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वैज्ञानिक पद्धति से बीज उत्पादन करने की जरूरत
ब्यूरो, मऊ, अमर उजाला
Updated Mon, 06 Apr 2015 12:07 AM IST
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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के तत्वावधान में बीज निदेशालय कुशमौर में रविवार को अखिल भारतीय समन्वित शोध परियोजना की तीन दिवसीय 30वीं वार्षिक बैठक का समापन हो गया।
इस दौरान प्रजनक बीज उत्पादन व बीज तकनीकी शोध की केंद्रवार व अनुभागवार प्रगति की चर्चा की गई। इसमें लेखा परीक्षा व निगरानी रिपोर्ट की भी समीक्षा की गई।
इस बैठक में सार्वजनिक व निजी क्षेत्र के बीजोत्पादन संबंधी संस्थानों, उपक्रमों से आए 200 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें समिति ने वर्ष 2015-16 के दौरान होने वाले अनुसंधान कार्यों के तकनीकी कार्यक्रमों की अनुशंसा की।
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बीज संबंधित संस्थानों तथा वैज्ञानिकों के मध्य परिचर्चा विषय पर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय जबलपुर के अधिष्ठाता डा. एसके राव की अध्यक्षता में विशेष सत्र आयोजित किया गया।
वैज्ञानिकों के विचार मंथन से यह निष्कर्ष निकला कि भविष्य में बीज दर की उचित मात्रा का निर्धारण, संकर बीज उत्पादन के लिए नए क्षेत्रों का निर्धारण, धान की बीज द्वारा सीधी बुआई , श्री पद्धति के द्वारा बीज उत्पादन, बीज की गुणवत्ता में सुधार आदि क्षेत्रों पर कार्य करने की आवश्यकता है।
जिससे कि भविष्य में देश गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर हो जाए। बैठक में आए प्रतिनिधियों व प्रतिभागियों द्वारा बीज अनुसंधान निदेशालय कुशमौर के प्रयोगशाला व प्रक्षेत्र का भ्रमण किया।
बीज अनुसंधान निदेशालय कुशमौर की उपलब्धियों व निजी बीज कंपनियों के उत्पादों को दर्शाने के लिए प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। बीज अनुसंधान निदेशालय के परियोजना निदेशक राजेंद्र प्रसाद ने आभार प्रकट किया।
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इस दौरान प्रजनक बीज उत्पादन व बीज तकनीकी शोध की केंद्रवार व अनुभागवार प्रगति की चर्चा की गई। इसमें लेखा परीक्षा व निगरानी रिपोर्ट की भी समीक्षा की गई।
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इस बैठक में सार्वजनिक व निजी क्षेत्र के बीजोत्पादन संबंधी संस्थानों, उपक्रमों से आए 200 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें समिति ने वर्ष 2015-16 के दौरान होने वाले अनुसंधान कार्यों के तकनीकी कार्यक्रमों की अनुशंसा की।
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बीज संबंधित संस्थानों तथा वैज्ञानिकों के मध्य परिचर्चा विषय पर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय जबलपुर के अधिष्ठाता डा. एसके राव की अध्यक्षता में विशेष सत्र आयोजित किया गया।
वैज्ञानिकों के विचार मंथन से यह निष्कर्ष निकला कि भविष्य में बीज दर की उचित मात्रा का निर्धारण, संकर बीज उत्पादन के लिए नए क्षेत्रों का निर्धारण, धान की बीज द्वारा सीधी बुआई , श्री पद्धति के द्वारा बीज उत्पादन, बीज की गुणवत्ता में सुधार आदि क्षेत्रों पर कार्य करने की आवश्यकता है।
जिससे कि भविष्य में देश गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर हो जाए। बैठक में आए प्रतिनिधियों व प्रतिभागियों द्वारा बीज अनुसंधान निदेशालय कुशमौर के प्रयोगशाला व प्रक्षेत्र का भ्रमण किया।
बीज अनुसंधान निदेशालय कुशमौर की उपलब्धियों व निजी बीज कंपनियों के उत्पादों को दर्शाने के लिए प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। बीज अनुसंधान निदेशालय के परियोजना निदेशक राजेंद्र प्रसाद ने आभार प्रकट किया।