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Mau News: एआरटीओ कार्यालय में बाबुओं-दलालों का जाल... बिना दाम, नहीं होता काम
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मऊ। प्रशासनिक अधिकारियों की सख्ती के बाद भी एआरटीओ कार्यालय में बाहरी लोगों का प्रवेश नहीं थम रहा है। डीएल और वाहन से संबंधित सभी कार्यों के लिए अलग-अलग काउंटर हैं, फिर भी बाहरी लोग पीछे के रास्ते से अंदर बैठकर मनमर्जी से काम कराते हैं।
कार्यालय के बाहर स्थित दुकानों पर ऑनलाइन आवेदन कराकर दलाल आवेदक से काम के अनुसार जल्दी के लिए 30 से 40 फीसदी अधिक शुल्क लेते हैं। फिर उसमें से बाबुओं के अलावा अधिकारियों तक हिस्सा पहुंचाया जाता है। यदि कोई व्यक्ति अकेले पहुंचकर आवेदन करता है तो काउंटर पर बैठे बाबू कुछ न कुछ कमी बताकर दौड़ाते हैं।
ड्राइविग लाइसेंस बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के बाद बिना हजार-दो हजार खर्च किए टेस्ट पास नहीं कर सकते। थक हारकर उसे दलालों का सहारा लेना ही पड़ता है। उनके दखल के बगैर यहां छोटा काम भी होना मुश्किल है। परिसर के बाहर ही दलाल सांठगांठ कर लेते हैं।
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शनिवार को दोपहर 12 बजे अमर उजाला की टीम एआरटीओ कार्यालय पहुंची। एआरटीओ के चेंबर में कुर्सी खाली थी, यात्रीकर अधिकारी भी वहां नहीं थे। हर काउंटर पर एक बाबू तैनात है, लेकिन एक काउंटर पर दो से तीन लोग मौजूद थे, जिनके हाथों में फाइल थी। दो कमरे बाहर से बंद मिले। वहीं लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस के लिए कार्यालय के अंदर बैठा व्यक्ति 600 रुपये वसूलता है। एक काउंटर पर ऐसा व्यक्ति बैठा मिला, जिसकी संविदा मान्यता छह साल पहले समाप्त हो चुकी है, ऊपरी आमदनी के आधार पर उसे वहां बैठाया गया है।
जुलाई 2024 में रिटायर हो चुके एक बड़े बाबू वर्तमान लिपिकों के साथ बैठकर फाइलों का काम देखते हैं। बताया जा रहा उनको इसके लिए मानदेय भी दिया जाता है। यह ऑफिस खुलने पर पहुंचते हैं और ऑफिस बंद होने के बाद ही घर जाते हैं। चेचिस बनवाने, वाहन का टैक्स जमा करने, परमिट, फिटनेस आदि के लिए एआरटीओ साहब उन्हीं से बात करने के लिए भेज देते हैं।
वेटिंग में रहते हैं दलाल
दलालों का वर्च यह है कि लोगों से बाहर ही संपर्क कर फाइल लेकर एक दलाल कार्यालय में जाता है उसका काम हाने तक दूसरा दलाल इंतजार करता रहता है। पहले वाले के आने के बाद दूसरा जाता है। यह इसलिए किया जाता है कि कोई अधिकारी आए तो उन्हें आवेदक बताया जा सके।
एक अगस्त 2024 को एडीएम और एएसपी ने किया था निरीक्षण
लगातार मिल रही शिकायतों पर एडीएम सत्यप्रिय सिंह और एएसपी महेश सिंह अत्री ने एक अगस्त 2024 को एआरटीओ कार्यालय पर छापा मारा था। पहुंचते ही कुछ संदिग्ध व्यक्तियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। कुछ लोग चहारदीवारी से कूदकर भाग गए थे। सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर एआरटीओ सुहेल अहमद से पूछताछ की गई लेकिन वह संतोष जनक जवाब नहीं दे पाए थे। एटारटीओ सुहेल अहमद ने बताया कि कार्यालय में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक है। इसके बाद भी किसी कर्मचारी के कमरे में बाहरी व्यक्ति बैठ रहे हैं तो इसकी जानकारी लेकर कार्रवाई की जाएगी। वहीं सेवानिवृत्त लिपिक कार्यालय में अपनी पेंशन संबंधित कार्य के लिए आते हैं।
