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रूप का चांद जो बादल से नहाकर निकला...
ब्यूरो, मऊ, अमर उजाला
Updated Sun, 22 Feb 2015 10:52 PM IST
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सामाजिक संस्था नेफोर्ड के तत्वाधान में डा. श्यामनारायण पांडेय एवं शहीद पारसनाथ सिंह की स्मृति में रविवार की रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में कवियों ने अपनी-अपनी रचनाओं से लोगों को बांधे रखा। आगरा से आए प्रसिद्ध गीतकार रामेंद्रमोहन त्रिपाठी ने श्रृंगार रस की पंक्तियां सुनाकर लोगों का दिल जीत लिया। सुनाया कि रूप जका चांद जब बादल से नहाकर निकला, हमने ऋषियों को भी आसन से फिसलते देखा।
मधु राय ने वाणी वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद कवि सम्मेलन में शंकर कैमूरी ने वो आदमी तलाशो जो करके दिखा दे, पत्थर को मोम कर दे शीशे का घर बना दे।
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सुनाकर वाहवाही लूटी। हरिनारायण हरीश ने कब तक ठुकराए जाएंगे हम, अन्त्यज अस्पृश्य बताकर, प्रतिभाओं के अंगुठे काटे जाएंगे आखिर कब तक सुनाकर समाज में आज भी ऊंच नीच के नाम पर प्रतिभाओं को दबाने की व्यथा का वर्णन किया।
कार्यक्रम में रामेंद्र मोहन त्रिपाठी को साहित्यक अवदान के लिए तथा डा. एससी तिवारी को उनके सामाजिक कार्य के लिए पं. श्यामनारायण पाण्डेय व शहीद पारसनाथ सिंह स्मृति चिह्न 2015 से अलंकृत किया गया।
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कार्यक्रम में कवियों ने अपनी-अपनी रचनाओं से लोगों को बांधे रखा। आगरा से आए प्रसिद्ध गीतकार रामेंद्रमोहन त्रिपाठी ने श्रृंगार रस की पंक्तियां सुनाकर लोगों का दिल जीत लिया। सुनाया कि रूप जका चांद जब बादल से नहाकर निकला, हमने ऋषियों को भी आसन से फिसलते देखा।
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मधु राय ने वाणी वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद कवि सम्मेलन में शंकर कैमूरी ने वो आदमी तलाशो जो करके दिखा दे, पत्थर को मोम कर दे शीशे का घर बना दे।
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सुनाकर वाहवाही लूटी। हरिनारायण हरीश ने कब तक ठुकराए जाएंगे हम, अन्त्यज अस्पृश्य बताकर, प्रतिभाओं के अंगुठे काटे जाएंगे आखिर कब तक सुनाकर समाज में आज भी ऊंच नीच के नाम पर प्रतिभाओं को दबाने की व्यथा का वर्णन किया।
कार्यक्रम में रामेंद्र मोहन त्रिपाठी को साहित्यक अवदान के लिए तथा डा. एससी तिवारी को उनके सामाजिक कार्य के लिए पं. श्यामनारायण पाण्डेय व शहीद पारसनाथ सिंह स्मृति चिह्न 2015 से अलंकृत किया गया।