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Mau News: नए सिरे से होगा सेपरेशन यूनिट के लिए आवेदन
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मऊ। चार माह से सेपरेशन यूनिट (कंपोनेंट) को लेकर जिला अस्पताल प्रशासन को झटका लगा है। लाइसेंस की जो प्रक्रिया इन बीते आठ माह में ऑफलाइन की गई था, उसे अब निरस्त कर दिया गया। ऐसे में अब दोबारा नए सिरे से ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू करनी होगी, इसमें करीब चार माह लगेगा। उधर सेपरेशन यूनिट शुरू न होने से बीते कई माह से ऐसे मरीज जिन्हें प्लाज्मा की जरूरत होती है, उन मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
जिला अस्पताल में ब्लड बैंक के पास नवनिर्मित भवन में ब्लड कंपोनेंट सेप्रेशन यूनिट लोकार्पण तीन साल पहले कर दिया गया है। लेकिन अब तक इसको लेकर लाइसेंस न मिलने से यह यह यूनिट शुरू नहीं हो सका है। सीएमएस डॉक्टर धनंजय कुमार ने बताया कि लाइसेंस मिलने की इस माह में ही संभावना थी लेकिन आफलाइन आवेदन निरस्त होने के बाद अब ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू करनी होगी। इसमें करीब चार माह का समय लगेगा।
2022 में हुआ था लोकार्पण
ब्लड बैंक में 2022 में कंपोनेंट यूनिट शुरू करने के लिए अलग से बने भवन का लोकार्पण किया गया था। तीन साल बाद भी इसको लेकर अब तक लाइसेंस न मिलने से यह कागजों पर संचालित हो रहा है। यूनिट शुरू न होने रोजाना ब्लड बैंक से पांच से ज्यादा मरीजों को स्वास्थ्य कर्मी वापस कर दे रहे है। ब्लड बैंक की क्षमता 400 यूनिट की है। प्रतिदिन 8 से 10 यूनिट ब्लड की खपत होती है। वहीं, प्लेटलेट्स, प्लाज्मा आदि के लिए गंभीर मरीजों को बीएचयू रेफर करना पड़ता है। तीन साल पहले लोकार्पण हुआ तो बेहतर स्वास्थ्य सुविधा की आस जगी थी, लेकिन विभागीय लापरवाही से अभी तक यह संभव नहीं हो पाया।
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जिला अस्पताल में ब्लड बैंक के पास नवनिर्मित भवन में ब्लड कंपोनेंट सेप्रेशन यूनिट लोकार्पण तीन साल पहले कर दिया गया है। लेकिन अब तक इसको लेकर लाइसेंस न मिलने से यह यह यूनिट शुरू नहीं हो सका है। सीएमएस डॉक्टर धनंजय कुमार ने बताया कि लाइसेंस मिलने की इस माह में ही संभावना थी लेकिन आफलाइन आवेदन निरस्त होने के बाद अब ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू करनी होगी। इसमें करीब चार माह का समय लगेगा।
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2022 में हुआ था लोकार्पण
ब्लड बैंक में 2022 में कंपोनेंट यूनिट शुरू करने के लिए अलग से बने भवन का लोकार्पण किया गया था। तीन साल बाद भी इसको लेकर अब तक लाइसेंस न मिलने से यह कागजों पर संचालित हो रहा है। यूनिट शुरू न होने रोजाना ब्लड बैंक से पांच से ज्यादा मरीजों को स्वास्थ्य कर्मी वापस कर दे रहे है। ब्लड बैंक की क्षमता 400 यूनिट की है। प्रतिदिन 8 से 10 यूनिट ब्लड की खपत होती है। वहीं, प्लेटलेट्स, प्लाज्मा आदि के लिए गंभीर मरीजों को बीएचयू रेफर करना पड़ता है। तीन साल पहले लोकार्पण हुआ तो बेहतर स्वास्थ्य सुविधा की आस जगी थी, लेकिन विभागीय लापरवाही से अभी तक यह संभव नहीं हो पाया।
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