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रहम फरमा, अब तो पानी बरसा दे मौला
mau
Updated Fri, 20 Jul 2018 12:52 AM IST
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नगर के मुस्लिम इंटर कालेज में नमाज के बाद बारिश के लिए दुआखानी करते मुस्लिम बंधु।
- फोटो : mau
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मानसून की बेरुखी और भीषण गर्मी से निजात के लिए मुसलमानों ने विशेष नमाज अदा की और खुदा की बारगाह में बारिश के लिए हाथ उठाए। गुरुवार की सुबह नगर के सिंधी कालोनी स्थित मुस्लिम इण्टर कालेज व डोमनपुरा स्थित अंसार ग्राउंड में जमीयत अहले हदीस मऊ की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में भारी संख्या में मुसलमान शिरकत लिए पहुंचे थे। हर एक के लबों पर यही लफ्ज थे कि ऐ मौला रहम फरमा, अब तो पानी बरसा दे मौला। इस अवसर पर विशेष नमाज अदा करने के बाद मौलाना रफीक अहमद सल्फी ने तकरीर करते हुए कहा कि बारिश ना होना और जमीन से वाटर लेवल का कम होना हमारे गुनाहों की तरफ एक इशारा है। उन्होंने कहा कि आज अगर हम परेशान हैं तो हम अपने गुनाहों की वजह से, हम गरीबों का हक मार रहे हैं, लोगों पर जुल्मों सितम कर रहे हैं इसलिए अल्लाह ने बारिश को सजा के तौर पर रोक रखा है।
हमारे गुनाहों की वजह से इंसान ही नहीं बल्कि जानवर भी परेशान हैं और फसलें बर्बाद हो रही हैं इसलिए आज हम सब सच्ची तौबा करके अपने रब के सामने गुनाहों की माफी मांगें। कहा कि सच्चे दिल से मांगी गई दुआ बारबाहे इलाही मेें जरूरी कुबूल होती है। लिहाजा हम सच्चे दिल से परवर दिगार से मांगे तो वह मुराद पूरी करेगा। मौलाना ने कहा कि हमे इस बात का संकल्प भी लेना होगा कि इस बात का ध्यान रखें कि ऐसा कोई काम न हो जो खुदा को बुरा लगे और उसका नतीजा इस तरह निकले। कोशिश हो कि ज्यादा से ज्यादा अल्लाह की इताअत की जाए और उसका शुक्रिया अदा किया जाए। वह बेनियाज है। हर मुसीबत को दूर करने वाला है। वह जरूर सुनेगा और खूब सुनेगा। इस इबादत के बाद बारिश जरूर होगी। उधर, तेज धूप के बावजूद मुसलमान बच्चे, युवा और बुजुर्ग अल्लाह की बारगाह में हाथ फैलाए दुआओं में मशगूल रहे।
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हमारे गुनाहों की वजह से इंसान ही नहीं बल्कि जानवर भी परेशान हैं और फसलें बर्बाद हो रही हैं इसलिए आज हम सब सच्ची तौबा करके अपने रब के सामने गुनाहों की माफी मांगें। कहा कि सच्चे दिल से मांगी गई दुआ बारबाहे इलाही मेें जरूरी कुबूल होती है। लिहाजा हम सच्चे दिल से परवर दिगार से मांगे तो वह मुराद पूरी करेगा। मौलाना ने कहा कि हमे इस बात का संकल्प भी लेना होगा कि इस बात का ध्यान रखें कि ऐसा कोई काम न हो जो खुदा को बुरा लगे और उसका नतीजा इस तरह निकले। कोशिश हो कि ज्यादा से ज्यादा अल्लाह की इताअत की जाए और उसका शुक्रिया अदा किया जाए। वह बेनियाज है। हर मुसीबत को दूर करने वाला है। वह जरूर सुनेगा और खूब सुनेगा। इस इबादत के बाद बारिश जरूर होगी। उधर, तेज धूप के बावजूद मुसलमान बच्चे, युवा और बुजुर्ग अल्लाह की बारगाह में हाथ फैलाए दुआओं में मशगूल रहे।
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