मऊ। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश निशांत मान की अदालत ने सोमवार को आरटीआई कार्यकर्ता बाल गोविंद सिंह की हत्या के मामले में नामजद 7 आरोपियों में समेश सिंह काका समेत दह को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। एक आरोपी शैलेंद्र यादव की विचारण के दौरान मौत हो जाने उसके खिलाफ मुकदमे की कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी। मामला सरायलखंसी थाना क्षेत्र के बढुआ गोदाम गांव की शीला सिंह पत्नी स्व. बाल गोविंद सिंह की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया था। वादिनी का आरोप था कि बढुआ गोदाम के पूर्व प्रधान शैलेंद्र यादव का भाई फर्जी जन्मतिथि दिखाकर सिपाही पद पर भर्ती हो गया था। उनके पति बालगोविंद सिंह ने इसकी शिकायत पुलिस विभाग में की थी। इसी रंजिश में 16 जनवरी 2019 को सुबह दो मोटरसाइकिल पर सवार 6 लोग आए और मेरे पति बाल गोविंद सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने वादिनी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर विवेचना के बाद रमेश सिंह काका, अभिमन्यु यादव उर्फ मोनू, शैलेंद्र यादव, गुड्डू यादव, घनश्याम गुप्ता, सतीश यादव उर्फ दादू, राकेश यादव उर्फ केसरी के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में पेश किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी फौजदारी ने 10 गवाहों को पेश कर पक्ष रखा। वहीं, बचाव पक्ष ने कहा कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी रमेश सिंह काका, अभिमन्यु यादव उर्फ मोनू, गुड्डू यादव, घनश्याम गुप्ता, सतीश यादव उर्फ दादू, राकेश यादव उर्फ केसरी को संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त कर दिया। आरोपी शैलेंद्र यादव की विचारण के दौरान मौत हो जाने के कारण उसके खिलाफ मुकदमे की कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी।