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खतरा बिंदु से 45 सेमी ऊपर बह रही नदी

Mon, 25 Oct 2021 12:12 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 25 Oct 2021 12:12 AM IST
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River flowing 45 cm above danger point
सरयू नदी के जलस्तर मेें वृद्धि का क्रम लगातार जारी है। इससे तटवर्ती इलाके के लोगों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है। पिछले 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 25 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। तेजी से बढ़ते जलस्तर से श्मशान घाट पर शवदाह की सीढ़ियां डूब जाने से लोग शव को ऊपर ही जला रहे हैं। जानकी घाट से मुक्तिधाम तक लगभग 90 मीटर तक नदी के बैकरोलिंग होने से भारत माता मंदिर सहित ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
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नदी का पानी आसपास के क्षेत्र में फैलने से हजारों एकड़ फसल एक बार फिर डूबने की संभावना संभावना प्रबल हो गई है। वहीं किसानों को मवेशियों के लिए चारे का इंतजाम करने में काफी परेशानी हो रह है। नदी के रौद्र रुप धारण करने से लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें देखी ही जा रही है। सरयू नदी के खतरा निशान 45 सेमी ऊपर बहने से कस्बा सहित तटवर्ती इलाकों में दहशत है।
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नदी का खतरा बिंदु 69.90 मीटर है। गौरी शंकर घाट पर नदी का जलस्तर रविवार को 70.35 मीटर पर पहुंच गया। जबकि शनिवार को 70.10 मीटर रहा। इस तरह नदी का जलस्तर 24 घंटे में 25 सेंटीमीटर बढ़ गया। नदी में तेजी से बढ़ते जलस्तर से श्मशान घाट पर शवदाह की सीढ़ियां डूब जाने से लोग शव को ऊपर ही जला रहे हैं।
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जानकी घाट से लेकर मुक्तिधाम तक करीब 90 मीटर तक नदी में बैकरोलिंग होने से भारत माता मंदिर, मुक्तिधाम, सरस्वती मंदिर, खाकी बाबा कुटी, दुर्गा मंदिर, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला सहित ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व जहां खतरे में पड़ गया है। वही रामपुर धनौली, नई बाजार, नवली, बहादुरपुर, सरया, पतनई, ठाकुर गांव, गोधनी, बीबीपुर, सरासो, जमीराचौराडीह सहित विभिन्न तटवर्ती गांवों में पानी घुसने से हजारों एकड़ फसल पानी में डूब गई हैं। अब बची खुची फसल भी नष्ट होने के कगार पर है।
तीन मुहल्लों में घुसा बाढ़ का पानी
दोहरीघाट। सरयू नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से कस्बावासियों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। नदी के जलस्तर का बढ़ना जारी रहा तो नगर के मल्लाह टोला, भगवानपुरा तथा दलित बस्ती में पानी घुस सकता है। इसके चलते जहां आवागमन प्रभावित होगा। वहीं जलजमाव से महामारी फैल सकती है।
कटान से विलीन हो चुकी हैं ऐतिहासिक धरोहरें:
दोहरीघाट। सरयू में हुए कटान से नागा बाबा की कुटी, गौरी शंकर घाट, प्राचीन शिव मंदिर, जानकी मंदिर, शिवालय, विश्रामालय, खाकी बाबा की कुटी, जानकी घाट की सीढ़ियां विलीन हो चुकी हैं यह याद करते ही नगर वासियों के रोंगटे खड़े हो जा रहे थे। बची हुई ऐतिहासिक धरोहर भी कटान की जद में हैं। यदि शासन प्रशासन की तरफ से ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने का स्थाई समाधान नहीं निकाला तो वह दिन दूर नहीं जब नगर की ऐतिहासिक धरोहरो का भी अस्तित्व समाप्त हो जाएगा यदि इन ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।

1998 की स्थिति दोहराने की ओर सरयू नदी:
दोहरीघाट। सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर ने नगरवासियों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं और जेहन में केवल एक ही सवाल उठ रहा है कि क्या 1998 की स्थिति को दोहराने की तरफ नदी फिर बढ़ रही है। 1998 में का नदी का जलस्तर 71.27 मीटर पहुंच गया था। नगर के आधा क्षेत्र में पानी घुस गया था। दोहरीघाट-आजमगढ़ तथा दोहरीघाट बलिया मार्ग भी एक पखवारे तक प्रभावित रहा। 1998 में नदी के विकराल रूप को याद कर लोग सिहर जा रहे थे। संवाद
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