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घाघरा के जलस्तर में वृद्धि का क्रम जारी, तटवर्ती इलाकों में दहशत
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दोहरीघाट (मऊ)। घाघरा के जलस्तर में वृद्धि जारी रहने से तटवर्ती इलाकों के लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है। रविवार को नदी के जलस्तर में 15 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। नदी के उग्र रुप धारण करने से तटवर्ती इलाकों तथा ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
नेपाल द्वारा घाघरा में छोड़े गए डेढ़ लाख क्यूसेक पानी तथा एक हफ्ते से हो रही लगातार बारिश के कारण घाघरा के जलस्तर में वृद्धि का क्रम जारी रहने से तटवर्ती इलाके के लोगों की नींद उड़ गई है। नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो शनिवार को नदी का जलस्तर गौरीशंकर घाट पर 69.20 मीटर रहा।
रविवार को जलस्तर 69.35 मीटर पहुंच गया। इस तरह नदी के जलस्तर में गत 24 घंटे में 15 सेमी की बढ़ोत्तरी हुई है। घाघरा अभी खतरा बिंदु 69.90 मीटर से 55 सेमी नीचे बह रही है। नदी के रुख से नगर की ऐतिहासिक धरोहरों मुक्तिधाम, भारत माता मंदिर, खाकी बाबा की कुटी, रामजानकी मंदिर, दुर्गा मंदिर, शाही मस्जिद, हनुमान मंदिर, लोक निर्माण का डाक बंगला आदि पर खतरा मंडराने लगा है। वहीं तटवर्ती इलाकों के लोगों को नदी मेें बाढ़ आने की चिंता खाए जा रही है। धान की नर्सरी तैयार हो गई है, लेकिन नदी के उग्र तेवर को देख पशोपेश में हैं। सिंचाई विभाग अपने संसाधनों से बाढ़ आने की स्थिति में बचाव में जुटा है।
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जिले के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में लगातार झमाझम बारिश से क्षेत्र के किसानों में खुशी छा गई है। बारिश के बाद किसान अब धान रोपाई करने में जुट गए हैं।खेतों की जुताई तथा मेढ़बंदी का काम शुरू हो गया है। किसान कुदाल के साथ खेतों पर अपनी उपस्थिति मौजूद करवा रहे हैं। बारिश अगर इसी तरह मेहरबान रहा तो रोपाई कार्य काफी तेज होने के आसार बन गए हैं। फतहपुर मंडाव ब्लाक क्षेत्र के किसान रामलाल यादव, श्रीराम सिंह का कहना था कि मौसम अनुकूल होने से देर से डाली गई धान की नर्सरी का ग्रोथ तेजी से हो रहा है। अगेती डाली गई नर्सरी रोपाई करने योग्य हो गई है। बारिश का क्रम इसी तरह जारी रहा तो रोपाई में तेजी आ जाएगी। दूसरी तरफ बारिश के चलते ग्रामीण इलाकों के गड्ढे में तब्दील सडकों का नारकीय हाल हो गया है। जगह-जगह जलजमाव से राहगीरों को भारी परेशानी हो रही है।
बढुआ गोदाम में कई दिनों से लगातार हो रही बारिश से खेतों में पानी भर गया है। इसके चलते सब्जी तथा मेेंथा की फसल पर असर पड़ने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीर देखी जा रही थी। किसान खेतों से पानी निकालते देखे गए।कई दिनों से हो रही बारिश का क्रम रविवार को जारी रहा। निचले इलाकों में सब्जी तथा मेंथा फसल के खेतों में पानी भर जाने से फसल नष्ट होने का खतरा बढ़ गया है। अरहर की बुवाई कुछ दिनों के लिए रूक गई हैं। जिससे किसानों की रातों की नींद उड़ गई है।
बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान मेंथा की फसल को हुआ है। जिन किसानों की मेंथा की फसल खेतों में कटी पड़ी थी वह पूरी तरह से चौपट हो गई है। वहीं जिन किसानों की फसल तैयार है और कटाई न होने तथा खेतों में पानी भर जाने से वह भी पूरी तरह से बर्बाद होने का खतरा बढ़ गया है। अरहर की बुआई अब लेट हो जाएगी। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विनय सिंह ने बताया कि बारिश होने से धान की रोपाई के कार्य में और तेजी आएगी। जिन किसानों की धान की नर्सरी तैयार हो गई वे किसान धान की रोपाई की तैयारी में लग गए हैं। सब्जी की खेत में जमा पानी की निकासी करनी चाहिए। अन्यथा फसल खराब हो सकती है।
चिरैयाकोट संवाददाता के अनुसार रानीपुर क्षेत्र के ग्राम कमथरी में गांव के सीवान में स्थित शनिवार की रात हुई मूसलाधार बारिश के चलते एक पोल्ट्री फार्म गिर गया। जिसमें चार लाख रुपये का नुकसान हो गया।
रानीपुर ब्लाक रानीपुर क्षेत्र के ग्राम कमथरी निवासी अश्वनी राय पुत्र जितेंद्र राय ने पोल्ट्री फार्म गांव के सीवान में खोल रखा था। पोल्ट्री फार्म में 400 मुर्गियां थी। शनिवार की रात में हुई मूसलाधार बारिश के चलते पोल्ट्री फार्म के चारो तरफ बारिश का पानी भर जाने के चलते पोल्ट्री फार्म के लिए बनाई गई दीवार रात में गिर गई। फार्म स्वामी दूसरे मकान में था जिससे वह घायल नही हुआ। फार्म के ऊपर लगाई गई सीमेंट की चादरों के नीचे दबाकर सभी मुर्गियां मर गईं। इस संबंध में फार्म स्वामी अश्वनी राय ने बताया की मुर्गियों सहित लगभग चार लाख रुपए का नुकसान हुआ है।
घाघरा नदी में जलस्तर बढ़ते ही दुबारी मौजा के देवारा क्षेत्र के खैरा पुरवा से निकट कटान होने की सूचना मिलने के बाद ग्राम प्रधान और राजस्व कर्मचारी ग्रामीणों के साथ नाव से कटान प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। साथ ही बाढ़ से प्रभावित कटान पीड़ितों को कटान से फसल नुकसान होने वाले कटान पीड़ितों को क्षतिपूर्ति तहसील से दिलवाने का आश्वासन दिया। खैरा गांव में नाव चलाने की व्यवस्था की जाएगी। इस दौरान ग्राम प्रधान सपन कन्नौजिया, लेखपाल अशोक सिंह, जयराम यादव, राम पुकार मौर्य, अनिल चौरसिया, मंटी जायसवाल, भुल्लन, जियाऊल मुस्तफा आदि शामिल रहे।
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नेपाल द्वारा घाघरा में छोड़े गए डेढ़ लाख क्यूसेक पानी तथा एक हफ्ते से हो रही लगातार बारिश के कारण घाघरा के जलस्तर में वृद्धि का क्रम जारी रहने से तटवर्ती इलाके के लोगों की नींद उड़ गई है। नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो शनिवार को नदी का जलस्तर गौरीशंकर घाट पर 69.20 मीटर रहा।
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रविवार को जलस्तर 69.35 मीटर पहुंच गया। इस तरह नदी के जलस्तर में गत 24 घंटे में 15 सेमी की बढ़ोत्तरी हुई है। घाघरा अभी खतरा बिंदु 69.90 मीटर से 55 सेमी नीचे बह रही है। नदी के रुख से नगर की ऐतिहासिक धरोहरों मुक्तिधाम, भारत माता मंदिर, खाकी बाबा की कुटी, रामजानकी मंदिर, दुर्गा मंदिर, शाही मस्जिद, हनुमान मंदिर, लोक निर्माण का डाक बंगला आदि पर खतरा मंडराने लगा है। वहीं तटवर्ती इलाकों के लोगों को नदी मेें बाढ़ आने की चिंता खाए जा रही है। धान की नर्सरी तैयार हो गई है, लेकिन नदी के उग्र तेवर को देख पशोपेश में हैं। सिंचाई विभाग अपने संसाधनों से बाढ़ आने की स्थिति में बचाव में जुटा है।
