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Mau News: शिक्षा सत्र के छह दिन बीते, निजी स्कूलों की मनमानी पर नहीं लगा अंकुश
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स्कूल ड्रेस और किताब की रसीद।
शिक्षा सत्र के छह दिन बीत गए, लेकिन निजी स्कूल संचालकों की मनमानी पर अंकुश नहीं लगाया जा सका है। अभिभावक जर्नादन प्रसाद, महेंद्र यादव, श्रीकृष्ण प्रसाद, सुरेंद्र नाथ यादव का कहना है कि निजी विद्यालयों में एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों के बजाय निजी प्रकाशकों की किताबें काफी कीमत पर खरीदनी पड़ रही हैं। केवल किताबों के लिए 3,874 से 6,728 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
शिकायत के बाद भी निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकी है। जिले में 2400 से अधिक विद्यालयों में एक अप्रैल से नया शिक्षा सत्र शुरू हो गया है। निजी स्कूलों की तरफ से पाठ्यपुस्तकों और फीस को लेकर अभिभावकों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं।
सरकार की तरफ से पहली से 12वीं कक्षा तक एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के निर्देश के बाद भी अधिकांश स्कूलों में इसका पालन होता नहीं दिख रहा है। परेशान अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की अधिक कीमत पर किताबें खरीदनी पड़ रही हैं।
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अभिभावकों की मानें तो एडमिशन फीस, परीक्षा शुल्क सहित अलग-अलग मदों में जोड़कर फीस ली जा रही है, जिससे शिक्षा अब आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही है। इसके अलावा कुछ स्कूलों द्वारा कॉपी, पुस्तकें और यूनिफॉर्म चुनिंदा दुकानों से खरीदने को भी कहा जा रहा है।
इन्हें खरीदने में अभिभावकों के पसीने छूट रहे हैं। सब मिलाकर अभिभावकों पर हर साल एक बच्चे पर 40 से 55 हजार रुपये तक का बोझ पड़ जाता है।
जिला विद्यालय निरीक्षक गौतम प्रसाद का कहना है कि लिखित शिकायत मिलने पर मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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शिकायत के बाद भी निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकी है। जिले में 2400 से अधिक विद्यालयों में एक अप्रैल से नया शिक्षा सत्र शुरू हो गया है। निजी स्कूलों की तरफ से पाठ्यपुस्तकों और फीस को लेकर अभिभावकों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं।
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सरकार की तरफ से पहली से 12वीं कक्षा तक एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के निर्देश के बाद भी अधिकांश स्कूलों में इसका पालन होता नहीं दिख रहा है। परेशान अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की अधिक कीमत पर किताबें खरीदनी पड़ रही हैं।
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अभिभावकों की मानें तो एडमिशन फीस, परीक्षा शुल्क सहित अलग-अलग मदों में जोड़कर फीस ली जा रही है, जिससे शिक्षा अब आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही है। इसके अलावा कुछ स्कूलों द्वारा कॉपी, पुस्तकें और यूनिफॉर्म चुनिंदा दुकानों से खरीदने को भी कहा जा रहा है।
इन्हें खरीदने में अभिभावकों के पसीने छूट रहे हैं। सब मिलाकर अभिभावकों पर हर साल एक बच्चे पर 40 से 55 हजार रुपये तक का बोझ पड़ जाता है।
जिला विद्यालय निरीक्षक गौतम प्रसाद का कहना है कि लिखित शिकायत मिलने पर मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।