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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mau News ›   There are 50 cases of marital disputes every month, 60% of women have offered to separate themselves.

Mau News: हर महीने दंपती विवाद के 50 मामले आ रहे, 60 फीसदी महिलाओं ने खुद अलग होने की पेशकश की

Sun, 22 Feb 2026 12:46 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 22 Feb 2026 12:46 AM IST
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There are 50 cases of marital disputes every month, 60% of women have offered to separate themselves.
आधुनिक जीवनशैली और बदलती सामाजिक सोच के बीच पारिवारिक रिश्तों की बुनियाद दरकती नजर आ रही है। महिला परामर्श केंद्र की वरिष्ठ सदस्य अर्चना उपाध्याय ने बताया कि हर महीने 50 से ज्यादा दंपती के बीच विवाद के नए मामले आ रहे हैं।
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इसमें करीब 30 मामले प्रेम-प्रसंग, पांच मामले लिव इन रिलेशनशिप और बाकी मामले अरेंज मैरिज के होते हैं। वर्ष 2025 में 500 से ज्यादा मामले बैठक में आए जिसमें 60 फीसदी महिलाओं ने खुद अलग होने की पेशकश रखी है।
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कई जोड़ों में तो शादी की पहली सालगिरह से पहले ही पति-पत्नी में विवाद इतना बढ़ रहा है कि, दोनों पक्ष अलग होने के लिए तलाक की अर्जी लगा रहे हैं। इस साल महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित वन स्टॉप सेंटर में तीन मामले आ चुके हैं, जबकि वर्ष 2025 में यह आंकड़ा 10 से अधिक था।
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वन स्टॉप सेंटर इंचार्ज संध्या सिंह ने बताया कि बीते जनवरी में एक जोड़े ने एक दूसरे पर आरोप लगाते हुए अलग होने की पेशकश रखी। काउंसलिंग में पता चला कि यह दोनों जोड़े करीब तीन साल तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहे उसके बाद शादी की, लेकिन शादी की पहली सालगिरह से अलग होने की राह पर चल पड़े हैं।
ऐसा ही एक मामला जिसमें युवक ने रात के समय पत्नी को सोशल साइट पर वक्त बिताने पर उसके चरित्र पर शंका जताई। वहीं उसकी पत्नी का तर्क था कि, शादी से पहले वो इसी तरह से सोशल साइट पर वक्त देती थी। अब वो उसे एक दायरे में रखने की कोशिश कर रहा है।
ऐसे में वह खुद पति से अलग रहना चाहती है। संध्या ने बताया कि बीते वर्ष 2025 से दस से ज्यादा मामले आए इसमें दो तीन मामले ऐसे रहे जिसमें सगाई के बाद शादी का लंबा गैप था। जिसके दरम्यान दोनों ने एक दूसरे से कई बार बात की एक दूसरे को समझा।
जैसे ही शादी हुई कुछ माह बाद वो ही बात पुरुष या महिला को खटकने लगी जिससे यह शादी भी टूटने के कगार पर पहुंच गई। बताया कि काउंसिलिंग कर ऐसे कई रिश्तों को तोड़ने से बचाने का प्रयास भी सफल हो रहा है, लेकिन कुछ रिश्ते टूट रहे हैं।
एक दूसरे को बिना समझे शादी करना पहला कारण

महिला परामर्श केंद्र की वरिष्ठ सदस्य अर्चना उपाध्याय ने बताया कि शादी योग्य लड़की-लड़के की खोज में माता पिता वर्षों परेशान होते हैं। इसमें मुख्य वजह एक दूसरे को समझने की कमी। बताया कि हर दूसरे सप्ताह में पुलिस लाइन में आयोजित बैठक में ऐसे दो से तीन मामले में काउंसलिंग की जाती हैं। बीते जनवरी से अब तक ऐसे पांच मामले आ चुके हैं, जिनमें शादी को एक साल भी नहीं हुआ है, बात तलाक तक पहुंच गई है। बताया कि यह समस्या किसी एक वर्ग के साथ नहीं बल्कि हर वर्ग के परिवार में है। शादी के बाद लड़के- लड़की की सोच न मिलने से परिवार टूट रहे हैं। एक दूसरे के साथ न रहने के लड़की और लड़के के अपने अपने तर्क है।


तर्क से नहीं आपसी समझ से बनते हैं घर : प्रो. योगेंद्रनाथ चौबे

डीसीएसके कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर योगेंद्रनाथ चौबे ने बताया कि घर तर्क से नहीं आपसी समझ से बनते हैं। बीते कुछ सालों में नए जोड़ों में देखने को मिल रहा है कि एक दूसरे को कंट्रोल करना और अपनी ही बात को ऊपर रखने की वजह से शादी के कुछ माह बाद ही नवविवाहित जोड़े कोर्ट कचहरी के चक्कर काटते नजर आ रहे हैं। शादी की बात पक्की होते ही लड़के और लड़की की फोन पर घंटों बात करना आम हो गया है। ऐसे में लड़की चाहती है कि लड़का उसकी सभी बात माने, शुरुआत में कुछ दिन ऐसा चलता है। शादी के बाद स्थिति बदलते ही दोनों में मनमुटाव इस कदर बढ़ जाते हैं कि वह एक दूसरे के साथ भी नहीं रहना चाहते हैं।
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