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जिले के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में लगातार झमाझम बारिश से क्षेत्र के किसानों में खुशी छा गई है। बारिश के बाद किसान अब धान रोपाई करने में जुट गए हैं।खेतों की जुताई तथा मेढ़बंदी का काम शुरू हो गया है। किसान कुदाल के साथ खेतों पर अपनी उपस्थिति मौजूद करवा रहे हैं। बारिश अगर इसी तरह मेहरबान रहा तो रोपाई कार्य काफी तेज होने के आसार बन गए हैं। फतहपुर मंडाव ब्लाक क्षेत्र के किसान रामलाल यादव, श्रीराम सिंह का कहना था कि मौसम अनुकूल होने से देर से डाली गई धान की नर्सरी का ग्रोथ तेजी से हो रहा है। अगेती डाली गई नर्सरी रोपाई करने योग्य हो गई है। बारिश का क्रम इसी तरह जारी रहा तो रोपाई में तेजी आ जाएगी। दूसरी तरफ बारिश के चलते ग्रामीण इलाकों के गड्ढे में तब्दील सडकों का नारकीय हाल हो गया है। जगह-जगह जलजमाव से राहगीरों को भारी परेशानी हो रही है।
बढुआ गोदाम में कई दिनों से लगातार हो रही बारिश से खेतों में पानी भर गया है। इसके चलते सब्जी तथा मेेंथा की फसल पर असर पड़ने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीर देखी जा रही थी। किसान खेतों से पानी निकालते देखे गए।कई दिनों से हो रही बारिश का क्रम रविवार को जारी रहा। निचले इलाकों में सब्जी तथा मेंथा फसल के खेतों में पानी भर जाने से फसल नष्ट होने का खतरा बढ़ गया है। अरहर की बुवाई कुछ दिनों के लिए रूक गई हैं। जिससे किसानों की रातों की नींद उड़ गई है।
बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान मेंथा की फसल को हुआ है। जिन किसानों की मेंथा की फसल खेतों में कटी पड़ी थी वह पूरी तरह से चौपट हो गई है। वहीं जिन किसानों की फसल तैयार है और कटाई न होने तथा खेतों में पानी भर जाने से वह भी पूरी तरह से बर्बाद होने का खतरा बढ़ गया है। अरहर की बुआई अब लेट हो जाएगी। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विनय सिंह ने बताया कि बारिश होने से धान की रोपाई के कार्य में और तेजी आएगी। जिन किसानों की धान की नर्सरी तैयार हो गई वे किसान धान की रोपाई की तैयारी में लग गए हैं। सब्जी की खेत में जमा पानी की निकासी करनी चाहिए। अन्यथा फसल खराब हो सकती है।
चिरैयाकोट संवाददाता के अनुसार रानीपुर क्षेत्र के ग्राम कमथरी में गांव के सीवान में स्थित शनिवार की रात हुई मूसलाधार बारिश के चलते एक पोल्ट्री फार्म गिर गया। जिसमें चार लाख रुपये का नुकसान हो गया।
रानीपुर ब्लाक रानीपुर क्षेत्र के ग्राम कमथरी निवासी अश्वनी राय पुत्र जितेंद्र राय ने पोल्ट्री फार्म गांव के सीवान में खोल रखा था। पोल्ट्री फार्म में 400 मुर्गियां थी। शनिवार की रात में हुई मूसलाधार बारिश के चलते पोल्ट्री फार्म के चारो तरफ बारिश का पानी भर जाने के चलते पोल्ट्री फार्म के लिए बनाई गई दीवार रात में गिर गई। फार्म स्वामी दूसरे मकान में था जिससे वह घायल नही हुआ। फार्म के ऊपर लगाई गई सीमेंट की चादरों के नीचे दबाकर सभी मुर्गियां मर गईं। इस संबंध में फार्म स्वामी अश्वनी राय ने बताया की मुर्गियों सहित लगभग चार लाख रुपए का नुकसान हुआ है।
घाघरा नदी में जलस्तर बढ़ते ही दुबारी मौजा के देवारा क्षेत्र के खैरा पुरवा से निकट कटान होने की सूचना मिलने के बाद ग्राम प्रधान और राजस्व कर्मचारी ग्रामीणों के साथ नाव से कटान प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। साथ ही बाढ़ से प्रभावित कटान पीड़ितों को कटान से फसल नुकसान होने वाले कटान पीड़ितों को क्षतिपूर्ति तहसील से दिलवाने का आश्वासन दिया। खैरा गांव में नाव चलाने की व्यवस्था की जाएगी। इस दौरान ग्राम प्रधान सपन कन्नौजिया, लेखपाल अशोक सिंह, जयराम यादव, राम पुकार मौर्य, अनिल चौरसिया, मंटी जायसवाल, भुल्लन, जियाऊल मुस्तफा आदि शामिल रहे।