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इलाज के अभाव में दम नहीं तोड़ेंगे गरीबों के नौनिहाल

Sat, 06 Feb 2021 12:20 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 06 Feb 2021 12:20 AM IST
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The poor of the poor will not die due to lack of treatment
जिला अस्पताल स्थित पीआईसीयू में मरीजों का ईलाज करते चिकित्सक। - फोटो : MAU
मऊ। जिले में अब इलाज के अभाव में गरीब घर के नौनिहाल दम नहीं तोड़ेंगे। न ही उन्हें गंभीर हालत में लेकर नर्सिंग होम के चक्कर काटने पड़ेंगे। जिला अस्पताल में करोड़ों की लागत से बने पीडियाट्रिक्स इंटेसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) शुरू हो चुका है। जहां क्रिटिकल बीमारी में नौनिहाल और नवजातों को फ्री इलाज मिल रहा है। अब तक 147 गंभीर रूप से बीमार बच्चों का इलाज किया जा चुका है। इससे सबसे ज्यादा राहत गरीबों को मिल रही है।
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जिला अस्पताल परिसर में ब्लड बैंक के पास अलग जमीन में बना पीडियाट्रिक्स इंटेसिव केयर यूनिट गत 2020 में जुलाई से शुरू हुआ। जुलाई माह से दिसंबर तक पीआईसीयू में 128 बच्चे भर्ती हो चुके हैं। बच्चों का इलाज पीआईसीयू में तैनात तीन बालरोग विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. सीएस साहनी, डॉ. विवेक और डॉ. मनोज और 16 स्टॉफ द्वारा किया जा रहा है। जनवरी तक 19 बच्चों का इलाज किया जा चुका है। पीआईसीयू शुरू होने से सबसे ज्यादा लाभ गरीब तबके को मिल रहा है। जो अब अपने बच्चों का नि:शुल्क उपचार अत्याधुनिक पीआईसीयू में करा रहे हैं। जिसमें अत्याधुनिक पोर्टबल बेड के अलावा बच्चों की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए मॉनीटर, वेंटीलेटर सहित अन्य उपकरण हैं।
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इतना ही नहीं हर आठ घंटे की शिफ्ट में एक चिकित्सक और पांच से ज्यादा स्टॉफ हर वक्त उपलब्ध होते हैं। पीआईसीयू शुरू न होने से लोगों को अपने नवजातों के इलाज के लिए निजी अस्पताल में भटकना पड़ता था। महंगा इलाज के लिए लोगों को काफी दिक्कत उठानी पड़ती थी। इस दौरान कई बच्चों की सही समय पर इलाज नहीं मिलने से मौत हो चुकी है।
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क्या है पीआइसीयू यूनिट
दस बेड वाले पीडियाट्रिक्स इंटेसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) में तीन से पंद्रह साल के बच्चों को एडमिट किया जाता है। इसमें दो तरह की विंग होती है, एक सर्जरी से संबंधित, दूसरी मेडिसिन से संबंधित। यूनिट में इमरजेंसी जांच से जुड़े सभी संसाधन हैं। इनमें वेंटीलेटर, आक्सीजन जैसी जीवन रक्षक मशीनें शामिल हैं। इसके अलावा स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स की पूरी टीम की तैनाती होती है। जिससे मरीजों को उचित एवं ठीक से उपचार मिल सके।

खबरें प्रकाशित होने पर दो वर्ष बाद हुआ शुरू
स्वास्थ्य विभाग द्वारा 50 लाख 59 हजार रुपये की लागत से 2016-17 में पीआईसीयू भवन बनाने के लिए राशि अवमुक्त की गई थी। 2017-18 में कार्यदायी संस्था ने भवन बनाकर अस्पताल प्रबंधक को हैंडओवर कर दिया था। वहीं लखनऊ की संस्था ने आईसीयू बेड, बेड साइड मानीटर, सेंट्रल मानीटरिंग स्टेशन, वेंटीलेटर जैसे कई दूसरे मेडिकल उपकरण लगा दिए। इतना ही तीन चिकित्सक और 16 स्टॉफ की तैनाती कर दी गई, लेकिन पीआईसीयू शुरू न होने से इन चिकित्सकों तथा स्वास्थ्यकर्मियों को ओपीडी में ड्यूटी लगा दी गई थी। अमर उजाला द्वारा कई बार इस समस्या को प्रमुुखता से प्रकाशित करने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने 2020 जुलाई में पीआईसीयू यूनिट का संचालन शुरू कर दिया था।
जिला अस्पताल में पीआईसीयू यूनिट को शुरू कर दिया गया है। अब तक 147 से ज्यादा बच्चों का इलाज हो चुका है।
- डॉ. बृजकुमार, सीएमएस जिला अस्पताल
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