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मासूम खिलखिलाहटों के लिए काल न बन जाए ये जर्जर भवन

Tue, 12 Oct 2021 12:15 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 12 Oct 2021 12:15 AM IST
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This dilapidated building should not become a time for innocent smiles
मऊ। नगर सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों के परिषदीय विद्यालयों के कैंपस में निष्प्रयोज्य जर्जर भवन दुर्घटना को दावत दे रहे हैं। अवकाश के बाद कई बच्चे जर्जर भवनों के पास खेलते देखे जाते हैं। अभिभावक भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर दहशतजदा हैं। उन्हें हमेशा यह आशंका बनी रहती है कि स्कूल के जर्जर भवन कहीं उनके बच्चों की किलकारियों को दबा न दे।
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बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से स्कूल कैंपस में 76 निष्प्रयोज्य (बेकार) जर्जर भवनों का मूल्यांकन करने के लिए एक वर्ष पूर्व शासन से गठित तीन सदस्यीय टीम को पत्र भेजा, लेकिन टीम की उदासीनता के चलते अभी केवल 22 भवनों का ही मूल्यांकन हुआ है। मूल्यांकन काफी अधिक होने से नीलामी प्रक्रिया में कोई शामिल होने को तैयार नहीं हो रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग ने मूल्यांकन कम करने के लिए तकनीकी समिति को पत्र भेजा है।
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जिले में 1060 प्राथमिक तथा 442 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं।जिले के विभिन्न क्षेत्रों में तमाम ऐसे परिषदीय विद्यालय हैं, जिनके पुराने भवन जर्जर हो चुके हैं। यह भवन पूरी तरह से निष्प्रयोज्य पड़े हुए हैं। अक्सर निष्प्रयोज्य पड़े ऐसे भवन दुर्घटना को दावत देते रहते हैं। दोपहर के अवकाश के बाद बच्चे जर्जर भवनों में या आसपास खेलते देखे जाते हैं। बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित रहते हैं। ऐसे भवनों को ध्वस्त किए जाने की मांग लंबे समय से अभिभावकों व ग्रामीणों की ओर से की जाती रही है।
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शासन के निर्देश पर संबंधित भवनों के मूल्यांकन के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। टीम में पीडब्ल्यूडी, सिंचाई विभाग व ग्रामीण अभियंत्रण के अधिशासी अभियंता शामिल हैं। यह टीम भवनों का स्थलीय जायजा लेकर उसका मूल्यांकन निर्धारित करेगी। टीम की रिपोर्ट के बाद बीएसए कार्यालय की ओर से ध्वस्तीकरण के लिए नीलामी की जाएगी। अधिक बोली लगाने वाली संस्था को ध्वस्तीकरण की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
अधिकारियों की मानें तो तकनीकी समिति ने प्रति जर्जर निष्प्रयोज्य भवनों की मूल्यांकन काफी ज्यादा कर दिए जाने से नीलामी प्रक्रिया में कोई शामिल होने को तैयार नहीं हो रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग ने दोबारा मूल्यांकन करने के लिए तकनीकी समिति को पत्र भेजा है। तकनीकी पेंच से मामला अधर में लटकने से अभिभावक परेशान हैं। इस मामले में कोई जिम्मेदार कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
बेसिक शिक्षा विभाग के जिला समन्वयक निर्माण अजीत तिवारी ने कहा कि एक वर्ष पूर्व परिषदीय विद्यालयों के कैंपस में 76 निष्प्रयोज्य जर्जर भवनों के मूल्यांकन के लिए तीन सदस्यीय टीम को पत्र भेजा गया, लेकिन अभी तक 22 भवनों की रिपोर्ट मिली है। मूल्यांकन काफी अधिक हो जाने से नीलामी प्रक्रिया मेें शामिल होने के लिए कोई संस्था तैयार नहीं हो रही है। समिति को मूल्यांकन कम करने के लिए पत्र भेजा गया है।

ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अवर अभियंता अभिनव श्रीवास्तव ने बताया कि बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से 76 निष्प्रयोज्य जर्जर भवनों का मूल्यांकन करने का पत्र मिला है। अभी तक 22 की ही रिपोर्ट भेजी गई है। पीडब्ल्यूडी की गाइडलाइन के अनुसार ही भवनों का मूल्यांकन किया गया है। मूल्यांकन प्रक्रिया जल्द ही पूरी कर ली जाएगी।
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