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गर्मी के कारण बिलबिलाए लोग
ब्यूरो/ अमर उजाला, मऊ
Updated Sun, 17 Apr 2016 12:03 AM IST
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चिलचिलाती धूप और लू से बचने के के लिए मुंह बांधकर नगर क्षेत्र के सहादतपुरा बाजार में जाती युवतियां
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गर्मी बढ़ने के कारण लोगों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। लोग गर्मी से राहत के लिए तरह तरह के विकल्प तलाशने लगे हैं। गर्मी से पशु पक्षी से लेकर आम जन बेहाल हैं।
अप्रैल महीना के शुरुआत से ही तापमान में वृद्घि का क्रम जारी है। गर्मी से बचने के लिए सत्तू, बेल का शर्बत, आम का पन्ना, तरबूजा, ककड़ी, खीरा आदि का सेवन कर रहे हैं कि ताकि गर्मी से राहत मिले और लू न लगे। वहीं बच्चे गर्मी से राहत पाने के लिए जिन पोखरों और नदियों में पानी है वहां जी भरके तैराकी के मजा के साथ गर्मी से राहत पाने का प्रयत्न कर रहे हैं। तालाबों और नदियों के किनारे पशु पक्षियों ने भी अपना डेरा डाल लिया है।
वह भी इन तालाबों और नदियों के किनारे अपना आशियाना बना लिए हैं। गर्मी से बचने के लिए लोग दोपहर में घर और आफिसों से बाहर नहीं निकलना चाहते हैं। लड़कियां जहां धूप से बचने के लिए स्कार्प का इस्तेमाल कर रही हैं। वहीं महिलाएं छाता लेकर चल रही हैं। बाजारों में भी दोपहर को सन्नाटा पसरा रह रहा है। धूप से बचने केलिए लोग छांव की तलाश कर रहे हैं।
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उधर गरीब तबके के लोगों को देशी फ्रीज यानि मटका काफी राहत दे रहा है। बाजारों में मिट्टी के बर्तनों की दुकानें सज गई हैं। दूकानों घड़ा, सुराही आदि मिट्टी के बर्तनों की डिमांड बढ़ गई है। अधिकांश घरों में इसे बालू के ऊपर रखकर पानी ठंडा कर पीने में इस्तेमाल किया जा रहा है
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अप्रैल महीना के शुरुआत से ही तापमान में वृद्घि का क्रम जारी है। गर्मी से बचने के लिए सत्तू, बेल का शर्बत, आम का पन्ना, तरबूजा, ककड़ी, खीरा आदि का सेवन कर रहे हैं कि ताकि गर्मी से राहत मिले और लू न लगे। वहीं बच्चे गर्मी से राहत पाने के लिए जिन पोखरों और नदियों में पानी है वहां जी भरके तैराकी के मजा के साथ गर्मी से राहत पाने का प्रयत्न कर रहे हैं। तालाबों और नदियों के किनारे पशु पक्षियों ने भी अपना डेरा डाल लिया है।
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वह भी इन तालाबों और नदियों के किनारे अपना आशियाना बना लिए हैं। गर्मी से बचने के लिए लोग दोपहर में घर और आफिसों से बाहर नहीं निकलना चाहते हैं। लड़कियां जहां धूप से बचने के लिए स्कार्प का इस्तेमाल कर रही हैं। वहीं महिलाएं छाता लेकर चल रही हैं। बाजारों में भी दोपहर को सन्नाटा पसरा रह रहा है। धूप से बचने केलिए लोग छांव की तलाश कर रहे हैं।
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उधर गरीब तबके के लोगों को देशी फ्रीज यानि मटका काफी राहत दे रहा है। बाजारों में मिट्टी के बर्तनों की दुकानें सज गई हैं। दूकानों घड़ा, सुराही आदि मिट्टी के बर्तनों की डिमांड बढ़ गई है। अधिकांश घरों में इसे बालू के ऊपर रखकर पानी ठंडा कर पीने में इस्तेमाल किया जा रहा है