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Mau News: घोसी चीनी मिल के मरम्मत कोष पर सवाल, सांसद ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की
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घोसी किसान सहकारी चीनी मिल के मरम्मत और रखरखाव के लिए स्वीकृत छह करोड़ 29 लाख रुपये के कोष पर गंभीर सवाल उठे हैं। सांसद राजीव राय ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये जारी होने के बावजूद मिल बदहाल रही और पेराई सत्र के बीच में ही बंद हो गई। यह जानकारी भारत सरकार के सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल द्वारा लोकसभा में दिए गए जवाब से सामने आई है।
मंत्री ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में उत्तर प्रदेश सरकार ने मिल के मरम्मत और रखरखाव के लिए लगभग छह करोड़ उनतीस लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की थी। इसके अतिरिक्त, गन्ना मूल्य भुगतान सहित अन्य मदों में भी करोड़ों रुपये की वित्तीय सहायता दी गई।
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सपा सांसद राजीव राय ने सवाल उठाया कि जब करोड़ों रुपये जारी हुए थे, तो मिल को मशीनों की खराबी के कारण बंद क्यों करना पड़ा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री के लिखित जवाब से यह स्पष्ट है कि मरम्मत के लिए पैसा पहले ही स्वीकृत था। मिल बंद होने से हजारों गन्ना किसानों को भारी परेशानी हुई।
सांसद ने बताया कि पेराई सत्र के शुभारंभ पर ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा की मौजूदगी में भी मिल परिसर की बदहाल स्थिति तस्वीरों में साफ दिखी थी।
धन के दुरुपयोग का आरोप
सांसद राजीव राय ने कहा कि किसानों के नाम पर करोड़ों रुपये स्वीकृत होने के बावजूद चीनी मिल बदहाल रही। उन्होंने पूछा कि यदि धनराशि का सही उपयोग नहीं हुआ, तो अब तक जांच क्यों नहीं कराई गई। उन्होंने इसे क्षेत्र के हजारों किसानों की आजीविका और भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय बताया। उन्होंने मांग की कि जारी धनराशि के उपयोग की निष्पक्ष जांच हो और अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
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उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये जारी होने के बावजूद मिल बदहाल रही और पेराई सत्र के बीच में ही बंद हो गई। यह जानकारी भारत सरकार के सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल द्वारा लोकसभा में दिए गए जवाब से सामने आई है।
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मंत्री ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में उत्तर प्रदेश सरकार ने मिल के मरम्मत और रखरखाव के लिए लगभग छह करोड़ उनतीस लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की थी। इसके अतिरिक्त, गन्ना मूल्य भुगतान सहित अन्य मदों में भी करोड़ों रुपये की वित्तीय सहायता दी गई।
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सपा सांसद राजीव राय ने सवाल उठाया कि जब करोड़ों रुपये जारी हुए थे, तो मिल को मशीनों की खराबी के कारण बंद क्यों करना पड़ा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री के लिखित जवाब से यह स्पष्ट है कि मरम्मत के लिए पैसा पहले ही स्वीकृत था। मिल बंद होने से हजारों गन्ना किसानों को भारी परेशानी हुई।
सांसद ने बताया कि पेराई सत्र के शुभारंभ पर ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा की मौजूदगी में भी मिल परिसर की बदहाल स्थिति तस्वीरों में साफ दिखी थी।
धन के दुरुपयोग का आरोप
सांसद राजीव राय ने कहा कि किसानों के नाम पर करोड़ों रुपये स्वीकृत होने के बावजूद चीनी मिल बदहाल रही। उन्होंने पूछा कि यदि धनराशि का सही उपयोग नहीं हुआ, तो अब तक जांच क्यों नहीं कराई गई। उन्होंने इसे क्षेत्र के हजारों किसानों की आजीविका और भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय बताया। उन्होंने मांग की कि जारी धनराशि के उपयोग की निष्पक्ष जांच हो और अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।