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जिले में आई यूरिया की रैक, भेजी जा रही समितियों पर
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मऊ। जिले की सभी साधन सहकारी समितियों और पीसीएफ डीसीएफ की गोदामों पर यूरिया खाद की किल्लत काफी दिनों से थी। कुछ समितियों के गोदामों पर मोटे दाने की यूरिया थी लेकिन किसान इसे खरीद नहीं रहे थे। इसलिए यूरिया का अभाव काफी दिनों से बना था। हालांकि एआर कोआपरेटिव की तरफ से यूरिया की डिमांड की गई थी, देर से ही सही लेकिन सोमवार की रात में यूरिया की रैक मऊ जंक्शन पर लग गई है।
मंगलवार को कई समितियों पर पहुंच भी गई, अब की बार आंवला कारखाने से जो यूरिया की रैक लगी है, वह महीन दाने की है। जनपद की 92 साधन सहकारी समितियों में अधिकांश गोदामों पर यूरिया खाद नहीं थी। रतनपुरा और मुहम्मदाबाद गोहना ब्लाक की कुछ समितियों पर मोटेदाने की यूरिया थी लेकिन किसान इसे लेना नहीं चाहते हैं। चूंकि धान की रोपाई हुए लगभग एक महीने का समय बीत चुका है और इस अवधि में धान की फसल में यूरिया का छिड़काव किया जाना फसल के लिए लाभप्रद माना जाता है।
समितियों पर महीन दाने वाली यूरिया के न होने से किसान परेशान थे। एआर कोआपरेटिव की ओर से यूरिया की डिमांड की गई थी लेकिन कारखाने से यूरिया आने में विलंब हुआ है। इसलिए किसान परेशान थे अब आंवला कारखाने से यूरिया की एक रैक सोमवार की रात में लग गई है। वहां से ट्रकों से साधन सहकारी समितियों पर यूरिया भेजी जा रही है। दो तीन दिनों में सभी समितियों और पीसीएफ डीसीएफ के गोदामों पर महीन दाने वाली यूरिया पहुंच जाएगी। इस बाबत एआर कोआपरेटिव विवेक कौशल का कहना है कि महीन दाने वाली यूरिया की रैक आ गई है। सभी समितियों पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया एक दो दिनों में पहुंचा दी जाएगी।
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मोटे और महीन दाने की यूरिया में नहीं है कोई अंतर:
जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार कहते हैं कि मोटे दाने वाली अथवा महीन दाने वाली यूरिया की गुणवत्ता में कोई अंतर नहीं है। अंतर सिर्फ साइज का है। उन्होंने बताया कि मोटे दाने वाली और महीन दाने वाली यूरिया में नाइट्रोजन की मात्रा समान रूप से 46 प्रतिशत होती है। उन्होंने दावा किया हमने दोनों प्रकार के दानों वाली यूरिया की जांच करके यह पुष्टि कर लिया है। उन्होंने बताया कि मोटदाने वाली यूरिया खेत की मिट्टी में अपेक्षाकृत कुछ देरी से घुलती है। इससे फसल को कई दिनों तक नाइट्रोजन मिलता रहता है। इसके विपरीत महीन दाने वाली यूरिया अपेक्षाकृत जल्दी मिट्टी में घुल जाती है।इसलिए इससे अपेक्षाकृत कम दिनों तक ही फसल को नाइट्रोजन मिल पाता है। उन्होंने बताया कि यूरिया का छिड़काव करते समय खेतों में पर्याप्त नमी होनी चाहिए। नमी कम होने पर मोटे दानों वाली यूरिया घुलने में कुछ अधिक समय लगाएगी। हालांकि इन दोनों की गुणवत्ता एक समान है।
आधार और पीओएस मशीन से ही करें यूरिया की बिक्री
जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार कहते हैं कि जल्दी ही दौ रैक और यूरिया जनपद को मिलने वाली है। इसलिए अब यूरिया का कोई अभाव नहीं रह जाएगा। इसलिए किसान भाई परेशान न हों और संतुलित मात्रा में यूरिया का उपयोग करें। यूरिया का संग्रह करने की कोशिश न करें। उन्होंने समितियों के सचिवों तथा बाजार के लाइसेंसधारी उर्वरक विक्रेताओं से कहा है कि वे आधार के अनुसार पीओएस मशीन के माध्यम से उर्वरकों की बिक्री करें। ऐसा न करने वाले उर्वरक विक्रेता का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
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मंगलवार को कई समितियों पर पहुंच भी गई, अब की बार आंवला कारखाने से जो यूरिया की रैक लगी है, वह महीन दाने की है। जनपद की 92 साधन सहकारी समितियों में अधिकांश गोदामों पर यूरिया खाद नहीं थी। रतनपुरा और मुहम्मदाबाद गोहना ब्लाक की कुछ समितियों पर मोटेदाने की यूरिया थी लेकिन किसान इसे लेना नहीं चाहते हैं। चूंकि धान की रोपाई हुए लगभग एक महीने का समय बीत चुका है और इस अवधि में धान की फसल में यूरिया का छिड़काव किया जाना फसल के लिए लाभप्रद माना जाता है।
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समितियों पर महीन दाने वाली यूरिया के न होने से किसान परेशान थे। एआर कोआपरेटिव की ओर से यूरिया की डिमांड की गई थी लेकिन कारखाने से यूरिया आने में विलंब हुआ है। इसलिए किसान परेशान थे अब आंवला कारखाने से यूरिया की एक रैक सोमवार की रात में लग गई है। वहां से ट्रकों से साधन सहकारी समितियों पर यूरिया भेजी जा रही है। दो तीन दिनों में सभी समितियों और पीसीएफ डीसीएफ के गोदामों पर महीन दाने वाली यूरिया पहुंच जाएगी। इस बाबत एआर कोआपरेटिव विवेक कौशल का कहना है कि महीन दाने वाली यूरिया की रैक आ गई है। सभी समितियों पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया एक दो दिनों में पहुंचा दी जाएगी।
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मोटे और महीन दाने की यूरिया में नहीं है कोई अंतर:
जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार कहते हैं कि मोटे दाने वाली अथवा महीन दाने वाली यूरिया की गुणवत्ता में कोई अंतर नहीं है। अंतर सिर्फ साइज का है। उन्होंने बताया कि मोटे दाने वाली और महीन दाने वाली यूरिया में नाइट्रोजन की मात्रा समान रूप से 46 प्रतिशत होती है। उन्होंने दावा किया हमने दोनों प्रकार के दानों वाली यूरिया की जांच करके यह पुष्टि कर लिया है। उन्होंने बताया कि मोटदाने वाली यूरिया खेत की मिट्टी में अपेक्षाकृत कुछ देरी से घुलती है। इससे फसल को कई दिनों तक नाइट्रोजन मिलता रहता है। इसके विपरीत महीन दाने वाली यूरिया अपेक्षाकृत जल्दी मिट्टी में घुल जाती है।इसलिए इससे अपेक्षाकृत कम दिनों तक ही फसल को नाइट्रोजन मिल पाता है। उन्होंने बताया कि यूरिया का छिड़काव करते समय खेतों में पर्याप्त नमी होनी चाहिए। नमी कम होने पर मोटे दानों वाली यूरिया घुलने में कुछ अधिक समय लगाएगी। हालांकि इन दोनों की गुणवत्ता एक समान है।
आधार और पीओएस मशीन से ही करें यूरिया की बिक्री
जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार कहते हैं कि जल्दी ही दौ रैक और यूरिया जनपद को मिलने वाली है। इसलिए अब यूरिया का कोई अभाव नहीं रह जाएगा। इसलिए किसान भाई परेशान न हों और संतुलित मात्रा में यूरिया का उपयोग करें। यूरिया का संग्रह करने की कोशिश न करें। उन्होंने समितियों के सचिवों तथा बाजार के लाइसेंसधारी उर्वरक विक्रेताओं से कहा है कि वे आधार के अनुसार पीओएस मशीन के माध्यम से उर्वरकों की बिक्री करें। ऐसा न करने वाले उर्वरक विक्रेता का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।