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कार्यालय के बाहर स्थित दुकानों पर ऑनलाइन आवेदन कराकर दलाल आवेदक से काम के अनुसार जल्दी के लिए 30 से 40 फीसदी अधिक शुल्क लेते हैं। फिर उसमें से बाबुओं के अलावा अधिकारियों तक हिस्सा पहुंचाया जाता है। यदि कोई व्यक्ति अकेले पहुंचकर आवेदन करता है तो काउंटर पर बैठे बाबू कुछ न कुछ कमी बताकर दौड़ाते हैं।
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ड्राइविग लाइसेंस बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के बाद बिना हजार-दो हजार खर्च किए टेस्ट पास नहीं कर सकते। थक हारकर उसे दलालों का सहारा लेना ही पड़ता है। उनके दखल के बगैर यहां छोटा काम भी होना मुश्किल है। परिसर के बाहर ही दलाल सांठगांठ कर लेते हैं।
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शनिवार को दोपहर 12 बजे अमर उजाला की टीम एआरटीओ कार्यालय पहुंची। एआरटीओ के चेंबर में कुर्सी खाली थी, यात्रीकर अधिकारी भी वहां नहीं थे। हर काउंटर पर एक बाबू तैनात है, लेकिन एक काउंटर पर दो से तीन लोग मौजूद थे, जिनके हाथों में फाइल थी। दो कमरे बाहर से बंद मिले। वहीं लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस के लिए कार्यालय के अंदर बैठा व्यक्ति 600 रुपये वसूलता है। एक काउंटर पर ऐसा व्यक्ति बैठा मिला, जिसकी संविदा मान्यता छह साल पहले समाप्त हो चुकी है, ऊपरी आमदनी के आधार पर उसे वहां बैठाया गया है।
जुलाई 2024 में रिटायर हो चुके एक बड़े बाबू वर्तमान लिपिकों के साथ बैठकर फाइलों का काम देखते हैं। बताया जा रहा उनको इसके लिए मानदेय भी दिया जाता है। यह ऑफिस खुलने पर पहुंचते हैं और ऑफिस बंद होने के बाद ही घर जाते हैं। चेचिस बनवाने, वाहन का टैक्स जमा करने, परमिट, फिटनेस आदि के लिए एआरटीओ साहब उन्हीं से बात करने के लिए भेज देते हैं।
वेटिंग में रहते हैं दलाल
दलालों का वर्च यह है कि लोगों से बाहर ही संपर्क कर फाइल लेकर एक दलाल कार्यालय में जाता है उसका काम हाने तक दूसरा दलाल इंतजार करता रहता है। पहले वाले के आने के बाद दूसरा जाता है। यह इसलिए किया जाता है कि कोई अधिकारी आए तो उन्हें आवेदक बताया जा सके।
एक अगस्त 2024 को एडीएम और एएसपी ने किया था निरीक्षण
लगातार मिल रही शिकायतों पर एडीएम सत्यप्रिय सिंह और एएसपी महेश सिंह अत्री ने एक अगस्त 2024 को एआरटीओ कार्यालय पर छापा मारा था। पहुंचते ही कुछ संदिग्ध व्यक्तियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। कुछ लोग चहारदीवारी से कूदकर भाग गए थे। सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर एआरटीओ सुहेल अहमद से पूछताछ की गई लेकिन वह संतोष जनक जवाब नहीं दे पाए थे। एटारटीओ सुहेल अहमद ने बताया कि कार्यालय में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक है। इसके बाद भी किसी कर्मचारी के कमरे में बाहरी व्यक्ति बैठ रहे हैं तो इसकी जानकारी लेकर कार्रवाई की जाएगी। वहीं सेवानिवृत्त लिपिक कार्यालय में अपनी पेंशन संबंधित कार्य के लिए आते हैं।