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कृषि रक्षा इकाइयों पर है रासायनिक दवाओं का टोंटा

Sun, 06 Dec 2020 10:41 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 06 Dec 2020 10:41 PM IST
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There is a bottleneck of chemical medicines on agricultural defense units
मऊ। रबी सीजन की अगेती गेहूं सहित अन्य फसलों की सिंचाई चल रही है, लेकिन कृषि रक्षा इकाइयों पर खर-पतवारनाशी दवाओं का टोटा है। इससे निजी दुकानदारों की खूब चांदी कट रही है। इससे किसानों को बाजार से अधिक दाम पर रासायनिक दवाएं खरीदना पड़ रहा है। हालत यह है कि उच्च दाम पर खरीदने के बाद भी गुुणवत्तापरक दवाएं नहीं मिल पा रही है। शिकायत के बाद भी आला अफसर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
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कृषि रक्षा विभाग के तहत जिले के सभी ब्लॉकों में राजकीय कृषि रक्षा इकाई की स्थापना की गई है। जबकि 212 निजी दुकानों को रासायनिक दवाएं बेचने का लाइसेंस दिया गया है। कृषि रक्षा इकाइयों से कर्बनडाजिम, सलफ्यूरान, क्लोरोपाईरीफॉस, बायोपेस्टीसाइड ट्राईकोडर्मा, ब्यूवेरिया, वेसियाना, सूडोमोनास सहित तमाम खर-पतवारनाशी रासायनिक दवाएं 75 प्रतिशत अनुदान पर मिलती हैं। इस समय गेहूं की सिंचाई चल रही है। जरूरत के समय राजकीय कृषि रक्षा इकाइयों पर खर-पतवारनाशी दवाओं का अकाल होने से किसानों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है।
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विभाग की तरफ से शासन को मांग पत्र दो माह पूर्व भेजा गया, लेकिन अभी तक रासायनिक दवाओं की आपूर्ति नहीं की जा सकी है। राजकीय कृषि रक्षा इकाइयों पर रासायनिक दवाओं का टोंटा रहने से निजी दुकानदारों की खूब चांदी कट रही है। वह किसानों को मनमाना दाम पर दवाएं बेच रहे हैं। किसानों की मानें तो अधिक दाम पर खरीदने के बाद भी गुणवत्तापरक दवाएं नहीं मिल पा रही है। शिकायत करने पर अधिकारी आश्वासन देकर टाल दे रहे हैं। इस बाबत जिला कृषि रक्षा अधिकारी उमेश कुमार का कहना है कि रासायनिक दवाओं के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
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किसान बोले : अनुदान पर उपलब्ध कराया जाए दवाएं
मधुबन। अगेती रबी फसल की सिंचाई चल रही है। लेेकिन राजकीय कृषि रक्षा इकाइयों पर खर-पतवारनाशी दवाओं का अभाव है। इससे किसानों को अनुदान पर रासायनिक दवाएं नहीं मिल पा रही है। इस संबंध में फतहपुर के किसान खालिद उस्मानी का कहना है कि गेहूं की फसल में उर्वरक छिड़काव का समय हो गया है। उर्वरक के साथ खरपतवानाशी दवाओं का भी छिड़काव कराना है, लेकिन राजकीय कृषि रक्षा इकाई पर रासायनिक दवा ही नहीं मिल पा रही है। निजी दुकान से अधिक दाम पर खरीदना मुश्किल हो रहा है।

दिघेड़ा के किसान राजेश मल्ल का कहना है कि निजी दुकानों से अधिक दाम पर खरीदने पर भी गुण्वत्तापरक रासायनिक दवाएं नहीं मिल पा रही है। कब तक उपलब्ध होगा आला अधिकारी आज कल आने की बात कहकर पल्ला झाड़ ले रहे हैं। खीरी कोठा के किसान हरिमोहन मल्ल का कहना है कि जरूरत के समय किसानों को योजनाओं का लाभ ही नहीं मिल पाता है। इसी गांव के किसान हरिमोहन मल्ल का कहना है कि विभागीय अधिकारियों के गैर जिम्मेदाराना रवैए से किसानों को अधिक दाम पर रासायनिक दवाएं खरीदना पड़ रहा है। इससे खेती की लागत बढ़ रही है।
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