजनाथ पासवान चुनाव मैदान उतरे लेकिन बाजी पलटते हुए श्रीराम सोनकर यहां से विधायक चुन लिए गए। 2022 के चुनाव में अब श्री राम सोनकर चुनाव मैदान से ही बाहर हो गए हैं ऐसे में लगातार दो बार विधायक बनने का रिकॉर्ड सम्भवत: इस बार भी नहीं बन सकेगा।
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मुहम्मदाबाद गोहना विधानसभा क्षेत्र से 1977 के विस चुनाव में शिव प्रसाद यहां से विधायक बने लेकिन 1980 में उनकी जगह कामरेड तपेश्वर राम विधायक चुने गए। पांच साल बाद 1985 के विधानसभा चुनाव में तपेश्वर राम की जगह रामबदन एडवोकेट विधायक बने तो 1989 में एक बार फिर से उनके स्थान पर बसपा के फौजदार प्रसाद विधायक बन गए। 1991 में फौजदार प्रसाद भी चुनाव हार गए और भारतीय जनता पार्टी भाजपा के श्रीराम सोनकर पहली बार क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने में सफल हुए। लेकिन वह भी 1993 के चुनाव में अपनी जीत दोहरा नहीं सके और इस बार फिर उनके स्थान पर फौजदार प्रसाद विधायक बन गए। 1996 के चुनाव जीत की बाजी श्रीराम सोनकर के हाथ लगी और फौजदार प्रसाद लगातार दो बार विधायक चुने जाने से वंचित रह गए। 2002 में श्री राम सोनकर की जगह बैजनाथ पासवान विधायक बन गए तो 2007 में बसपा के राजेंद्र कुमार ने जीत दर्ज की। 2012 में राजेंद्र कुमार चुनाव मैदान में रहे जरूर लेकिन जीत हासिल नहीं हुई और इस बार बाजी बैजनाथ पासवान के हाथ लगी। 2017 में बैजनाथ पासवान चुनाव मैदान उतरे लेकिन बाजी पलटते हुए श्रीराम सोनकर यहां से विधायक चुन लिए गए। 2022 के चुनाव में अब श्री राम सोनकर चुनाव मैदान से ही बाहर हो गए हैं ऐसे में लगातार दो बार विधायक बनने का रिकॉर्ड सम्भवत: इस बार भी नहीं बन सकेगा।
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