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Chandrashekhar Azad Jayanti: स्वतंत्रता आंदोलन में क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद

Tue, 21 Jul 2020 10:33 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 21 Jul 2020 10:33 PM IST
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Chandrashekhar Azad Birth Anniversary: Revolutionary Chandrashekhar Azad in the freedom movement
कोपागंज ब्लाक के देवकली विशुनपुर स्थित देवी की कुटी, जहां चन्द्रशेखर आजाद भी आए थे। - फोटो : MAU
मऊ। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक कहे जाने वाले शहीद चंद्रशेखर आजाद की जयंती बृहस्पतिवार को मनाई जाएगी। स्वतंत्रता आंदोलन की लड़ाई में क्रांतिकारियों को सहेजने के लिए चंद्रशेखर आजाद सन् 1942 में मऊ आए थे। हालांकि उस समय मऊ जिला सृजित नहीं था। कोपागंज ब्लाक क्षेत्र के देवकली विशुनपुर गांव के पास स्थित साध्वी की कुटिया का उस समय आजमगढ़ जिले का एक हिस्सा हुआ करता था।
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साध्वी की कुटिया आजादी की लड़ाई के दौरान क्रांतिकारियों की शरणस्थली हुआ करती थी। इस कुटिया में चंद्रशेखर आजाद क्रांतिकारियों से मिलने आए थे। यह कुटिया खंडहर के रूप में आज भी विद्यमान है। यहां सन 1942 के स्वतंत्रता आंदोलन में चंद्रशेखर आजाद जिले के क्रांतिकारियों से मिलने आए थे। कोपागंज ब्लाक क्षेत्र के देवकली विशुनपुर गांव के बगल में घने पेड़ों से घिरी साध्वी की कुटिया का अपना अलग अस्तित्व है।
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इस संबंध में देवकली विशुनपुर गांव के पीयूष राय, सुभाष यादव, अजीत मौर्य, रामाशीष गुप्ता ने बताया कि हम लोगों को दादाजी ने बताया था कि देवी साध्वी की कुटी सन् 1942 में क्रांतिकारियों की शरणस्थली रही थी। यहां क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद जिल के क्रांतिकारियों से मिलने आए थे। जिले के क्रांतिकारी रामलोचन राय, झारखंडे राय, सरजू पांडेय, अलगू राय शास्त्री आदि यहीं पर अंग्रेजों के खिलाफ योजनाएं बनाते थे।
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इस कुटिया में चंद्रशेखर आजाद के अलावा नेताजी सुभाष चंद्र बोष जैसे बडे़ क्रांतिकारी आए थे। घने पेड़ों से घिरा होने के कारण अंग्रेजों की निगाह से कुटिया बची रही।अंग्रेजों भारत छोड़ो अभियान में इस गांव की अति सक्रियता के कारण तत्कालीन जिलाधिकारी आजमगढ़ ने गांव के क्रांतिकारियों को बलपूर्वक दबाने का आदेश दिया था।अंग्रेजों ने शरणस्थली बनी कुटिया को जला दिया, लेकिन यहां के क्रांतिकारियों ने लड़ाई से अपने कदम पीछे नहीं खींचे।
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